नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को 163 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। गाजा में स्थायी शांति की कोशिशों को नया झटका लगा है, जबकि ईरान और अमेरिका के बीच भी सीधे संवाद का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि समुद्री मार्ग को सामान्य करने से पहले कई अहम मुद्दों पर समाधान जरूरी होगा।
गाजा को लेकर शांति प्रयासों को बड़ा झटका
गाजा में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित 15 सूत्री योजना को इस्राइल ने स्वीकार नहीं किया है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख है कि गाजा से सैन्य वापसी तभी संभव होगी जब हमास को पूरी तरह निरस्त्र किया जाए।
यही बिंदु प्रस्तावित योजना और इस्राइल की मौजूदा नीति के बीच बड़ा अंतर पैदा कर रहा है। योजना में हमास के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया के साथ इस्राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का रास्ता रखा गया था, जबकि इस्राइल पहले पूर्ण निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है।
इससे गाजा में स्थायी संघर्षविराम की संभावना फिलहाल कठिन दिखाई दे रही है। हमास की ओर से मध्यस्थ देशों और अमेरिका से इस्राइल पर दबाव बनाने की उम्मीद जताई गई है।
गाजा में स्थायी शांति की राह क्यों मुश्किल?
गाजा संकट की मौजूदा स्थिति की जड़ 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध से जुड़ी है। इसके बाद इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। लंबे संघर्ष के बावजूद स्थायी राजनीतिक समाधान अब तक सामने नहीं आया है।
एक तरफ इस्राइल हमास को पूरी तरह हथियारों से मुक्त करने की शर्त पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमास और उसके समर्थक पक्ष गाजा में इस्राइली सैन्य गतिविधियों तथा क्षेत्र से जुड़ी अन्य शर्तों को लेकर अलग रुख रखते हैं।
ऐसे में किसी भी शांति समझौते के लिए दोनों पक्षों की प्रमुख मांगों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी दुनिया की नजर
पश्चिम एशिया के संकट का एक और महत्वपूर्ण केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजारों पर पड़ सकता है।
ईरान और ओमान के बीच समुद्री यातायात को सामान्य करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाज ईरानी हिस्से से प्रवेश करके ओमानी हिस्से से बाहर निकल सकते हैं। अंतरिम व्यवस्था में जहाजों से टोल नहीं लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
हालांकि बातचीत आगे बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि जलडमरूमध्य तत्काल पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। ईरान ने साफ संकेत दिया है कि केवल समुद्री मार्ग की तकनीकी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी।
होर्मुज खोलने के लिए ईरान की क्या शर्तें हैं?
ईरान की ओर से संकेत दिया गया है कि जलडमरूमध्य खोलने से पहले युद्ध से हुए नुकसान और अमेरिका के साथ विवादित मुद्दों पर कार्रवाई जरूरी है। ईरानी पक्ष मुआवजे और पूर्व समझौतों से जुड़े विवादों को सुलझाने की मांग कर रहा है।
*ईरान और ओमान के बीच बातचीत समुद्री मार्ग तथा कानूनी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर आगे बढ़ रही है। लेकिन अंतिम निर्णय कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर निर्भर करेगा।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से जुड़ी जानकारी के मुताबिक होर्मुज के प्रबंधन को लेकर एक योजना का प्रारंभिक खाका भी सामने आया है। इसमें कथित तौर पर उन देशों के जहाजों पर प्रतिबंध की बात कही गई है, जिन्हें ईरान अपने खिलाफ नुकसान के लिए जिम्मेदार मानता है। हालांकि योजना की समीक्षा जारी है और अंतिम प्रावधानों में बदलाव संभव है।
अमेरिकी सैनिकों को लेकर ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव केवल समुद्री मार्ग तक सीमित नहीं है। ईरानी सेना की ओर से अमेरिकी सैनिकों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया है।
ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैन्यकर्मी ईरान की जमीन पर प्रवेश करते हैं तो उसका सैन्य जवाब दिया जाएगा। ईरानी सेना ने अपनी जमीनी इकाइयों को युद्ध की स्थिति के लिए तैयार बताया है।
इस बीच दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की स्थिति नहीं है। हालांकि मध्यस्थों के माध्यम से
