96 घंटे बाद पुलिस पूछताछ में खुला मामला, हादसा दिखाने की कोशिश का भी आरोप
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में शिक्षिका शालिनी की हत्या के मामले में पुलिस ने उसके पति दिलीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, पति करीब डेढ़ साल से पत्नी के चरित्र को लेकर शक करता था। इसी शक ने आखिरकार उसे खौफनाक वारदात की ओर धकेल दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी की हत्या को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की थी।
नासिरपीर मोहल्ले में 8 अगस्त को शालिनी की मौत हुई थी। शुरुआत में मामला हादसे जैसा नजर आया, लेकिन पुलिस को पति की भूमिका पर संदेह था। कई घंटों की पूछताछ के बावजूद वह पुलिस को गुमराह करता रहा। करीब 96 घंटे बाद जांच ने उस समय नया मोड़ लिया, जब पुलिस ने आरोपी के छह परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। इसके बाद पुलिस के मुताबिक दिलीप ने वारदात से जुड़े अहम तथ्य बताए।
पत्नी के चरित्र पर था शक
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दिलीप ने बताया कि उसे लंबे समय से पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का शक था। वह पत्नी के बिना बताए कहीं आने-जाने और अपनी कमाई अपनी इच्छा के अनुसार खर्च करने को लेकर भी नाराज रहता था।
पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के बीच पिछले करीब डेढ़ साल से संबंध अच्छे नहीं थे। शक लगातार बढ़ता गया और कथित तौर पर दिलीप ने करीब छह महीने पहले ही पत्नी की हत्या करने की योजना के बारे में सोचना शुरू कर दिया था।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस पूछताछ में सामने आए आरोप और बयान न्यायालय में अंतिम दोषसिद्धि के बराबर नहीं होते। मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
बर्तन धोते समय पत्नी पर हमला करने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 8 अगस्त की सुबह करीब पांच बजे दिलीप की नींद खुली। वह छत पर गया और वहां से नीचे आंगन में पत्नी को बर्तन साफ करते देखा। इसके बाद वह नीचे आया।
जांच के मुताबिक, आंगन में रखे प्रेशर कुकर के ढक्कन से उसने पत्नी के सिर पर पीछे से हमला किया। पुलिस का दावा है कि हमले के बाद शालिनी बेहोश हो गई। इसके बाद पानी के टब से जुड़ी घटना को भी हत्या की जांच में महत्वपूर्ण माना गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बाद में घटनास्थल को सामान्य दिखाने की कोशिश की और कुकर के ढक्कन को साफ कर रसोई में रख दिया। इसके बाद वह कुछ समय के लिए बाहर चला गया, ताकि घटना को दुर्घटना जैसा दिखाया जा सके।
मौत को हादसा बताने की कोशिश
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने शालिनी के गिरने से घायल होने की कहानी बताने की कोशिश की। वह अपने भाइयों को बुलाकर उसे अस्पताल ले गया। डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद शव को वापस घर लाया गया और परिवार के सामने भी मौत को गिरने से हुई दुर्घटना बताने की कोशिश की गई। पुलिस को शुरुआत से ही मामले की परिस्थितियों पर संदेह था। जांच आगे बढ़ने पर घटनास्थल से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित किया गया।
पुलिस के मुताबिक, जांच में प्रेशर कुकर का ढक्कन, टूटे हुए कांच के टुकड़े, पानी का टब, मोबाइल फोन, बाइक और नकदी समेत अन्य सामान बरामद किया गया। कुकर के ढक्कन की फोरेंसिक जांच में रक्त की पुष्टि होने की बात भी पुलिस ने कही है।
96 घंटे तक पुलिस को गुमराह करता रहा आरोपी
शालिनी की मौत के बाद पुलिस की जांच में सबसे पहले पति की भूमिका पर संदेह गया। इसके बावजूद आरोपी लगातार अलग कहानी बताता रहा। पुलिस को घटनास्थल से भी तत्काल ऐसा स्पष्ट सुराग नहीं मिला, जिससे हत्या की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
घटनास्थल पर ट्रैकर डॉग की मदद से भी जांच की गई, लेकिन पुलिस के अनुसार पहले ही कई साक्ष्य नष्ट हो चुके थे। इसी वजह से तत्काल कोई निर्णायक सुराग नहीं मिला।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी के छह परिजनों को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, परिवार के लोगों पर कार्रवाई की आशंका बढ़ने के बाद दिलीप टूट गया और उसने घटना के बारे में जानकारी दी।
खुद को बेगुनाह साबित करने का भी आरोप
