गोरखपुर के धुरियापार में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों अकीदतमंदों के बीच निकला ताजिया जुलूस,

धुरियापार में मोहर्रम पर उमड़ा आस्था का सैलाब

गोरखपुर जनपद के धुरियापार क्षेत्र में दसवीं मोहर्रम के अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में निकाले गए भव्य ताजिया जुलूस में हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में “या हुसैन” और “या अली” की सदाएं गूंजती रहीं। मातम, नौहाख्वानी और धार्मिक परंपराओं के बीच लोगों ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए शांति, इंसाफ और मानवता का संदेश दिया। जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

नौहाख्वानी और मातम के बीच भावुक हुआ माहौल

ताजिया जुलूस के दौरान नौजवानों ने पारंपरिक तरीके से मातम किया और ढोल-ताशों के साथ नौहाख्वानी प्रस्तुत की। “कर्बला के शहीदों को सलाम” और “हुसैनियत जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा वातावरण गमगीन और श्रद्धामय बना रहा। कई अकीदतमंद छाती पीटकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते नजर आए। धार्मिक विद्वानों ने बताया कि मोहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष, धैर्य, सत्य और मानवता की रक्षा का संदेश देने वाला पर्व है।

कई गांवों के ताजियों का हुआ पारंपरिक मिलाप

मंझरिया, उरुवा, बनकट, कुड़ही बरपार माफी, रामपुर, मरवटिया, देवराजपार, रौजा दरगाह, हमीदपुर, मुबारकपुर, बढ़या, मुरारपुर और समदपुर सहित अनेक गांवों के ताजिए निर्धारित मार्गों से होते हुए ग्राम पहाड़पुर पहुंचे। यहां आईमा क्षेत्र के सभी ताजियों का पारंपरिक मिलाप कराया गया। इस ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा को देखने के लिए हजारों लोग मौजूद रहे। इसके बाद सभी ताजिए धुरियापार के मुख्य ताजिए के साथ कर्बला की ओर रवाना हुए, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

प्रशासन और समाजसेवियों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

पूरे आयोजन के दौरान उरुवा पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह मुस्तैद रही। जुलूस के मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। वहीं प्रधान प्रतिनिधि धुरियापार रिंटू शाही, समाजसेवी केशव तिवारी, डॉ. मोहम्मद सईद, पप्पू खान, बंदे हसन, इसराइल, लाडले, लवी सहित अनेक लोगों ने व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

इमाम हुसैन की शहादत देती है इंसाफ और मानवता का संदेश

आईमा सदर रसीद खान ने कहा कि मोहर्रम केवल मातम का पर्व नहीं है, बल्कि यह हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी, सब्र और सत्य के लिए किए गए संघर्ष की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के सामने कभी सिर नहीं झुकाया और इंसाफ तथा मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को सत्य, न्याय, भाईचारे और इंसानियत के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

निष्कर्ष

धुरियापार में निकला ताजिया जुलूस धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनकर सामने आया। हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि इंसाफ, कुर्बानी और मानवता के मूल्यों को याद करने का अवसर है। प्रशासन, समाजसेवियों और स्थानीय लोगों के

सहयोग से कार्यक्रम पूरी गरिमा और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।

FAQ

Q1. धुरियापार में ताजिया जुलूस किस अवसर पर निकाला गया?

उत्तर: दसवीं मोहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में ताजिया जुलूस निकाला गया।

Q2. किन-किन गांवों के ताजिए जुलूस में शामिल हुए?

उत्तर: मंझरिया, उरुवा, बनकट, कुड़ही बरपार माफी, रामपुर, मरवटिया, देवराजपार, रौजा दरगाह,

हमीदपुर, मुबारकपुर, बढ़या, मुरारपुर और समदपुर सहित कई गांवों के ताजिए शामिल हुए।

Q3. ताजियों का मिलाप कहां हुआ?

उत्तर: सभी ताजियों का पारंपरिक मिलाप ग्राम पहाड़पुर में कराया गया।

Q4. कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था किसने संभाली?

उत्तर: उरुवा पुलिस के साथ स्थानीय समाजसेवियों और स्वयंसेवकों ने सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।

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