संदेशों का आदान-प्रदान होने की बात सामने आई है। ईरान का कहना है कि
सीधे संवाद के लिए पहले पुराने समझौतों से जुड़े विवाद और
युद्ध से हुए नुकसान जैसे मुद्दों पर समाधान जरूरी है।
यमन में हूती हमलों ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम एशिया का संकट अब यमन और लाल सागर क्षेत्र तक भी असर डाल रहा है। ईरान सम
र्थित हूती विद्रोहियों ने
यमन के लाल सागर तट पर स्थित मोखा बंदरगाह को निशाना बनाया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार
हमले में सैनिकों और नागरिकों समेत कई लोगों की मौत हुई तथा अन्य लोग घायल हुए।
हमले से बंदरगाह की इमारतों और सामान को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
हूती संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सैन्य ठिकानों से जोड़कर बताया।
इसके अलावा सऊदी अरब के जिजान क्षेत्र में एक तेल प्रतिष्ठान से जुड़े स्थान पर
ड्रोन हमले के बाद आग लगने की जानकारी भी सामने आई। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका के हथियार भंडार पर भी दबाव
लंबे संघर्ष का असर अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर भी पड़ने की बात सामने आ रही है।
अमेरिकी रक्षा तंत्र हथियारों और गोला-बारूद के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
ईरान के साथ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में मिसाइल रक्षा प्रणालियों और
अन्य सैन्य संसाधनों की मांग बढ़ी है। इससे अमेरिका के दूसरे रणनीतिक
सहयोगियों को मिलने वाली सैन्य सहायता पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यूक्रेन और ताइवान जैसे सहयोगियों को लेकर भी यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि
अमेरिका अपने सीमित सैन्य संसाधनों का संतुलन कैसे बनाए रखता है।
क्या जल्द सामान्य होगा होर्मुज का समुद्री मार्ग?
ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत से समुद्री यातायात सामान्य होने की उम्मीद जरूर बनी है,
लेकिन अभी इसे अंतिम समझौता नहीं माना जा सकता।
ईरान की ओर से मुआवजे समेत कई शर्तों का संकेत दिया गया है। इसके अलावा समुद्री मार्ग की नई व्यवस्था,
कानूनी ढांचे और सुरक्षा संबंधी सवालों पर भी सहमति जरूरी है।
यदि होर्मुज में सामान्य व्यावसायिक आवाजाही बहाल होती है तो इससे वैश्विक
ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि बातचीत विफल रहती है या क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो
तेल और गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
163 दिन बाद भी बड़ा सवाल कायम
पश्चिम एशिया में संघर्ष अब एक ही मोर्चे तक सीमित नहीं है। गाजा में स्थायी शांति का रास्ता
अभी स्पष्ट नहीं है। ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत की कमी बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अलग-अलग शर्तें सामने हैं और
यमन में हूती हमलों ने संकट को लाल सागर तक पहुंचा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति,
समुद्री व्यापार, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
दुनिया की निगाहें कूटनीतिक प्रयासों पर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या अमेरिका, ईरान, इस्राइल और क्षेत्र के
अन्य पक्ष किसी साझा समाधान तक पहुंच सकते हैं। गाजा में स्थायी शांति और
होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही दोनों के लिए कूटनीतिक समझौते की जरूरत है।
यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय तनाव कम होने की संभावना बन सकती है।
लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कई पक्षों की अलग-अलग शर्तें इस प्रक्रिया को कठिन बना रही हैं।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया का संकट 163 दिन बाद भी निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
गाजा में प्रस्तावित शांति योजना को इस्राइल की असहमति से झटका लगा है,
जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने से पहले अमेरिका से जुड़े
कई मुद्दों के समाधान की मांग रखी है। दूसरी ओर यमन में नए हमलों ने क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा दी है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीति
इन अलग-अलग मोर्चों को शांत करने में सफल होगी या पश्चिम एशिया का संकट और व्यापक रूप लेगा।
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