अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में आवारा कुत्तों के झुंड ने एक बेहद दर्दनाक घटना को अंजाम दिया। डिडौली क्षेत्र के पतेई खालसा गांव में घर के बरामदे में सो रहे करीब दो साल के बच्चे को आवारा कुत्तों का झुंड उठाकर ले गया। कुछ दूरी पर कुत्तों ने मासूम पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। बच्चे के सिर, मुंह और शरीर पर 50 से अधिक घाव बताए गए हैं। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
बरामदे में सो रहा था मासूम
जानकारी के अनुसार कल्याणपुर निवासी मनोज की पत्नी कुसुम सैनी अपने दो बच्चों के साथ तीज के अवसर पर मायके पतेई खालसा आई थीं। शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अपने दो साल के बेटे को घर के बरामदे में सुलाया। इसके बाद वह कुछ देर के लिए बाहर चली गईं।
करीब दस मिनट बाद जब वह वापस लौटीं तो बच्चा बरामदे में मौजूद नहीं था। अचानक मासूम के गायब होने से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने आसपास तलाश शुरू की और लोगों को आवाज देकर बच्चे को खोजने में मदद मांगी।
कुत्ते बच्चे को घर से करीब 100 मीटर दूर ले गए
परिजनों की तलाश के दौरान एक ग्रामीण महिला ने बताया कि कुछ आवारा कुत्ते एक बच्चे को खींचकर ले जा रहे हैं। यह सुनते ही आसपास के लोग तुरंत उस दिशा में दौड़े।
ग्रामीण जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कुत्तों का झुंड मासूम पर हमला कर रहा था। लोग शोर मचाते हुए कुत्तों को भगाने में जुट गए और किसी तरह बच्चे को उनके चंगुल से छुड़ाया।
बताया गया है कि कुत्ते बच्चे को घर से करीब 100 मीटर दूर तक ले गए थे। हमले में बच्चे के शरीर पर 50 से अधिक घाव हो गए। उसके सिर, मुंह और पेट समेत शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं।
गंभीर हालत में मेरठ रेफर
बच्चे को बचाने के बाद परिजन तत्काल उसे उपचार के लिए अमरोहा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए रेफर कर दिया।
इसके बाद बच्चे को पाकबड़ा स्थित टीएमयू ले जाया गया। वहां भी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उसे मेरठ के अस्पताल के लिए रेफर किया। फिलहाल मासूम का उपचार चल रहा है और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
तीज की खुशियां मातम में बदलीं
परिवार के लिए यह घटना उस समय हुई जब घर में तीज महोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। बच्चे के नाना भूकनसरन सैनी के मुताबिक, उनकी बेटी अपने दो बच्चों के साथ कुछ दिन पहले मायके आई थीं। परिवार त्योहार को लेकर खुशियां मनाने की तैयारी में था, लेकिन अचानक हुए इस हमले ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
मासूम के साथ हुई घटना की जानकारी फैलते ही गांव में भी चिंता और दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
आवारा कुत्तों के बढ़ते झुंड से ग्रामीण परेशान
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या को सामने ला दिया है। जब कुत्ते झुंड में घूमते हैं तो छोटे बच्चों और अकेले लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है। रात के समय यह जोखिम और ज्यादा गंभीर हो जाता है।
ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि घटना किसी सुनसान खेत या सड़क पर नहीं,
बल्कि घर के आसपास हुई। मासूम घर के बरामदे में सो रहा था और
कुछ ही देर में कुत्तों का झुंड उसे उठाकर बाहर ले गया।
यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि आसपास के क्षेत्र में पहले से आवारा कुत्तों के
झुंड मौजूद थे तो उनकी रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
घटना के बाद गांव में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
ग्रामीण इलाकों में गर्मी और उमस के दौरान कई परिवार घर के बाहर, बरामदे या खुले स्थान पर सोते हैं।
ऐसे में आसपास आवारा कुत्तों के झुंड होने पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि छोटे बच्चों को रात में खुले या
असुरक्षित स्थानों पर अकेला न छोड़ा जाए।
यदि किसी इलाके में आक्रामक आवारा कुत्तों का झुंड दिखाई देता है तो
इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन या संबंधित नगर निकाय को दी जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने आवारा कुत्तों पर कार्रवाई की चुनौती
अमरोहा की इस घटना ने स्थानीय प्रशासन के सामने
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की चुनौती को भी
उजागर किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड कई बार लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं,
लेकिन प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थानीय निकाय और प्रशासन के स्तर पर लगातार कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
सिर्फ किसी घटना के बाद कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई करने के बजाय उन इलाकों की पहचान जरूरी है
जहां बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते मौजूद हैं और लोगों पर हमले की आशंका बनी रहती है।
घटना के बाद गांव में दहशत
मासूम पर हमले की खबर सामने आने के बाद पतेई खालसा
गांव के लोगों में डर का माहौल है। खासकर छोटे
बच्चों वाले परिवार इस घटना से चिंतित हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि
भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी चिंता घायल बच्चे की हालत को लेकर है।
बच्चे का मेरठ में उपचार चल रहा है और परिजन उसके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे हैं।
निष्कर्ष
अमरोहा के पतेई खालसा गांव में दो साल के मासूम पर आवारा कुत्तों के
झुंड का हमला बेहद गंभीर घटना है। घर के बरामदे में सो रहे बच्चे को
कुत्ते उठाकर करीब 100 मीटर दूर ले गए और वहां उस पर हमला कर दिया।
ग्रामीणों ने समय रहते बच्चे को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया,
लेकिन तब तक उसके शरीर पर 50 से अधिक घाव हो चुके थे।
गंभीर हालत में बच्चे को अमरोहा से पाकबड़ा और फिर मेरठ रेफर किया गया है।
घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और छोटे बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन
इस समस्या को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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