गोरखपुर में बच्ची अपहरण-हत्या मामले में बर्खास्त सिपाही अभिषेक पर आरोप तय, अब शुरू होगी गवाही

10 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत का बड़ा कदम; पुलिस ने दाखिल की 187 पन्नों की चार्जशीट

गोरखपुर। जिला अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के बेहद गंभीर मामले में अदालत ने बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम विजय बहादुर यादव की अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र के आधार पर यह कार्रवाई की। अब इस मामले में मुकदमे की नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है और अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।

पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद 5 अगस्त को 187 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इसमें घटनास्थल और उसके आसपास से मिले सीसीटीवी फुटेज, पीड़िता की बहन के बयान, प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों को शामिल किया गया है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपी पुलिस विभाग में तैनात था और घटना के बाद उसे सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। अब अदालत में आरोप तय होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर गई है।

अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की राह खोली

बुधवार को विशेष पॉक्सो अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए आरोपी सिपाही अभिषेक यादव के खिलाफ आरोप तय किए। आरोप तय होना किसी आरोपी को दोषी ठहराना नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ है कि अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर मुकदमा चलाने के लिए आरोपों को औपचारिक रूप से तय किया है।

अब इस मामले में अभियोजन पक्ष अपने गवाह अदालत के सामने पेश करेगा। गवाहों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच से जुड़ी रिपोर्टें आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मृत बच्ची के पिता को भी अदालत ने गवाही के लिए तलब किया है। अगली सुनवाई में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ने की उम्मीद है।

187 पन्नों की चार्जशीट में कई अहम साक्ष्य

पुलिस की जांच के बाद अदालत में दाखिल 187 पन्नों के आरोपपत्र में कई प्रकार के साक्ष्य शामिल किए गए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, पीड़िता की बहन का बयान, प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा इलेक्ट्रॉनिक सामग्री प्रमुख हैं।

जांच में घटनास्थल और आसपास के इलाकों में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज को भी साक्ष्य के तौर पर संकलित किया गया। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आज के आपराधिक मामलों में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुलिस ने इन्हीं अलग-अलग साक्ष्यों को एकत्र करने के बाद आरोपपत्र तैयार किया और अदालत में प्रस्तुत किया।

वैज्ञानिक जांच की कुछ रिपोर्ट अभी बाकी

मामले की जांच अभी पूरी तरह वैज्ञानिक स्तर पर समाप्त नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी FSL से DNA और जैविक नमूनों से संबंधित कुछ वैज्ञानिक परीक्षणों की रिपोर्ट अभी प्राप्त होना बाकी है।

इन रिपोर्टों के मिलने के बाद उन्हें अदालत में पूरक चार्जशीट के जरिए पेश किया जाएगा। इसका मतलब है कि जांच से जुड़े कुछ वैज्ञानिक निष्कर्ष बाद में न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकते हैं।

DNA और अन्य फॉरेंसिक रिपोर्ट ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं, क्योंकि वे उपलब्ध परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ घटनाक्रम की वैज्ञानिक पुष्टि में मदद कर सकती हैं।

अब गवाहों के बयान होंगे दर्ज

आरोप तय होने के बाद मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अब अभियोजन पक्ष अपने गवाहों को अदालत के सामने पेश करेगा।

गवाहों के बयान और उनके आधार पर होने वाली जिरह मुकदमे के अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले का फैसला करेगी।

मृत बच्ची के पिता को गवाही के लिए बुलाया जाना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। आगे अन्य गवाहों और जांच से जुड़े अधिकारियों के बयान भी अदालत में दर्ज हो सकते हैं।

बच्ची के अपहरण से हत्या तक का मामला

यह मामला गोरखपुर में तब सामने आया था जब जिला अस्पताल से बच्ची के लापता होने के बाद उसकी तलाश शुरू हुई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने मामले में डायल-112 से जुड़े सिपाही अभिषेक यादव को आरोपी बनाया।

पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया और विभागीय स्तर पर भी उसके खिलाफ कार्रवाई हुई। बाद में उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उपलब्ध न्यायिक जानकारी के अनुसार अब मामले में आरोप तय हो चुके हैं।

इस मामले ने पुलिस विभाग की जवाबदेही और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। हालांकि अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक फैसले से ही होगी।

