UGC-NET 2026: टाइपो से लेकर रिपीट प्रश्नों तक, परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल
नई दिल्ली। UGC-NET जून 2026 परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। देशभर में Assistant Professor, Junior Research Fellowship (JRF) और PhD में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर उम्मीदवारों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। खास तौर पर Sociology, English और Psychology विषयों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
‘Ritzer’ की जगह ‘Putzer’, ‘Parsons’ की जगह ‘Parsow’
30 जून 2026 को आयोजित UGC-NET Sociology पेपर को लेकर उम्मीदवारों ने कई कथित गलतियों की शिकायत की। अभ्यर्थियों के अनुसार प्रसिद्ध समाजशास्त्री George Ritzer का नाम कथित तौर पर “Putzer” और Talcott Parsons का नाम “Parsow” लिखा गया।
इसी तरह Ghurye को “Ghunye”, A R Desai को “A K Desai” और Martha Nussbaum को “Nusbaut” लिखे जाने की शिकायत भी सामने आई। उम्मीदवारों ने कुछ सामान्य अकादमिक शब्दों के गलत इस्तेमाल और भाषा संबंधी त्रुटियों का भी आरोप लगाया।
भाषा और हिंदी अनुवाद पर भी उठे सवाल
उम्मीदवारों का कहना है कि समस्या केवल नामों की गलत स्पेलिंग तक सीमित नहीं थी। Sociology पेपर में व्याकरण संबंधी गलतियों, अस्पष्ट वाक्यों और हिंदी अनुवाद की गुणवत्ता को लेकर भी आपत्तियां जताई गईं।
अभ्यर्थियों के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षा में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि प्रश्न की भाषा अस्पष्ट हो या अनुवाद में गलती हो तो उसे समझने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
English पेपर में 67 प्रश्न दोहराए जाने का दावा
UGC-NET जून 2026 विवाद का दूसरा बड़ा पहलू English पेपर से जुड़ा है। उम्मीदवारों की ओर से दावा किया गया कि 150 में से 67 प्रश्न पहले आयोजित परीक्षाओं के प्रश्नों से हूबहू या काफी हद तक समान थे।
कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि ये प्रश्न Paper-II में शामिल थे और कई मामलों में विकल्पों का क्रम भी समान था। हालांकि, यह आंकड़ा उम्मीदवारों की ओर से किया गया दावा है और इसे NTA की आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
पुराने प्रश्नपत्रों से समानता का आरोप
उम्मीदवारों और कुछ शिक्षकों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि मौजूदा प्रश्नपत्र में December 2024 और 2025 के प्रश्नपत्रों से कई प्रश्न दोबारा दिखाई दिए।
पुराने प्रश्नों का अभ्यास प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का सामान्य हिस्सा है, लेकिन यदि बड़ी संख्या में प्रश्न बिना पर्याप्त बदलाव के दोहराए जाएं तो इससे परीक्षा की निष्पक्षता और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।
Psychology पेपर पर भी शिकायतें
UGC-NET विवाद Sociology और English तक सीमित नहीं रहा। Psychology विषय के प्रश्नपत्र को लेकर भी कुछ उम्मीदवारों ने प्रश्नों की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम से संबंधितता और प्रश्न निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
तीन अलग-अलग विषयों को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद अभ्यर्थी प्रश्नपत्रों की quality control और expert review process को लेकर जवाब चाहते हैं।
क्या NTA ने तीनों पेपर रद्द कर दिए?
यह उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर Sociology, English और Psychology के तीनों पेपर रद्द किए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
उम्मीदवारों से कथित गलतियों और आपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज कराने को कहा गया है। प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद ही किसी प्रश्न के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही “तीन पेपर रद्द” जैसी खबरों को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
NTA की आपत्ति प्रक्रिया पर टिकी नजर
रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र में मौजूद कथित गलतियों और आपत्तिजनक प्रश्नों को लेकर निर्धारित
grievance redressal प्रक्रिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
यदि किसी प्रश्न में वास्तविक त्रुटि पाई जाती है तो एजेंसी
विशेषज्ञों की राय के आधार पर उचित निर्णय ले सकती है।
उम्मीदवारों के लिए आधिकारिक माध्यम से प्रमाण के साथ आपत्ति दर्ज करना महत्वपूर्ण होगा।
सवाल सिर्फ टाइपो का नहीं, परीक्षा की विश्वसनीयता का
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में एक छोटी सी गलती भी उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
किसी प्रसिद्ध विद्वान के नाम में बदलाव होने पर प्रश्न का अर्थ समझने में भ्रम पैदा हो सकता है।
इसी तरह गलत अनुवाद या अस्पष्ट भाषा उम्मीदवार को प्रश्न समझने में अतिरिक्त समय लेने के लिए
मजबूर कर सकती है। इसलिए अभ्यर्थियों की मांग है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद
बहुस्तरीय विशेषज्ञ समीक्षा और भाषा जांच की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
प्रश्नों की पुनरावृत्ति पर भी उठे सवाल
Previous Year Questions प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का अहम हिस्सा होते हैं।
इनसे उम्मीदवार परीक्षा के पैटर्न और प्रश्न पूछने की शैली समझते हैं।
लेकिन यदि बड़ी संख्या में प्रश्न बिना पर्याप्त बदलाव के दोहराए जाते हैं तो परीक्षा की
वास्तविक विश्लेषणात्मक क्षमता मापने को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
English पेपर में 67 प्रश्नों की समानता का दावा इसी कारण चर्चा में है।
हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही संभव होगी।
उम्मीदवारों की क्या मांग है?
UGC-NET उम्मीदवारों की मांग है कि कथित गलतियों और दोहराए गए प्रश्नों की
निष्पक्ष जांच की जाए। यदि किसी प्रश्न में वास्तविक त्रुटि पाई जाती है तो उसके लिए
उचित अंक निर्धारण या प्रश्न हटाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।
वहीं, यदि जांच में बड़े पैमाने पर ऐसी खामियां प्रमाणित होती हैं
जिनसे उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर असर पड़ा है, तो
परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उचित निर्णय लेने की मांग की जा रही है।
Answer Key के बाद स्थिति होगी और स्पष्ट
अब उम्मीदवारों की नजर provisional answer key, आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया और
final answer key पर है। उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि
वे केवल सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर रहने के बजाय
निर्धारित आधिकारिक माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज करें।
इससे प्रत्येक शिकायत की औपचारिक जांच का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा और
अंतिम परिणाम तैयार करने में संबंधित एजेंसी के पास आपत्तियों पर विचार करने का आधार होगा।
निष्कर्ष
UGC-NET जून 2026 से जुड़ा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में
प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, भाषा जांच और विशेषज्ञ समीक्षा को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
Sociology पेपर में “Ritzer” को “Putzer” और “Parsons” को “Parsow” लिखे जाने की शिकायतों के साथ
English पेपर में बड़ी संख्या में प्रश्न दोहराए जाने का दावा भी गंभीर चर्चा का विषय बना है।
Psychology पेपर को लेकर भी उम्मीदवारों की शिकायतें सामने आई हैं।
हालांकि इन सभी दावों को फिलहाल उम्मीदवारों की शिकायतों और
सामने आई रिपोर्टों के रूप में देखा जाना चाहिए।
अंतिम स्थिति NTA की जांच, आपत्ति प्रक्रिया और आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
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