उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित भव्य राम कथा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया और भगवान श्रीराम के आदर्शों को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और संत समाज के लोगों की उपस्थिति रही।
राम कथा भारतीय संस्कृति की आत्मा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्श जीवन के भी प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि राम कथा समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। राम के आदर्श आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करते हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का विशेष सम्मान
कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। रामभद्राचार्य को रामायण और रामचरितमानस के प्रमुख विद्वानों में गिना जाता है तथा उन्होंने सनातन परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सनातन संस्कृति के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखती है। उन्होंने युवाओं से भारतीय मूल्यों और संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
राम कथा कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। पूरे आयोजन स्थल को धार्मिक और
सांस्कृतिक रंगों से सजाया गया था। भजन, कीर्तन और राम कथा के प्रसंगों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज में
एकता, भाईचारे और सेवा की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
राम कथा को सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का माध्यम बताया गया।
लखनऊ में आयोजित यह राम कथा कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं
बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का
संदेश देने वाला महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और
जगद्गुरु रामभद्राचार्य की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक विशेष बना दिया।
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