राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोला थाना क्षेत्र के फत्तेपुर गांव में नाबालिग पर कथित जानलेवा हमले के मामले में अब चार्जशीट से आरोपितों के नाम हटाने को लेकर विवाद सामने आया है। घायल नाबालिग की मां ने क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय के पेशकार दिनेश सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर से शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले में नामजद दो लोगों के नाम चार्जशीट से हटाने के लिए घायल किशोर को दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुलाया जा रहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
नाबालिग पर हमले का आरोप
फत्तेपुर गांव निवासी पानमती पत्नी धर्मेंद्र ने एसएसपी को दी शिकायत में बताया कि बीते 13 जून को गांव के चौराहे पर उनके नाबालिग बेटे रितेश यादव के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी।
शिकायत के अनुसार, हमले में गुड्डी देवी, उसके बेटे आर्यन यादव और आदित्य यादव के अलावा धीरज यादव, शुभम यादव, रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव और कौशल यादव के नाम सामने आए थे।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि रितेश पर लोहे की पाइप, रॉड और लाठी-डंडों से हमला किया गया। मारपीट में उसे गंभीर चोटें आईं।
गंभीर चोट के बाद लखनऊ तक हुआ इलाज
परिवार के मुताबिक, हमले में रितेश के जबड़े में गंभीर चोट लगी थी। सिर में चोट आने के बाद उसे टांके भी लगाए गए।
घायल की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए पहले गोरखपुर और बाद में लखनऊ ले जाना पड़ा। परिवार का कहना है कि लंबे उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
घटना के संबंध में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, गंभीर चोट को देखते हुए मामले में बीएनएस की धारा 109 भी बढ़ाई गई।
दो आरोपितों की जमानत खारिज
पानमती की शिकायत के मुताबिक, इस मामले में आरोपी धीरज यादव और कौशल यादव की जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायालय गोरखपुर से 2 जुलाई को खारिज हो चुकी है।
इसके बाद विवेचना आगे बढ़ी। शिकायतकर्ता का कहना है कि विवेचक ने 31 जुलाई को घायल रितेश के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया था।
परिवार के अनुसार, इसके बाद विवेचना पूरी करके चार्जशीट क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय भेजी गई।
चार्जशीट से दो नाम हटाने का आरोप
अब इस मामले में नया विवाद चार्जशीट से शुभम यादव और रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव के नाम हटाने को लेकर सामने आया है।
पीड़ित की मां ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय के पेशकार दिनेश सिंह द्वारा घायल रितेश को दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुलाया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दोबारा बयान के जरिए चार्जशीट से दोनों नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घायल को दोबारा बयान के लिए बुलाने की वास्तविक वजह क्या थी और क्या चार्जशीट में किसी तरह का बदलाव किया जाना था।
सीओ को जानकारी नहीं देने का भी आरोप
पानमती ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें मामले की जानकारी क्षेत्राधिकारी को नहीं देने के लिए कहा जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने पेशकार की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विवेचना से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में यदि अनुचित दबाव या हस्तक्षेप हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
एसएसपी द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब जांच अधिकारी शिकायत में लगाए गए
आरोपों की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेंगे।
परिवार को धमकी देने की भी शिकायत
पीड़ित परिवार ने आरोपित पक्ष की ओर से धमकी मिलने की भी शिकायत की है।
पानमती का आरोप है कि उन्हें और उनके बेटों को समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार, समझौता नहीं करने पर परिवार को
फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दिए जाने की बात भी कही गई है।
पानमती ने अपने दोनों बेटों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए
पुलिस से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित की मां ने एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि मामले में जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हों, उनके नाम बिना
किसी दबाव के कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय भेजे जाने चाहिए।
परिवार का कहना है कि नाबालिग पर गंभीर हमला हुआ था और वह लंबे समय तक उपचार में रहा।
ऐसे में उन्हें आशंका है कि मामले को कमजोर करने का प्रयास किया जा सकता है।
अब एसएसपी के निर्देश पर होने वाली जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि
शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
पुलिस जांच में सामने आएगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पहलू हैं। पहला, 13 जून को नाबालिग रितेश के साथ हुई
कथित मारपीट और दूसरा, विवेचना पूरी होने के बाद चार्जशीट से दो नाम हटाने की शिकायत।
पुलिस की जांच में मेडिकल दस्तावेज, घायल का बयान, घटना से जुड़े साक्ष्य, विवेचना की
प्रक्रिया और चार्जशीट तैयार किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके
आधार पर विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि शिकायत में लगाए गए
आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो स्थिति उसी के अनुसार स्पष्ट होगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
एसएसपी की ओर से जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है।
रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह तय होगा कि पेशकार की भूमिका को लेकर लगाए गए
आरोपों में कितनी सच्चाई है और चार्जशीट में नामों से संबंधित प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी।
पीड़ित परिवार ने न्याय के साथ-साथ अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है।
निष्कर्ष
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र के फत्तेपुर गांव में नाबालिग रितेश यादव पर कथित जानलेवा हमले के मामले में
अब चार्जशीट से दो आरोपितों के नाम हटाने की शिकायत सामने आने से मामला गंभीर हो गया है।
पीड़ित की मां पानमती ने सीओ गोला कार्यालय के पेशकार दिनेश सिंह पर आरोप लगाया है कि
घायल किशोर को दोबारा बयान के लिए बुलाकर शुभम यादव और रामप्रवेश
उर्फ प्रवेश यादव के नाम चार्जशीट से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिकायत के साथ परिवार ने धमकी और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
एसएसपी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट के
बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए
आरोप सही हैं या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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