पांच दिन पहले दर्ज कराई थी करोड़ों की ठगी की एफआईआर, पुलिस ने आरोपी महिला और उसके पिता को भेजा जेल; अब मौत और ठगी के मामले के बीच संबंध की जांच
गोरखपुर। गोरखनाथ क्षेत्र के राजेंद्र नगर स्थित बसंत इंक्लेव में गुरुवार सुबह एक पशु चिकित्सक की मौत से सनसनी फैल गई। डॉ. परमात्मा सिंह अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से नीचे गिर गए। परिजन उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि डॉक्टर ने कुछ दिन पहले ही 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक पीएचडी महिला, उसके पिता, पति और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। महिला और उसके पिता को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब पुलिस डॉक्टर की मौत की जांच करते समय ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी ध्यान में रख रही है।
बसंत इंक्लेव की आठवीं मंजिल से गिरे डॉक्टर
घटना गोरखनाथ थाना क्षेत्र की राजेंद्र नगर कॉलोनी स्थित बसंत इंक्लेव अपार्टमेंट की है। पुलिस के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 9:40 बजे पीआरवी-112 को सूचना मिली कि अपार्टमेंट से एक व्यक्ति नीचे गिर गया है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो घायल व्यक्ति की पहचान पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह के रूप में हुई।
परिजन उन्हें खून से लथपथ हालत में तत्काल निजी अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
मृतक डॉक्टर की पहचान
डॉ. परमात्मा सिंह बसंत इंक्लेव के ब्लॉक बी स्थित फ्लैट में परिवार के साथ रहते थे। उनकी पत्नी सावित्री सिंह भी पशु चिकित्सक हैं। परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं।
परमात्मा सिंह वर्तमान में महराजगंज जिले के एक ब्लॉक में पशु चिकित्सक के पद पर तैनात थे। पुलिस रिकॉर्ड में उनकी उम्र 45 वर्ष दर्ज है, जबकि परिवार की ओर से उनकी उम्र 52 वर्ष बताई गई है। वह मूल रूप से मऊ जिले के मोहम्मदाबाद क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।
घटना के बाद उनकी पत्नी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पांच अगस्त को दर्ज कराई थी 1.40 करोड़ की एफआईआर
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी डॉक्टर की ओर से कुछ दिन पहले दर्ज कराई गई एफआईआर है। पुलिस के मुताबिक, 5 अगस्त को डॉ. परमात्मा सिंह ने एम्स थाने में 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
एफआईआर में एक पीएचडी महिला, उसके अधिकारी पिता, शिक्षक पति और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में महिला आरोपी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यही वजह है कि डॉक्टर की अचानक हुई मौत के बाद पुलिस अब इस ठगी के मामले से जुड़े घटनाक्रम की भी जांच कर रही है।
ठगी के मामले और मौत के बीच क्या संबंध?
पुलिस अभी इस सवाल का अंतिम जवाब नहीं दे रही है कि डॉक्टर की मौत का 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी से सीधा संबंध था या नहीं।
सीओ गोरखनाथ रवि सिंह के अनुसार, मौत की जांच के दौरान ठगी से जुड़े मुकदमे के घटनाक्रम को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इसका अर्थ है कि पुलिस डॉक्टर की मौत से पहले की परिस्थितियों, मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होगा।
सुसाइड नोट मिलने की भी जानकारी
कुछ रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार नोट में ठगी के मामले की आरोपी महिला का नाम होने की बात कही गई है। हालांकि, इस तरह के दस्तावेज की वास्तविकता, उसकी सामग्री और उसका कानूनी महत्व जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ऐसे मामलों में पुलिस आम तौर पर लिखावट, दस्तावेज की प्रमाणिकता और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच करती है। इसलिए किसी नोट में लिखे नाम को अपने आप अपराध साबित करने वाला अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
ठगी के मामले में पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी से जुड़े मामले में पुलिस पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इससे यह स्पष्ट है कि डॉक्टर की मौत से पहले ही करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी को लेकर आपराधिक जांच चल रही थी।
अब डॉक्टर की मौत के बाद इस मुकदमे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच का महत्व और बढ़ गया है।
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
गोरखनाथ पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की। पुलिस परिवार के सदस्यों और आसपास मौजूद लोगों से जानकारी जुटा रही है। अपार्टमेंट से गिरने की परिस्थितियों को समझने के लिए घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
मौत के कारण और परिस्थितियों को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा यदि घटनास्थल या आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा लगा है तो उसकी रिकॉर्डिंग भी जांच में उपयोगी हो सकती है।
पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि घटना से पहले डॉक्टर की गतिविधियां क्या थीं और उनके साथ आखिरी समय में कौन-कौन लोग संपर्क में थे।
परिवार के लिए बड़ा सदमा
डॉ. परमात्मा सिंह की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार के लिए यह स्थिति
इसलिए भी बेहद कठिन है क्योंकि एक तरफ डॉक्टर की अचानक मौत हुई और दूसरी तरफ कुछ दिन
पहले दर्ज कराई गई करोड़ों रुपये की ठगी की शिकायत की जांच पहले से चल रही थी।
उनकी पत्नी भी पशु चिकित्सक हैं और दोनों ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं।
ऐसे में परिवार के लिए इस घटना का भावनात्मक और सामाजिक असर बेहद गंभीर है।
अब परिवार को पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से घटना की वास्तविक परिस्थितियों के सामने आने की उम्मीद होगी।
जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
डॉक्टर की मौत के बाद पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। इनमें सबसे अहम है कि
वह अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से किन परिस्थितियों में नीचे गिरे।
इसके साथ ही जांच में यह भी देखा जा सकता है कि:
- घटना से पहले डॉक्टर की मानसिक और परिस्थितिजन्य स्थिति कैसी थी?
- 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में हाल की कार्रवाई का उन पर क्या प्रभाव पड़ा?
- घटना के समय अपार्टमेंट में कौन-कौन मौजूद था?
- क्या कोई प्रत्यक्षदर्शी है?
- क्या सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है?
- क्या घटनास्थल से कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिला?
- सुसाइड नोट की प्रमाणिकता क्या है?
- क्या ठगी के मामले और मौत के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होता है?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
करोड़ों की ठगी का मामला भी जांच के केंद्र में
डॉ. परमात्मा सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर अपने आप में गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है।
1.40 करोड़ रुपये की रकम को लेकर पुलिस को यह भी जांचना होगा कि कथित ठगी
किस तरीके से की गई और रकम का लेनदेन कैसे हुआ।
बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल लेनदेन, दस्तावेज और आरोपियों के बीच संपर्क जैसे साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि जांच में और लोग शामिल पाए जाते हैं तो पुलिस उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।
वहीं आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार है।
मौत को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष से बचना जरूरी
डॉक्टर की मौत और ठगी के मुकदमे के बीच समय का अंतर बेहद कम है।
इसी कारण दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन जांच पूरी होने से पहले
किसी एक कारण को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
पुलिस स्वयं भी ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को जांच में शामिल करने की बात कह रही है।
इससे संकेत मिलता है कि जांचकर्ता सभी संभावित पहलुओं को देख रहे हैं।
अंतिम स्थिति पोस्टमार्टम, घटनास्थल की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जांच परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा घटनास्थल और आसपास के
साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। परिवार और संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।
साथ ही 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी वाले मुकदमे की जांच भी
आगे जारी रहेगी। दोनों मामलों के बीच यदि
कोई तथ्यात्मक संबंध सामने आता है तो उसे जांच रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस ने मौत की परिस्थितियों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
निष्कर्ष
गोरखपुर के गोरखनाथ क्षेत्र में पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह की अपार्टमेंट की
आठवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना से कुछ दिन पहले ही उन्होंने
1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस इस मामले में
एक महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
अब डॉक्टर की मौत की जांच में ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी शामिल किया जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों में सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने आई है,
लेकिन उसकी प्रमाणिकता और उसमें लिखी बातों का कानूनी महत्व जांच के बाद ही तय होगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करे और
पोस्टमार्टम तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने लाए।
1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी और डॉक्टर की
मौत के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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