राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। नगर पंचायत गोला के वार्ड नंबर 18 में स्थित प्राचीन शंकर साव पोखरे की पश्चिमी दीवार का एक बार फिर निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह दीवार पहले भी तीन बार बन चुकी है, लेकिन हर बार बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होकर टूट जाती है। अब चौथी बार निर्माण शुरू होने के बाद दीवार की गुणवत्ता और निर्माण में मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सांसद निधि और नगर पंचायत निधि से पहले हो चुका है निर्माण
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शंकर साव पोखरे की पश्चिमी दीवार का निर्माण इससे पहले एक बार सांसद निधि और दो बार नगर पंचायत निधि से कराया जा चुका है। इसके बावजूद दीवार के बार-बार टूटने की समस्या समाप्त नहीं हुई। अब नगर पंचायत की ओर से उसी स्थान पर दोबारा दीवार बनाई जा रही है।
वार्डवासियों का कहना है कि यदि पहले हुए निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो दीवार को बार-बार बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। नागरिकों ने वर्तमान निर्माण में इस्तेमाल हो रही ईंट और चुनाई की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं।
हर बारिश में टूटने से सड़क भी होती है क्षतिग्रस्त
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बारिश के दौरान पानी के दबाव के कारण दीवार टूट जाती है। दीवार टूटने के साथ उससे सटी सीसी सड़क का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त होकर पोखरे की तरफ चला जाता है। इससे वार्ड में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है।
यह सड़क दक्षिण दिशा में स्थित हनुमान मंदिर तक जाती है और वार्ड के लोगों के आवागमन का भी प्रमुख रास्ता है। सड़क क्षतिग्रस्त होने पर मंदिर और वार्ड की ओर जाने वाला रास्ता प्रभावित हो जाता है।
पानी के दबाव को देखते हुए मजबूत निर्माण की मांग
पोखरे के उत्तर और पश्चिम दिशा से आने वाला पानी सीसी सड़क के रास्ते पोखरे में पहुंचता है। ऐसे में सड़क और पोखरे के बीच बनी सुरक्षा दीवार पर बारिश के दौरान पानी का दबाव पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मजबूत और टिकाऊ संरचना तैयार की जानी चाहिए।
नागरिकों ने मांग की है कि दीवार की नींव, ईंट, चुनाई और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल दीवार खड़ी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे पानी के दबाव और बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए मजबूत बनाया जाना जरूरी है।
प्राचीन पोखरे के संरक्षण पर भी उठ रहे सवाल
शंकर साव का पोखरा गोला नगर क्षेत्र का प्राचीन और प्रसिद्ध पोखरा बताया जाता है। पोखरे के चारों तरफ पक्की दीवार बनी है और उत्तर दिशा में सीढ़ियां भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उचित देखरेख के अभाव में पोखरे का पानी काफी गंदा हो गया है।
नागरिकों के मुताबिक, पोखरे की सीढ़ियों और आसपास के स्थानों पर कुछ लोग गोबर के
कंडे भी पाथते हैं। इससे पोखरे की स्वच्छता प्रभावित हो रही है। लोगों ने पोखरे की
नियमित सफाई और संरक्षण की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की है।
चौथी बार निर्माण से खर्च पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब
एक ही दीवार का निर्माण पहले तीन बार कराया जा चुका है तो
वह बार-बार क्यों टूट रही है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्यों में
गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि एक ही कार्य पर बार-बार सरकारी धन खर्च न हो।
नाम न छापने की शर्त पर आसपास के नागरिकों ने आरोप लगाया कि वर्तमान निर्माण में भी
मानकों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि
यदि इस बार भी निर्माण मजबूत तरीके से नहीं कराया गया तो
अगले बारिश के मौसम में दीवार के फिर क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहेगी।
गुणवत्ता के सवाल पर सभासद ने साधी चुप्पी
दीवार निर्माण की गुणवत्ता को लेकर वार्ड सभासद श्रवण कुमार से सवाल किया गया,
लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
अब स्थानीय लोगों की नजर नगर पंचायत और संबंधित अधिकारियों पर है।
वार्डवासियों ने मांग की है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले संबंधित अधिकारी
मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच करें।
लोगों का कहना है कि दीवार का ऐसा निर्माण कराया जाना चाहिए जो
लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बारिश के दौरान सड़क को क्षतिग्रस्त होने से बचा सके।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल दीवार टूटने और फिर उसके निर्माण पर खर्च करने के बजाय समस्या का
स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। यदि तकनीकी रूप से मजबूत दीवार का निर्माण कराया जाए और
पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो तो भविष्य में सड़क और
आवागमन को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
फिलहाल चौथी बार बन रही शंकर साव पोखरे की पश्चिमी दीवार निर्माण की
गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। अब देखना होगा कि संबंधित
अधिकारी स्थानीय नागरिकों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और
निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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