अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर में नया मोड़, ऑटो सेक्टर पर ट्रंप की बड़ी धमकी
अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहा व्यापार युद्ध अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाली कारों, ट्रकों और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की धमकी दी है। ट्रंप के मुताबिक यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2027 से लागू की जा सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की नई टैरिफ नीति के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया है।
*ट्रंप ने कनाडा को दी कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिका के साथ व्यापार में अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी। उनका कहना है कि यदि कनाडा अमेरिकी मांगों के अनुरूप नहीं आता है तो उसे और गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप ने कनाडा के ऑटो सेक्टर के साथ-साथ स्टील और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी टैरिफ के दायरे में लाने की बात कही है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक तनाव और बढ़ने की आशंका है।
कार्नी का पलटवार, अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार किया है। कनाडा ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह अमेरिका के नए शुल्क के जवाब में 8 सितंबर 2026 से कई अमेरिकी उत्पादों पर डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ लागू करेगा।
प्रस्तावित कदमों में स्टील, डेयरी, उपकरणों और अन्य अमेरिकी उत्पादों को निशाना बनाया जा सकता है। कार्नी ने यह भी संकेत दिया है कि कनाडा ऐसा कोई व्यापार समझौता स्वीकार नहीं करेगा जिससे उसकी आर्थिक और राजनीतिक संप्रभुता प्रभावित हो।
दोनों देशों के बीच हालिया वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद टकराव और बढ़ गया।
व्यापार वार्ता क्यों हुई नाकाम?
अमेरिका और कनाडा के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों देश अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच पाए। व्यापार शुल्क, ऑटो उद्योग, स्टील और अन्य क्षेत्रों के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार संबंधों को लेकर भी मतभेद सामने आए।
हालिया वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडाई वस्तुओं पर नए 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किए। इसके जवाब में कनाडा ने भी प्रतिशोधी शुल्क लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
ऑटो इंडस्ट्री क्यों है सबसे ज्यादा प्रभावित?
अमेरिका और कनाडा का ऑटो उद्योग एक-दूसरे से बेहद गहराई से जुड़ा हुआ है। कनाडा के ओंटारियो में स्थित वाहन निर्माण संयंत्रों और अमेरिकी राज्यों, खासकर मिशिगन, के बीच पार्ट्स और तैयार वाहनों की सप्लाई चेन सीमा पार कई बार चलती है।
ऐसे में 50 प्रतिशत तक टैरिफ लागू होने से वाहन निर्माण की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों की लागत, मुनाफे, सप्लाई चेन और अंततः कारों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है।
फोर्ड, जनरल मोटर्स और स्टेलेंटिस जैसी कंपनियों की उत्तरी अमेरिकी उत्पादन
व्यवस्था इसी सीमा-पार सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी हुई है। इसलिए नए टैरिफ का असर केवल
आयातकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ऑटोमोटिव सेक्टर पर पड़ सकता है।
अमेरिका-कनाडा व्यापार पर कितना बड़ा असर?
अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।
ऐसे में लगातार बढ़ते टैरिफ दोनों देशों के कारोबार और उपभोक्ताओं पर दबाव डाल सकते हैं।
टैरिफ का सीधा उद्देश्य आयात को महंगा बनाना होता है, लेकिन कंपनियां बढ़ी हुई लागत का
कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं। इसके कारण वाहनों और
अन्य आयातित उत्पादों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
क्या ट्रेड वॉर और बढ़ सकता है?
मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद के जल्द खत्म होने की
संभावना फिलहाल अनिश्चित है। एक ओर ट्रंप अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दे रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर कार्नी सरकार अमेरिका के खिलाफ जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है।
हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। कार्नी ने संकेत दिया है कि
यदि अमेरिका उचित रवैये के साथ बातचीत की मेज पर लौटता है तो वार्ता फिर शुरू हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह विवाद?
अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता व्यापार तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता।
ऑटोमोबाइल, स्टील, ऊर्जा और औद्योगिक सप्लाई चेन में दोनों देशों की गहरी निर्भरता है।
यदि टैरिफ युद्ध लंबा चलता है तो वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में बदलाव कर सकती हैं।
इससे उत्पादन लागत, निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा पर असर पड़ सकता है।
उत्तरी अमेरिका में व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक बाजारों पर भी
दबाव देखने को मिल सकता है। खास तौर पर ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में
कंपनियों को अपनी उत्पादन और निवेश योजनाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रंप की कनाडाई कारों,
ट्रकों और ऑटो पार्ट्स पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की धमकी और कार्नी सरकार की
जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे या टैरिफ की
नई लड़ाई उत्तरी अमेरिकी ऑटो उद्योग और व्यापक व्यापार व्यवस्था को और नुकसान पहुंचाएगी।
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