JPSC-JSSC Protest: झारखंड में परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने रविवार को कई जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के पुतले फूंके। रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर भी प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों का अब तक संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
18 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम
JPSC-JSSC Reform Forum से जुड़े अभ्यर्थियों ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए 18 अगस्त तक का समय दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी भी दी है। इससे राजधानी रांची में प्रशासन के सामने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चुनौती बढ़ सकती है।
परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में कथित तौर पर विवादित JSSC CGL और संबंधित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना, परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराना और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।
कुछ आंदोलनकारी पूरे मामले की CBI जांच की मांग भी उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है।
तिरंगा यात्रा के बाद बढ़ा आंदोलन
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली थी। इस दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राष्ट्रीय ध्वज लेकर शामिल हुए और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई।
तिरंगा यात्रा के बाद पुतला दहन और मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा से आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के लिए है।
सरकार के आश्वासन से भी संतुष्ट नहीं अभ्यर्थी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर, उत्तर कुंजी और
OMR शीट समय पर जारी करने तथा जवाबदेही मजबूत करने जैसे उपायों की बात कही है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी इन आश्वासनों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि
जिन परीक्षाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं, उनके संबंध में
स्पष्ट निर्णय लिया जाए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा
JPSC और JSSC झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हजारों अभ्यर्थी इन परीक्षाओं के लिए लंबे समय तक तैयारी करते हैं।
ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से सीधे तौर पर उम्मीदवारों के
भविष्य और सरकारी भर्ती व्यवस्था पर उनके भरोसे का मुद्दा जुड़ जाता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता का
असर मेहनत करने वाले उम्मीदवारों पर पड़ता है। इसलिए वे परीक्षा
व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत अहम
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ बातचीत की पहल भी महत्वपूर्ण हो गई है।
आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत से
यह तय हो सकता है कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा।
यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो आंदोलन को शांत करने का रास्ता खुल सकता है।
वहीं मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में
20 अगस्त का प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव बड़ा प्रदर्शन बन सकता है।
प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
लगातार प्रदर्शन के कारण रांची में प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।
पूर्व में मार्च और प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति सामने आने के बाद
आगामी कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विशेष रूप से मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और
प्रदर्शनकारियों से संवाद दोनों पर प्रशासन की नजर रहेगी।
20 अगस्त पर टिकी नजरें
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब केवल प्रश्नपत्र या परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह झारखंड में
सरकारी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
18 अगस्त की समय सीमा और 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव अब आंदोलन की
अगली दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। अभ्यर्थियों की मांगों पर सरकार क्या निर्णय लेती है और
बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन और व्यापक होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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