जनगणना ड्यूटी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: LIC कर्मचारियों को मिली अंतरिम राहत

हाईकोर्ट के फैसले से LIC कर्मचारियों को बड़ी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य में लगाए जाने को लेकर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कानपुर नगर निगम के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें LIC कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिल गई है और मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार कानपुर नगर निगम की ओर से LIC कर्मचारियों को जनगणना कार्य में शामिल करने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके खिलाफ कर्मचारियों की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्हें उनकी मूल सेवा शर्तों से अलग कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

अदालत ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान संबंधित आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने संकेत दिया कि कर्मचारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। फिलहाल अंतिम निर्णय आने तक आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।

पहले भी आया था अलग फैसला

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने एक अलग मामले में यह माना था कि LIC कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है और इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि LIC एक सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है और जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में उसके कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं।

कानूनी बहस का केंद्र

इस मामले में मुख्य विवाद यही है कि क्या LIC कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है या नहीं। एक पक्ष का तर्क है कि जनगणना राष्ट्रीय दायित्व है, जबकि दूसरा पक्ष कर्मचारियों की सेवा शर्तों और कार्यक्षेत्र का

हवाला दे रहा है। यही कारण है कि मामला कानूनी रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कर्मचारियों के संगठनों ने जताई खुशी

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद LIC कर्मचारियों और उनके संगठनों में संतोष का माहौल है। उनका कहना है कि

इससे कर्मचारियों के हितों की रक्षा होगी और अदालत में उनकी बात को उचित मंच मिला है।

दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष अदालत में अपना जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के

अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि जनगणना कार्य में LIC कर्मचारियों की

नियुक्ति को लेकर कानूनी स्थिति क्या होगी। यह फैसला भविष्य में अन्य सरकारी और

अर्ध-सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश जनगणना ड्यूटी और कर्मचारियों के अधिकारों से

जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। फिलहाल LIC कर्मचारियों को राहत मिली है, लेकिन अंतिम

फैसला आने के बाद ही इस पूरे विवाद की कानूनी तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी। मामला न

केवल कर्मचारियों बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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