आश्रम पद्धति विद्यालय में छात्रों के उत्पीड़न और अवैध गतिविधियों के आरोप, सिटी मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के आदेश

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

गोरखपुर।

गोला स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय पर लगे गंभीर आरोप

गोरखपुर जनपद के गोला क्षेत्र स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, पतरा एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं कुछ कर्मचारियों पर छात्रों के कथित उत्पीड़न, छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की कमी तथा विद्यालय परिसर में नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव ने पूरे प्रकरण की जांच जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को सौंप दी है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अभिभावक ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा विस्तृत शिकायती पत्र

गोला क्षेत्र के सहदोड़ाड़ निवासी शुभम ने अपने पुत्र अनुराग, जो कक्षा 10 का छात्र है, के हित में सिटी मजिस्ट्रेट को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनता और कई मामलों में निर्धारित नियमों की अनदेखी की जा रही है। अभिभावक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।

रसोईघर में निजी पार्टी और छात्रों से दुर्व्यवहार का आरोप

शिकायत के अनुसार 17 मई की रात विद्यालय के रसोईघर में कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से नियमों के विपरीत चिकन बनाकर निजी पार्टी आयोजित की जा रही थी।

आरोप है कि इसी दौरान पानी पीने पहुंचे कुछ छात्रों को अंदर जाने से रोक दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि दरवाजा खुलने पर एक छात्र को धक्का देकर गिरा दिया गया और उसके बाद दोबारा दरवाजा बंद कर दिया गया।

इन आरोपों के संबंध में विद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

छात्रावास में पेयजल और मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप

अभिभावक ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता।

शिकायत के अनुसार भीषण गर्मी के दौरान भी छात्रों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि पानी या अन्य सुविधाओं की मांग करने पर छात्रों को प्रताड़ित किया जाता है और उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।

यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह छात्रावास की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।

प्रधानाचार्य पर अभद्र व्यवहार का आरोप

शिकायतकर्ता ने विद्यालय के प्रधानाचार्य पर छात्रों एवं अभिभावकों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है।

इसके अलावा शिकायत में कहा गया है कि उनके पुत्र अनुराग को नियमों के विपरीत कक्षा में बैठने से रोका जा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावक ने प्रशासन से मांग की है कि छात्र को नियमित रूप से कक्षाओं में बैठने और पढ़ाई जारी रखने की अनुमति सुनिश्चित कराई जाए।

सिटी मजिस्ट्रेट ने डीआईओएस को सौंपी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव ने पूरे प्रकरण की जांच जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को सौंप दी है।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता, विद्यालय प्रशासन, संबंधित कर्मचारियों तथा आवश्यक होने पर अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

विद्यालय प्रशासन का पक्ष आना अभी बाकी

समाचार लिखे जाने तक विद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी विवादित मामले में सभी पक्षों की बात

सामने आना आवश्यक होता है। इसलिए जांच पूरी होने और विद्यालय प्रशासन की

प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन संभव होगा।

अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल,

पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों का

उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं

यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।

शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक

विशेषज्ञों का मानना है कि आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों की सुरक्षा और कल्याण

सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष

जांच और समयबद्ध कार्रवाई से अभिभावकों का विश्वास मजबूत होता है।

साथ ही यह भी आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष हो और सभी

पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।

निष्कर्ष

गोरखपुर के गोला क्षेत्र स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय से जुड़ा

यह मामला फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। छात्रों के कथित उत्पीड़न,

मूलभूत सुविधाओं की कमी और विद्यालय परिसर में नियमों के उल्लंघन

जैसे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने डीआईओएस को जांच के आदेश दिए हैं।

अब पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी,

जबकि आरोप असत्य पाए जाने की स्थिति में संबंधित पक्ष को भी न्याय मिलेगा।

FAQ

प्रश्न 1: मामला किस विद्यालय का है?
उत्तर: गोला क्षेत्र स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, पतरा का।

प्रश्न 2: शिकायत किसने की है?
उत्तर: सहदोड़ाड़ निवासी शुभम ने अपने पुत्र अनुराग के संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायत दी है।

प्रश्न 3: जांच किसे सौंपी गई है?
उत्तर: जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

प्रश्न 4: क्या विद्यालय प्रशासन का बयान सामने आया है?
उत्तर: समाचार लिखे जाने तक विद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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