अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने की तैयारी, भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा बड़ा असर

H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। Federal Register में पोस्ट किए गए नोटिस के मुताबिक प्रस्तावित शुल्क मौजूदा लागत की तुलना में बेहद बड़ा इजाफा है। इसका असर खास तौर पर उन अमेरिकी कंपनियों और विदेशी कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है जो H-1B कार्यक्रम के जरिए अमेरिका में रोजगार प्राप्त करते हैं। भारत से बड़ी संख्या में आईटी और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल H-1B व्यवस्था का उपयोग करते हैं, इसलिए इस प्रस्ताव को भारतीय आवेदकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिकी प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम की लागत को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखा है। DHS के प्रस्ताव के अनुसार कुछ नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर का शुल्क लगाया जा सकता है। Reuters के अनुसार यह प्रस्ताव 24 अगस्त 2026 को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के जरिए सामने आया। प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

इस प्रस्ताव के बाद H-1B वीजा कार्यक्रम में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली अमेरिकी कंपनियों की लागत में भारी वृद्धि हो सकती है। खासकर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और अन्य विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर कंपनियों के लिए यह बड़ा वित्तीय फैसला साबित हो सकता है।

क्या है H-1B वीजा?

H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वर्क वीजा कार्यक्रम है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी क्षेत्र में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। कार्यक्रम में सामान्य तौर पर 65,000 वीजा और अमेरिकी संस्थानों से एडवांस्ड डिग्री वाले उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा का वार्षिक आवंटन होता है।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ेगा असर?

H-1B कार्यक्रम में भारतीय पेशेवरों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही है। अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, डेटा विशेषज्ञों और अन्य उच्च-कौशल वाले कर्मचारियों की मांग लंबे समय से बनी हुई है।

यदि 1,03,265 डॉलर का प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो अमेरिकी नियोक्ताओं के लिए विदेशी कर्मचारी को H-1B के माध्यम से नियुक्त करना काफी महंगा हो सकता है। इसका असर कंपनियों की भर्ती रणनीति, कर्मचारियों के स्थानांतरण और अमेरिका में नई नियुक्तियों के फैसलों पर पड़ सकता है।

कंपनियों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

इतनी बड़ी फीस का सबसे सीधा असर H-1B कर्मचारियों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है। बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को वहन करने में सक्षम हो सकती हैं, लेकिन छोटी कंपनियों और स्टार्टअप के लिए यह अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विशेषज्ञों और कारोबारी समूहों की चिंता यह है कि अत्यधिक शुल्क से अमेरिकी कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों की भर्ती कम कर सकती हैं या दूसरे देशों में प्रतिभाओं की तलाश बढ़ा सकती हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन

H-1B व्यवस्था को लेकर घरेलू श्रमिकों और अमेरिकी रोजगार बाजार की सुरक्षा पर जोर देता रहा है।

प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं, 30 दिन तक मांगी जाएगी राय

महत्वपूर्ण बात यह है कि 1,03,265 डॉलर की राशि अभी प्रस्तावित शुल्क है,

अंतिम लागू शुल्क नहीं। प्रस्ताव के बाद सार्वजनिक टिप्पणी की

प्रक्रिया शुरू होगी और इसके बाद प्रशासन नियम को अंतिम रूप दे सकता है।

Reuters के मुताबिक प्रस्तावित नियम पर 30 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी प्रक्रिया शुरू होगी।

इसलिए H-1B उम्मीदवारों और कंपनियों को फिलहाल इसे अंतिम लागू शुल्क के रूप में नहीं देखना चाहिए।

अंतिम नियम, उसकी प्रभावी तारीख और किन परिस्थितियों में शुल्क लागू होगा—

इन सभी बिंदुओं पर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

पहले भी H-1B शुल्क को लेकर विवाद रहा है

H-1B कार्यक्रम पर 2025 में भी बड़े शुल्क को लेकर विवाद सामने आया था।

Reuters के अनुसार प्रशासन ने पहले 1 लाख डॉलर का शुल्क लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन

इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी गई और बाद में एक संघीय न्यायाधीश ने

इसे अवैध करार देते हुए रोक दिया। अब DHS प्रस्तावित नियम के जरिए

इस तरह के शुल्क को औपचारिक नियामकीय ढांचे में लाने की कोशिश कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां और नियामकीय समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

इसके बाद DHS अंतिम नियम जारी कर सकता है या

प्रस्ताव में बदलाव कर सकता है। यदि शुल्क इसी स्तर पर लागू होता है, तो

H-1B वीजा प्रोग्राम की लागत संरचना में यह ऐतिहासिक स्तर का बदलाव होगा और अमेरिकी कंपनियों की

विदेशी कुशल कर्मचारियों की भर्ती पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष

अमेरिका द्वारा H-1B वीजा शुल्क को 1,03,265 डॉलर तक बढ़ाने का प्रस्ताव भारतीय

IT और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए बेहद अहम खबर है। हालांकि

यह अभी प्रस्तावित नियम है, लेकिन यदि इसे अंतिम रूप दिया जाता है तो

अमेरिकी कंपनियों के लिए H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करना काफी महंगा हो सकता है। आने वाले दिनों में

सार्वजनिक टिप्पणियों, कानूनी चुनौतियों और DHS के अंतिम फैसले पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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