संसद में बंदर का खिलौना लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, पवन खेड़ा के नारे से गरमाया माहौल; BJP ने भी किया विरोध

मानसून सत्र के आखिरी दिन मकर द्वार पर आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष, सदन की कार्यवाही पर भी पड़ा असर

नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन राजनीतिक माहौल उस समय बेहद गरमा गया, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद सदन के भीतर चर्चा करने के बजाय संसद परिसर के मकर द्वार पर आमने-सामने प्रदर्शन करते नजर आए। विपक्षी सांसदों की ओर से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के नेतृत्व में एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें बंदर का खिलौना लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। दूसरी ओर भाजपा सांसदों ने भी विपक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

दोनों पक्षों के इस आमने-सामने के प्रदर्शन ने संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन की तस्वीर बदल दी। जिस दिन सदन में महत्वपूर्ण विधायी कामकाज और चर्चा की उम्मीद थी, उस दिन संसद परिसर में राजनीतिक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन प्रमुख खबर बन गया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार उनके मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

बंदर का खिलौना लेकर क्यों पहुंचे पवन खेड़ा?

विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान एक बंदर का खिलौना हाथ में लेकर नारे लगाए। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए ’56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर’ जैसे नारे लगाए।

यह नारा प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी भाषणों में चर्चित रहे ’56 इंच’ वाले संदर्भ पर राजनीतिक तंज के रूप में इस्तेमाल किया गया। विपक्ष ने खिलौने के जरिए सरकार और प्रधानमंत्री पर संसद से दूरी बनाने का आरोप लगाने की कोशिश की।

इस प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आए। संसद परिसर में राजनीतिक विरोध का यह तरीका इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि सामान्य पोस्टर या बैनर के बजाय खिलौने को प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया गया।

BJP ने भी राहुल गांधी के खिलाफ किया प्रदर्शन

विपक्ष के प्रदर्शन से पहले भाजपा सांसद भी संसद परिसर में प्रदर्शन करते नजर आए। भाजपा की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा गया। सत्ता पक्ष का आरोप था कि कांग्रेस और विपक्षी दल झारखंड में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं, जबकि संसद में दूसरे मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा किया जा रहा है।

इस तरह संसद के आखिरी दिन विरोध का जवाब विरोध से दिया गया। एक तरफ भाजपा सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाते रहे तो दूसरी ओर विपक्षी सांसद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे।

मकर द्वार पर दोनों पक्षों की मौजूदगी ने संसद परिसर में तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल पैदा कर दिया।

विपक्ष ने सरकार पर संसद नहीं चलाने का आरोप लगाया

विपक्षी सांसदों का कहना था कि संसद चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने सरकार पर विपक्ष की मांगों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष गृह मंत्री का लंबा भाषण सुनने के बजाय उन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब चाहता था जिन्हें लेकर वह लगातार सवाल उठा रहा था। उनके मुताबिक सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेकर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ानी चाहिए थी।

विपक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि अगर सरकार के पास चर्चा के लिए तैयार होने की स्थिति थी तो इसे सत्र के अंतिम चरण में क्यों सामने लाया गया।

गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी विपक्ष का हमला

कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने संसद की कार्यवाही में लंबे समय से चल रहे गतिरोध को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह ने सत्र के आखिरी दिन चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही, लेकिन विपक्ष का दावा था कि यह पहल पहले क्यों नहीं की गई।

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने भी सरकार की ओर से चर्चा का प्रस्ताव सत्र के अंतिम समय में आने पर सवाल उठाया। विपक्ष का तर्क था कि यदि सरकार समय रहते बातचीत करती तो संसद की कार्यवाही को इस स्तर तक बाधित होने से बचाया जा सकता था।

हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया। भाजपा नेताओं ने उल्टा विपक्ष पर संसद को लगातार बाधित करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।

संसद में आमने-सामने की राजनीति

संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला था। अंतिम दिन यह टकराव संसद भवन के बाहर तक दिखाई दिया।

मकर द्वार पर दोनों पक्षों के प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि राजनीतिक गतिरोध कितना गहरा हो चुका है। संसद के भीतर चर्चा और बहस के बजाय बाहर नारेबाजी होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

सत्तापक्ष का कहना रहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित करता है,

जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार जरूरी मुद्दों पर चर्चा से बचती है। दोनों पक्ष

अपने-अपने तर्कों के साथ राजनीतिक रूप से एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे।

प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन को बताया असामान्य

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसद

परिसर में हुए इस तरह के आमने-सामने के प्रदर्शन को असामान्य बताया।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार इस तरह की स्थिति देखी है।

उनकी टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संसद परिसर में दोनों पक्षों का एक-

दूसरे के खिलाफ इस तरह प्रदर्शन करना कांग्रेस के भीतर भी असामान्य घटनाक्रम माना गया।

संसद का परिसर आम तौर पर राजनीतिक विरोध का स्थान जरूर रहा है,

लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष का एक ही समय में एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाना और

आमने-सामने प्रदर्शन करना इस सत्र के अंतिम दिन की खास तस्वीर बन गया।

मानसून सत्र पर लगा गतिरोध का असर

संसद का यह मानसून सत्र लगातार विरोध और हंगामे के कारण प्रभावित रहा।

अंतिम दिन भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। दोनों पक्षों के प्रदर्शन के बाद

सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में मुश्किलें बनी रहीं।

कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया तो भाजपा नेताओं ने

विपक्ष पर संसद को काम न करने देने का आरोप लगाया। इस राजनीतिक आरोप-

प्रत्यारोप के बीच आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा को लेकर भी सवाल उठते रहे।

लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और उसकी नीतियों की आलोचना करना है,

जबकि सरकार की जिम्मेदारी संसद में जवाब देना और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाना है।

ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद और चर्चा का महत्व और बढ़ जाता है।

नारेबाजी से ज्यादा चर्चा में रहा खिलौना

पवन खेड़ा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में बंदर का खिलौना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

यह प्रदर्शन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना।

विपक्ष ने इसे सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया।

वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष की शैली पर सवाल उठाए। इस तरह संसद के

अंतिम दिन नीतिगत बहस से ज्यादा विरोध के तरीके ने सुर्खियां बटोरीं।

यह घटना भारतीय राजनीति में बदलते विरोध के तरीकों को भी दिखाती है,

जहां पारंपरिक पोस्टर और नारे के साथ अब प्रतीकात्मक

वस्तुओं का इस्तेमाल भी राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जा रहा है।

सत्र का अंत भी हंगामे के बीच

अंततः संसद का मानसून सत्र भी राजनीतिक गतिरोध की छाया में समाप्त हुआ। रिपोर्टों के

अनुसार दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और सत्र का समापन हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की

आवश्यकता को सामने ला दिया है। लोकतांत्रिक

व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब मतभेद लगातार सदन की

कार्यवाही को प्रभावित करने लगें तो उसका असर कानून बनाने की प्रक्रिया पर भी पड़ता है।

निष्कर्ष

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का बंदर का

खिलौना लेकर प्रदर्शन और सत्ता पक्ष का राहुल गांधी के खिलाफ विरोध दोनों ही राजनीतिक टकराव की

बड़ी तस्वीर बनकर सामने आए। मकर द्वार पर आमने-सामने हुए इन प्रदर्शनों में दोनों पक्षों ने

एक-दूसरे पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

विपक्ष ने सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब और चर्चा की मांग दोहराई, जबकि भाजपा ने

विपक्ष पर संसद को बाधित करने का आरोप लगाया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा

पवन खेड़ा के हाथ में दिखाई दिए बंदर के खिलौने और उससे जुड़े नारे की रही।

आखिरकार सत्र का समापन भी राजनीतिक गतिरोध के बीच हुआ। अब आने वाले सत्र में

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की स्थिति कितनी

सुधरती है और क्या संसद में हंगामे की जगह मुद्दों पर सार्थक बहस को प्राथमिकता मिलती है।

Fisherman World News की ऐसी ही बड़ी राजनीतिक और राष्ट्रीय खबरों के लिए जुड़े रहें।

खबर पसंद आए तो Fisherman World News के Bell Icon को दबाएं और Notifications में “All” चुनें,

ताकि देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें आप तक समय पर पहुंचती रहें।

read this post :फतेहपुर में चरित्र पर शक ने उजाड़ा परिवार: पति पर शिक्षिका पत्नी की हत्या का आरोप, कुकर के ढक्कन से किया हमला