प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नवाबगंज टोल प्लाजा पर एक काफिले से जुड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि पुलिस एस्कॉर्ट के पीछे चल रही करीब 25 से 30 निजी गाड़ियों ने टोल शुल्क दिए बिना तेजी से टोल प्लाजा पार करने की कोशिश की। इस दौरान टोल लेन में लगा बूम बैरियर क्षतिग्रस्त होने और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आया है।
टोल प्लाजा प्रबंधन की शिकायत के आधार पर नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब शिकायत में दर्ज वाहनों के नंबरों के आधार पर उनके मालिकों और घटना के समय वाहन चला रहे लोगों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस एस्कॉर्ट के पीछे चल रही थीं कई निजी गाड़ियां
मामला 8 अगस्त की दोपहर का बताया जा रहा है। उस समय उमर अहमद को पुलिस सुरक्षा के बीच जेल से ले जाया जा रहा था। पुलिस का सरकारी वाहन और एस्कॉर्ट आगे चल रहा था।
आरोप है कि इसी काफिले के पीछे बड़ी संख्या में निजी वाहन भी चल रहे थे। टोल प्रबंधन के मुताबिक इनकी संख्या करीब 25 से 30 के बीच थी। जब पुलिस के वाहन टोल प्लाजा से गुजरे तो नियमित प्रक्रिया के तहत उन्हें आगे जाने दिया गया।
इसके बाद पीछे से आ रही निजी गाड़ियों को टोल शुल्क के लिए रोकने का प्रयास किया गया। आरोप है कि कई वाहनों ने रुकने के बजाय एक साथ तेजी से आगे निकलने की कोशिश की।
बिना टोल दिए निकलने का आरोप
टोल प्लाजा प्रबंधन की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निजी वाहनों ने निर्धारित टोल शुल्क का भुगतान नहीं किया। कई गाड़ियां एक साथ आगे बढ़ीं और इसी दौरान टोल लेन का बूम बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया।
मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। हालांकि बैरियर किस वाहन से टूटा और घटना में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस अब टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और शिकायत में दर्ज वाहनों के नंबरों की मदद से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
कर्मचारियों से कथित अभद्रता का भी आरोप
मामले को केवल टोल शुल्क न देने तक सीमित नहीं बताया गया है। टोल प्लाजा प्रबंधन ने अपनी शिकायत में कर्मचारियों के साथ कथित गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
शिकायत के मुताबिक जब कर्मचारियों ने निजी वाहनों को रोकने की कोशिश की तो कथित तौर पर स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद कर्मचारियों को पीछे हटना पड़ा।
प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ वाहनों से कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
बूथ नंबर-3 के आसपास हुआ विवाद
बताया गया है कि घटना टोल प्लाजा के बूथ नंबर-3 के आसपास हुई। उस समय वहां कंप्यूटर ऑपरेटर और हेल्पर ड्यूटी पर मौजूद थे।
टोल कर्मचारियों की जिम्मेदारी वाहनों से निर्धारित शुल्क लेना और टोल लेन को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है। आरोप है कि जब उन्होंने निजी वाहनों को रोकने का प्रयास किया तो वाहन सवार लोग उनसे उलझ गए।
इसके बाद कुछ गाड़ियों के बैरियर पार करते हुए आगे निकलने की बात शिकायत में कही गई है। घटना के बाद टोल प्लाजा प्रबंधन ने पुलिस को इसकी सूचना दी।
टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर ने दी तहरीर
नवाबगंज टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में टोल शुल्क नहीं देने, बैरियर को नुकसान पहुंचाने, कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता और धमकी देने समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में कई वाहनों के नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे पुलिस को मामले की शुरुआती जांच आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
अब पुलिस वाहन पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने का
प्रयास कर रही है कि इन गाड़ियों के मालिक कौन हैं और घटना के समय वाहन कौन चला रहा था।
सफेद XUV और काली Creta समेत कई वाहनों का जिक्र
शिकायत में कुछ वाहनों की पहचान उनके नंबरों के साथ दर्ज होने की बात सामने आई है।
