खजनी तहसील में अधिवक्ताओं का जोरदार प्रदर्शन: निबंधन विभाग के निजीकरण और ऑनलाइन आपत्ति-

गोरखपुर जिले की खजनी तहसील में गुरुवार को अधिवक्ताओं ने निबंधन विभाग के निजीकरण और ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण व्यवस्था के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई व्यवस्था न केवल अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ है, बल्कि आम जनता के लिए भी परेशानी का कारण बनेगी। विरोध के चलते तहसील परिसर में पूरे दिन बैनामा और रजिस्ट्री से जुड़े कार्य प्रभावित रहे, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए आए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

बार एसोसिएशन ने निजीकरण को बताया जनविरोधी फैसला

धरने के दौरान बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि निबंधन विभाग का निजीकरण सरकारी व्यवस्था को कमजोर करेगा और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। उनका आरोप था कि निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपने से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है और भ्रष्टाचार की आशंका भी बढ़ सकती है। अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार ने इस फैसले से पहले अधिवक्ता संगठनों और संबंधित पक्षों से कोई व्यापक चर्चा नहीं की, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। उन्होंने सरकार से निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की।

ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण व्यवस्था पर भी उठे सवाल

अधिवक्ताओं ने ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण प्रणाली का भी विरोध किया। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग डिजिटल संसाधनों और तकनीकी जानकारी से वंचित हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन, पक्षकारों की उपस्थिति और कानूनी सलाह आवश्यक होती है, जिसे पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से प्रभावी ढंग से पूरा नहीं किया जा सकता। इससे भविष्य में विवाद और मुकदमों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई।

धरने से पूरे दिन प्रभावित रहा बैनामा कार्य

अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन का सीधा असर तहसील के नियमित कामकाज पर पड़ा। पूरे दिन बैनामा, रजिस्ट्री और अन्य पंजीकरण संबंधी कार्य लगभग ठप रहे। कई लोग जरूरी दस्तावेजों का पंजीकरण कराने पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। इससे आम जनता को असुविधा के साथ-साथ राजस्व कार्यों पर भी असर पड़ा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की।

सरकार से फैसले की समीक्षा की मांग

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन केवल अधिवक्ताओं के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता और आम नागरिकों की सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि निबंधन विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण व्यवस्था की समीक्षा कर अधिवक्ताओं, राजस्व अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाए। उनका कहना था कि बिना पर्याप्त तैयारी के नई व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

धरना समाप्त होने के बाद अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में अधिवक्ता समुदाय की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

खजनी तहसील में अधिवक्ताओं का यह प्रदर्शन निबंधन विभाग के निजीकरण और

ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण व्यवस्था को लेकर बढ़ते असंतोष का संकेत है। एक ओर अधिवक्ता इसे

आम जनता और न्यायिक व्यवस्था के हितों के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं सरकार का

उद्देश्य सेवाओं को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाना हो सकता है। ऐसे में संवाद और

सहमति के माध्यम से समाधान निकालना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

FAQ

1. खजनी तहसील में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन क्यों किया?

निबंधन विभाग के निजीकरण और ऑनलाइन आपत्ति-निस्तारण व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया।

2. प्रदर्शन का क्या असर पड़ा?

धरने के कारण पूरे दिन बैनामा, रजिस्ट्री और अन्य पंजीकरण संबंधी कार्य प्रभावित रहे।

3. अधिवक्ताओं की मुख्य मांग क्या है?

सरकार निजीकरण का फैसला वापस ले, ऑनलाइन व्यवस्था की समीक्षा करे और अधिवक्ताओं से संवाद स्थापित करे।

4. यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे क्या होगा?

अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार और प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।

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