जवान की हत्या
विवाद से हत्या तक की कहानी
घटना प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र के एक पार्किंग लॉट के पास शाम करीब 7 बजे घटी। पीड़ित जवान, 28 वर्षीय अजय कुमार (नाम परिवर्तित), भारतीय सेना की एक बटालियन में तैनात थे और छुट्टी पर घर लौटे हुए थे। वे अपनी बाइक पर सवार होकर दोस्त के साथ पार्किंग में वाहन खड़ा करने गए थे। वहां पार्किंग मैनेजर के साथ मामूली बहस हो गई, जब जवान ने पास मांगा। गवाहों के मुताबिक, बहस तीखी हो गई और अचानक एक संदिग्ध ने जेब से पिस्टल निकाल ली। गोली पीड़ित के सीने में लगी, और वे मौके पर ही गिर पड़े।
दोस्त ने तुरंत हेल्पलाइन 112 पर कॉल किया। इलाके में अफरा-तफरी मच गई, और लोग भागने लगे। एसओ करछना ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचते ही फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य संग्रह शुरू कर दिया। खून के धब्बे, खोखा और CCTV फुटेज से सुराग मिले। पीड़ित को जीएनआईसी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में एक गोली के निशान की पुष्टि हुई।
गिरफ्तारियां: पुलिसकर्मी का शामिल होना चौंकाने वाला
पुलिस ने 24 घंटे के अंदर 5 आरोपियों को दबोच लिया। मुख्य आरोपी पार्किंग मैनेजर रवि शर्मा (30 वर्ष), उसके साथी विक्रम (28), संतोष (32), और एक पूर्व पुलिसकर्मी रामू (45) हैं। सबसे चौंकाने वाली गिरफ्तारी एक वर्तमान कांस्टेबल की हुई, जो पार्किंग मैनेजर का रिश्तेदार बताया जा रहा है। एसएसपी डॉ. परशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आरोपियों के पास से एक देशी पिस्टल, 10 जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद हुए। वे सभी स्थानीय गुंडों के साथ जुड़े थे।”
पूछताछ में मुख्य आरोपी रवि ने कबूल किया, “जवान ने पार्किंग पास के लिए हल्ला मचाया। गुस्से में मैंने गोली चला दी। पुलिसकर्मी रिश्तेदार ने हमें बचाने की कोशिश की, लेकिन फंस गया।” पुलिस का मानना है कि यह हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक गुस्से का नतीजा। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं, और उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट व हत्या के धाराओं में केस दर्ज है।
पीड़ित परिवार का दर्द: सेना का साथ
पीड़ित जवान के परिवार में मां-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। वे प्रयागराज के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहते थे।
पत्नी ने रोते हुए कहा, “वह छुट्टी पर आया था, कल ही घर लौटा था।
पार्किंग के लिए कौन सोच सकता था ऐसा होगा?
” सेना के अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात की और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया।
जिला प्रशासन ने 5 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की।
स्थानीय लोगों ने पार्किंग माफिया के खिलाफ प्रदर्शन किया,
मांग की कि ऐसे ठेकों पर सख्ती हो।
प्रयागराज में बढ़ते अपराध: पार्किंग माफिया की भूमिका
यह घटना प्रयागराज में पार्किंग माफिया की बढ़ती मनमानी को उजागर करती है।
शहर के व्यस्त बाजारों जैसे कटरा, चौक और करछना में ऐसी पार्किंग लॉट्स पर गुंडागर्दी आम है।
पिछले 6 महीनों में 3 ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं,
जहां विवाद से मारपीट हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को पार्किंग कॉन्ट्रैक्ट्स की निगरानी बढ़ानी चाहिए।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद, स्थानीय स्तर पर चुनौतियां बरकरार हैं।
