मोदी कैबिनेट के तीन बड़े फैसले: मनरेगा का नाम बदला, डिजिटल जनगणना को हरी झंडी

मोदी कैबिनेट ने 15 दिसंबर 2025 की बैठक में तीन बड़े फैसले लिए हैं, जो ग्रामीण भारत और डेटा संग्रह को नई दिशा देंगे। पहला फैसला मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करना और काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना है। दूसरा फैसला डिजिटल जनगणना को हरी झंडी देना है। अमर उजाला और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये फैसले महात्मा गांधी की जयंती वर्ष और डिजिटल इंडिया को मजबूत करने के लिए लिए गए हैं। मनरेगा से 5 करोड़+ परिवारों को लाभ मिलेगा, जबकि डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रह तेज और सटीक होगा। यह ब्लॉग इन तीन फैसलों की पूरी डिटेल्स, लाभ, कार्यान्वयन और प्रभाव बताता है। यदि आप ग्रामीण रोजगार या जनगणना से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।

पहला फैसला: मनरेगा का नाम और रूप बदला

कैबिनेट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ कर दिया। मुख्य बदलाव:

  • नया नाम: पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना।
  • काम के दिन: 100 से बढ़ाकर 125 दिन।
  • बजट: 2025-26 में 1 लाख करोड़+।
  • लागू: 1 अप्रैल 2026 से।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करेगा।”

दूसरा फैसला: काम के दिन 125, ग्रामीणों को बड़ी राहत

काम के दिनों में बढ़ोतरी से:

  • सालाना 25 दिन अतिरिक्त रोजगार।
  • मजदूरी 250-300 रुपये प्रति दिन।
  • अतिरिक्त आय 6,000-7,500 रुपये।
  • सूखा या बाढ़ में राहत।
  • 5 करोड़+ परिवार लाभान्वित।

यह बढ़ोतरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगी।

तीसरा फैसला: डिजिटल जनगणना को हरी झंडी

कैबिनेट ने डिजिटल जनगणना को मंजूरी दी। मुख्य बिंदु:

  • पूरी तरह डिजिटल – ऐप और टैबलेट से।
  • 2026 में शुरू।
  • जाति जनगणना भी शामिल संभावित।
  • डेटा सटीक और तेज संग्रह।
  • बजट 50,000 करोड़+।

यह जनगणना नीतियां बनाने में मदद करेगी।

फैसलों का प्रभाव: ग्रामीण भारत मजबूत

  • ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा।
  • गांधी जी को श्रद्धांजलि।
  • डिजिटल जनगणना से सटीक डेटा।
  • यूपी, बिहार जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा लाभ।