गोरखपुर में 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती समारोह का हुआ भव्य आयोजन
गोरखपुर में 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती मनाई गई, सामाजिक न्याय और शिक्षा के संदेश के साथ हुआ भव्य समारोह
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गोरखपुर के मत्स्येंद्र नगर स्थित राष्ट्रीय अंबेडकर महासभा के केंद्रीय कार्यालय में 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और संविधान के मूल्यों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
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गोरखपुर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती
गोरखपुर के मत्स्येंद्र नगर स्थित संध्या विहार में राष्ट्रीय अंबेडकर महासभा के केंद्रीय कार्यालय पर शुक्रवार को 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ओमकार धारिया ने की, जबकि संचालन पुरुषोत्तम कुमार बौद्ध ने किया। समारोह का शुभारंभ छत्रपति शाहूजी महाराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद भारती (एडवोकेट) ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
सामाजिक न्याय और शिक्षा के महानायक थे छत्रपति शाहूजी महाराज
मुख्य अतिथि चंद्रिका प्रसाद भारती ने अपने संबोधन में कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज भारतीय समाज में सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई, जिससे वे विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके। वक्ताओं ने कहा कि शाहूजी महाराज ने समाज के वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।
जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ जीवनभर किया संघर्ष
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज ने अपने शासनकाल में जातिवाद, छुआछूत, सामाजिक भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ लगातार संघर्ष किया। उन्होंने पिछड़े, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के सामाजिक उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू कीं। उनके विचारों ने भारतीय समाज में समान अवसर, सामाजिक समरसता और मानवाधिकारों की मजबूत नींव रखने का कार्य किया। वक्ताओं ने कहा कि आज भी उनके आदर्श समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
युवाओं से संविधान और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने की अपील
विशिष्ट अतिथि दिनेश कुमार ने कहा कि शाहूजी महाराज का पूरा जीवन गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा, सामाजिक एकता और संविधान के मूल्यों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। कार्यक्रम के दौरान पुरुषोत्तम कुमार बौद्ध ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण एवं पंचशील का पाठ कराया। समारोह में राम बचन पासवान, संजय कुमार, बजरंगी प्रसाद, विनोद कुमार, सूर्य विश्वास, संध्या भारती सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने शाहूजी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समाज को मिला समानता और शिक्षा का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज केवल एक शासक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के महानायक थे। उन्होंने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया। उनके विचार आज भी लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ हुआ।
निष्कर्ष
गोरखपुर में आयोजित 152वीं छत्रपति शाहूजी महाराज
जयंती समारोह ने समाज को सामाजिक न्याय, शिक्षा,
समानता और संविधान के मूल्यों का संदेश दिया। राष्ट्रीय अंबेडकर महासभा द्वारा आयोजित
इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने और समाज में भाईचारा,
समानता तथा मानवता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
FAQ
Q1. यह कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था?
उत्तर: यह कार्यक्रम गोरखपुर के मत्स्येंद्र नगर स्थित संध्या विहार में
राष्ट्रीय अंबेडकर महासभा के केंद्रीय कार्यालय पर आयोजित किया गया।
Q2. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अंबेडकर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद भारती (एडवोकेट) थे।
Q3. छत्रपति शाहूजी महाराज को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर: उन्हें सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए
ऐतिहासिक कार्यों के लिए याद किया जाता है।
Q4. कार्यक्रम का मुख्य संदेश क्या था?
उत्तर: कार्यक्रम का मुख्य संदेश सामाजिक समरसता, शिक्षा, संविधान के मूल्यों और मानवता को मजबूत करना था।
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