इनमें एक सफेद रंग की महिंद्रा XUV और एक काली Creta समेत अन्य वाहन शामिल बताए गए हैं।
पुलिस इन नंबरों की जांच करके वाहन मालिकों की जानकारी हासिल कर सकती है।
इसके बाद यह पता लगाने की कोशिश होगी कि घटना के समय वाहन किसके
कब्जे में था और क्या वह व्यक्ति इस घटनाक्रम में शामिल था।
यह भी जांच का हिस्सा होगा कि सभी वाहन एक ही समूह के साथ चल रहे थे या
अलग-अलग लोग किसी कारण से एक साथ टोल प्लाजा से गुजरे।
CCTV फुटेज से खुलेगा पूरा मामला
नवाबगंज टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण
साक्ष्य साबित हो सकती है। फुटेज से यह पता लगाया जा सकता है कि
घटना के समय कितने वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचे थे।
इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि किस वाहन ने टोल लेन में प्रवेश किया,
किसने शुल्क दिया और किस वाहन के गुजरने के दौरान बैरियर क्षतिग्रस्त हुआ।
यदि सीसीटीवी फुटेज में वाहनों के नंबर स्पष्ट दिखाई देते हैं तो उन्हें पुलिस की
शिकायत में दर्ज नंबरों से मिलाया जा सकता है। इससे जांच को ठोस दिशा मिलने की उम्मीद है।
पुलिस के सामने कई अहम सवाल
इस मामले की जांच में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। सबसे पहले यह पता लगाना होगा कि घटना के समय वास्तव में कितनी निजी गाड़ियां वहां से गुजरी थीं।
इसके बाद पुलिस यह जांच करेगी कि कितने वाहनों ने टोल शुल्क का भुगतान किया और
कितने बिना भुगतान किए आगे निकल गए। बैरियर को
नुकसान किस वाहन से हुआ, यह भी जांच का प्रमुख बिंदु रहेगा।
इसके अलावा कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता और धमकी के आरोपों की भी पुष्टि की जाएगी।
पुलिस इसके लिए टोल कर्मचारियों के बयान,
सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बना सकती है।
वाहन नंबरों से आगे बढ़ेगी जांच
एफआईआर में दर्ज वाहनों के नंबर पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग हैं।
वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड के जरिए उनके मालिकों की पहचान की जा सकती है।
इसके बाद संबंधित लोगों से पूछताछ कर घटना के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि काफिले में शामिल गाड़ियों के बीच
कोई आपसी संबंध था या वे अलग-अलग लोगों की थीं।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो
पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
टोल प्लाजा पर सुरक्षा और नियमों का सवाल
यह घटना टोल प्लाजा पर नियमों के पालन और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी
सवाल खड़े करती है। टोल लेन में वाहनों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शुल्क देना होता है।
किसी भी समूह द्वारा एक साथ बिना भुगतान किए निकलने या
बैरियर को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में टोल संचालन प्रभावित हो सकता है।
यदि कर्मचारियों के साथ धमकी या दुर्व्यवहार के आरोप सही पाए जाते हैं तो
यह मामला केवल टोल भुगतान के विवाद तक सीमित नहीं रहेगा।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने शिकायत के
आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है। इसलिए घटना में शामिल बताए जा रहे वाहन और लोगों के
संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
सीसीटीवी फुटेज, वाहन नंबर, टोल रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान इस जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर 8 अगस्त को सामने आए इस विवाद ने कई सवाल खड़े किए हैं।
आरोप है कि पुलिस एस्कॉर्ट के पीछे चल रही करीब 25 से 30 निजी गाड़ियों ने टोल शुल्क दिए
बिना तेजी से टोल प्लाजा पार किया और इस दौरान बैरियर क्षतिग्रस्त हुआ।
टोल प्रबंधन ने कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता और धमकी के भी आरोप लगाए हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और अब वाहनों के नंबरों,
सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि
घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, बैरियर किस वाहन से क्षतिग्रस्त हुआ और
कथित तौर पर टोल शुल्क न देने तथा कर्मचारियों से विवाद में कौन-कौन लोग शामिल थे।
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