जांच में पुलिस ने आरोपी के व्यवहार को लेकर भी कई बातें सामने रखी हैं। पुलिस के अनुसार, दिलीप ने खुद को निर्दोष दिखाने के लिए थाने में फंदा लगाने जैसा नाटक भी किया था। इससे पूछताछ के दौरान पुलिस को उससे सावधानी से पेश आना पड़ा।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने यह भी बताया कि उसे डर था कि पत्नी किसी दिन उसकी हत्या करा सकती है। इसी आशंका और पत्नी के कथित संबंधों के शक को उसने हत्या की वजह बताया।
हालांकि किसी व्यक्ति के चरित्र या संबंधों को लेकर महज शक किसी अपराध को सही नहीं ठहरा सकता। ऐसे मामलों में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस और न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से शिकायत और जांच कराना ही उचित रास्ता है।
आरोपी के शिक्षक भाइयों की भी जांच
मामले में केवल दिलीप ही नहीं, बल्कि उसके भाइयों भूपेंद्र और संदीप की भूमिका की भी
पुलिस जांच कर रही है। दोनों के खिलाफ प्राथमिकी में नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि
हत्या के बाद कथित तौर पर घटना को दुर्घटना दिखाने में
किसी अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका थी या नहीं। फिलहाल अन्य आरोपियों के संबंध में जांच जारी है और
उनकी भूमिका जांच के निष्कर्षों के आधार पर स्पष्ट होगी।
शिक्षा विभाग भी करेगा कार्रवाई
आरोपी दिलीप शिक्षक है। पुलिस की ओर से उसके जेल भेजे जाने की जानकारी
शिक्षा विभाग को दिए जाने की बात सामने आई है। विभाग की ओर से
पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इससे मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आरोपी की
सरकारी सेवा से जुड़े प्रशासनिक पहलू भी सामने आएंगे। यदि विभागीय कार्रवाई होती है तो
वह आपराधिक मुकदमे से अलग प्रक्रिया के तहत होगी।
बेटे के बयान और परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले की जांच में परिवार के सदस्यों के बयान भी अहम माने जा रहे हैं।
पुलिस घटना के समय घर में मौजूद लोगों की
गतिविधियों, फोन रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को एक-दूसरे से मिलाकर देख रही है।
पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना के बाद क्या हुआ, किसने महिला को
अस्पताल पहुंचाया और मौत को दुर्घटना बताने की कोशिश किस तरह की गई।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि आरोपी के
भाइयों को घटना की जानकारी कब और किस रूप में मिली।
शक और घरेलू तनाव ने लिया खतरनाक रूप
फतेहपुर की यह घटना घरेलू रिश्तों में बढ़ते अविश्वास के खतरनाक परिणाम की ओर भी
इशारा करती है। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से पत्नी पर शक कर रहा था।
यही शक धीरे-धीरे विवाद में बदला और कथित तौर पर हत्या की योजना तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार यह बात कही जाती रही है कि
वैवाहिक विवादों को हिंसा तक पहुंचने से पहले बातचीत, परिवार की सहायता, काउंसलिंग और
कानूनी मदद के जरिए सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर संदेह होने पर हिंसा करना या खुद
फैसला लेना कानूनन अपराध है। यदि किसी रिश्ते में
अविश्वास या विवाद है तो संबंधित व्यक्ति को कानूनी और सामाजिक सहायता लेनी चाहिए।
अब फोरेंसिक साक्ष्यों पर भी रहेगी नजर
पुलिस के मुताबिक, कुकर के ढक्कन पर रक्त की पुष्टि हुई है। घटनास्थल से बरामद दूसरे सामान को भी
जांच का हिस्सा बनाया गया है। आगे फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का महत्व बढ़ेगा।
पुलिस की ओर से आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। अदालत में
अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य पेश करने होंगे।
निष्कर्ष
फतेहपुर के नासिरपीर मोहल्ले में शिक्षिका शालिनी की मौत का मामला
पुलिस जांच के बाद हत्या के आरोप में बदल गया है। पुलिस के अनुसार,
पति दिलीप लंबे समय से पत्नी के चरित्र को लेकर शक करता था और
इसी वजह से उसने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस का दावा है कि महिला पर हमला करने के बाद मौत को हादसा दिखाने की कोशिश की गई,
लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामले की परतें खुलती चली गईं। करीब 96 घंटे बाद
आरोपी की गिरफ्तारी हुई और अब उसके भाइयों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इस घटना से सबसे बड़ा संदेश यही है कि रिश्तों में शक और विवाद का समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
किसी भी आरोप की अंतिम सच्चाई अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी और
आरोपी को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
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