देवरिया। गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कई दिनों तक कथित रूप से अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान जब थाने के CCTV कैमरों के खराब होने की जानकारी सामने आई तो अदालत ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक से सवाल किया कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
CCTV बंद मिलने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
गौरी बाजार थाने से जुड़े मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई। देवरिया के एसपी अभिजीत आर. शंकर और थाना प्रभारी को अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ा।
पिछली सुनवाई में न्यायालय ने थाने में लगे CCTV कैमरों की स्थिति और उस अवधि की रिकॉर्डिंग के संबंध में जानकारी मांगी थी, जिस दौरान चार लोगों को कथित तौर पर हिरासत में रखा गया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की ओर से बताया गया कि थाने में लगा CCTV कैमरा खराब था और संबंधित समय पर काम नहीं कर रहा था। इस जानकारी के बाद अदालत ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने SP से पूछा- SHO को सस्पेंड क्यों नहीं किया?
CCTV जैसी महत्वपूर्ण निगरानी व्यवस्था के काम नहीं करने पर न्यायालय ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक से पूछा कि संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ अब तक निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अदालत का सवाल थाने की निगरानी व्यवस्था के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही से भी जुड़ा था। न्यायालय ने यह जानना चाहा कि जब थाने में CCTV काम नहीं कर रहा था तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
‘माफी अदालत से नहीं, हिरासत में रखे लोगों से मांगिए’
सुनवाई के दौरान देवरिया के एसपी ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि, न्यायालय ने इस पर भी कड़ा रुख अपनाया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि माफी अदालत से मांगने के बजाय उन लोगों से मांगी जानी चाहिए, जिन्हें कथित तौर पर अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया था। न्यायालय की इस टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि मामले में प्रभावित लोगों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही उसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
पुलिस के जवाबों पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाबों पर न्यायालय ने तीखी नाराजगी जाहिर की।
रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी में पुलिस अधिकारियों के जवाबों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें ‘झूठों का झुंड’ तक कहा। अदालत की यह टिप्पणी पुलिस पक्ष की ओर से प्रस्तुत जवाबों को लेकर न्यायालय की नाराजगी को दर्शाती है।
चार याचियों को मिलेगा कुल 65 हजार रुपये मुआवजा
अदालत ने मामले में राहत देते हुए राज्य सरकार को चारों याचियों को कुल
65 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आदेश के मुताबिक तीन याचियों को
20-20 हजार रुपये और एक अन्य याची को 5 हजार रुपये दिए जाएंगे।
खास बात यह है कि न्यायालय ने मुआवजे की राशि संबंधित थाना प्रभारी के वेतन से
वसूल कर दिए जाने का निर्देश दिया है। इससे मामले में
व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने को लेकर अदालत के रुख का पता चलता है।
पुलिस हिरासत और CCTV व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला कथित अवैध हिरासत के साथ-साथ थानों में निगरानी के लिए लगाए गए
CCTV सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
थानों में CCTV कैमरे लगाने का उद्देश्य हिरासत, पूछताछ और अन्य महत्वपूर्ण
गतिविधियों की निगरानी को मजबूत करना है। ऐसे में किसी गंभीर मामले से संबंधित अवधि में
कैमरे के काम नहीं करने की जानकारी सामने आना अदालत के लिए चिंता का विषय बना।
थाना प्रभारी पर कार्रवाई को लेकर बढ़ी जवाबदेही
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और मुआवजे के आदेश के बाद मामले में पुलिस अधिकारियों की
जवाबदेही अहम हो गई है। विशेष रूप से संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई नहीं किए
जाने को लेकर अदालत की नाराजगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देवरिया के गौरी बाजार थाने से जुड़े इस प्रकरण में अब पुलिस प्रशासन को
अदालत के सवालों और निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी।
निष्कर्ष
देवरिया के इस मामले ने थानों में CCTV निगरानी, हिरासत में लिए गए
लोगों के अधिकार और पुलिस अधिकारियों की
जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CCTV खराब होने और
थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने पर जिस तरह सख्त रुख अपनाया,
उससे स्पष्ट है कि न्यायालय इस प्रकरण को गंभीरता से देख रहा है।
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