सीएचसी गोला में कथित वसूली का वीडियो वायरल, एक्स-रे सहायक पर मरीज से पैसे लेने का आरोप, जांच शुरू

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

सीएचसी गोला में कथित वसूली का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

गोरखपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोला का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में एक महिला मरीज एक्स-रे सहायक पर एक्स-रे, दवा और प्लास्टर के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगाती दिखाई दे रही है। मामला सामने आने के बाद सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर ने संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच अभी जारी है।

महिला मरीज ने लगाए अवैध वसूली के आरोप

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में महिला का आरोप है कि उससे एक्स-रे कराने के लिए 30 रुपये, दवा के नाम पर 80 रुपये और प्लास्टर करने के लिए 500 रुपये की मांग की गई। महिला का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मिलने वाली सेवाएं निःशुल्क होने के बावजूद उससे पैसे लिए गए। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

एक्स-रे सहायक के अधिकार क्षेत्र पर उठे सवाल

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार एक्स-रे सहायक का कार्य केवल एक्स-रे से संबंधित तकनीकी सेवाएं देना होता है। मरीज का उपचार करना, दवा देना या प्लास्टर करना उसके निर्धारित कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह विभागीय नियमों के उल्लंघन का मामला माना जा सकता है। फिलहाल विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं वसूली के आरोप

सीएचसी गोला पहले भी इसी तरह के आरोपों को लेकर चर्चा में रह चुका है। इससे पहले एक फार्मासिस्ट पर रेबीज का इंजेक्शन लगाने के बदले पैसे लेने का आरोप लगा था। लगातार इस प्रकार की शिकायतें सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का विश्वास बना रहे।

अधीक्षक ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी मिलते ही संबंधित एक्स-रे सहायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक्स-रे सहायक को इलाज, प्लास्टर करने या दवा देने का अधिकार नहीं है। मामले की विभागीय जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच के दौरान वायरल वीडियो, संबंधित कर्मचारियों के बयान, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं,

तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं, तो जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना मामला

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं,

जबकि कई लोग सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और

जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता बता रहे हैं। हालांकि किसी भी

निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभागीय जांच का परिणाम सामने आना आवश्यक है।

निष्कर्ष

सीएचसी गोला से जुड़े इस कथित वसूली मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को

लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित कर्मचारी से

स्पष्टीकरण मांगा गया है। अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच पूरी होने और

आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। आरोपों की पुष्टि या खंडन

जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव

read this post :गोरखपुर: लकवा के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं, 4.5 घंटे का ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे अहम – डॉ. ए.एन. ठाकुर