आरोपी पुलिसकर्मी होने से मामला और संवेदनशील

किसी पुलिसकर्मी पर इस तरह के गंभीर अपराध का आरोप लगना पूरे पुलिस तंत्र के लिए बेहद संवेदनशील विषय है। पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप लगने पर विभागीय कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया भी विशेष महत्व रखती है।

इस मामले में आरोपी को बर्खास्त किए जाने के बाद अब अदालत में आरोप तय हो चुके हैं। आगे न्यायालय यह तय करेगा कि अभियोजन की ओर से

प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को किस स्तर तक साबित करते हैं।

सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की भूमिका महत्वपूर्ण

इस मामले की चार्जशीट में सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है।

आधुनिक जांच में ऐसे साक्ष्य घटनाओं की समय-रेखा तैयार करने में मदद करते हैं।

घटनास्थल और आसपास के कैमरों से मिले फुटेज से किसी व्यक्ति की गतिविधियों, वाहन की

आवाजाही या घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी मिल सकती है। इसी तरह मोबाइल या

अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जांच की दिशा स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि अदालत में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता और उसकी प्रमाणिकता कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्धारित होती है।

परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी जांच का हिस्सा

पुलिस ने चार्जशीट में प्रत्यक्ष साक्ष्यों के साथ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया है।

ऐसे मामलों में किसी घटना को समझने के लिए घटनाक्रम की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ा जाता है।

किसी व्यक्ति की मौजूदगी, समय, स्थान, सीसीटीवी फुटेज, बयान और

अन्य परिस्थितियों को एक साथ देखकर जांच एजेंसी घटना की तस्वीर तैयार करती है।

अदालत में इन सभी साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से जांच और मूल्यांकन होगा।

बचाव पक्ष को भी इन साक्ष्यों पर सवाल उठाने और अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार रहेगा।

अगली सुनवाई 18 अगस्त को

आरोप तय होने के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

आगे की कार्यवाही में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह पेश किए जाने और

उनके बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

मुकदमे की गति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि गवाहों की पेशी, दस्तावेजों की प्रक्रिया और

लंबित फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत के सामने कब तक आती हैं।

FSL की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस उसे पूरक चार्जशीट के जरिए अदालत में प्रस्तुत करेगी।

इसके बाद अदालत उस सामग्री को भी मुकदमे के रिकॉर्ड में शामिल कर सकती है।

परिवार को न्याय का इंतजार

इस मामले में सबसे बड़ा दर्द मृत बच्ची के परिवार का है। बच्ची की मौत के बाद

परिवार लंबे समय से न्याय की प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है।

अब आरोप तय होने से मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने की स्थिति बनी है।

किसी भी आपराधिक मामले में पीड़ित परिवार के लिए न्यायिक प्रक्रिया लंबी और

भावनात्मक रूप से कठिन हो सकती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और समयबद्ध न्याय की उम्मीद स्वाभाविक है।

अदालत में अब मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाहों के बयान सामने आएंगे।

इन्हीं के आधार पर न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचा जाएगा।

पुलिस जांच के बाद अब अदालत की बारी

मामले की विवेचना पूरी करके पुलिस ने अपना आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया है।

जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है।

अब मामला मुख्य रूप से न्यायिक परीक्षण के चरण में है।

आगे अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

गवाहों के बयान और साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।

यह भी महत्वपूर्ण है कि FSL की कुछ रिपोर्ट अभी लंबित हैं।

इसलिए मुकदमे में आने वाले समय में वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुड़ सकते हैं।

निष्कर्ष

गोरखपुर में 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में

बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव के खिलाफ

अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। पुलिस ने 5 अगस्त को 187 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी,

जिसमें सीसीटीवी फुटेज, पीड़िता की बहन के बयान,

प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री शामिल की गई है।

अब मुकदमे की नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मृतका के पिता को गवाही के लिए बुलाया गया है

और अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। वहीं DNA और जैविक नमूनों से जुड़ी कुछ

FSL रिपोर्ट अभी बाकी हैं, जिन्हें बाद में पूरक चार्जशीट के जरिए अदालत में पेश किया जाएगा।

आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों,

गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।

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