उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में
देर रात आया मौत बनकर तूफान
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। देर रात आए तेज आंधी-तूफान के बीच बेतवा नदी पर बन रहा निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय कई मजदूर पुल के हिस्से पर ही मौजूद थे। कुछ ही सेकंड में लोहे, कंक्रीट और शटरिंग के भारी ढांचे के नीचे मजदूर दब गए। इस भीषण हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
चीखें तूफान के शोर में दब गईं
स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय मौसम अचानक खराब हो गया था। तेज हवाएं और बारिश शुरू हो चुकी थी। इसी दौरान पुल का स्लैब, पिलर और शटरिंग का हिस्सा अचानक गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने बचाव के लिए दौड़ लगाई, लेकिन तेज तूफान और अंधेरे के कारण राहत कार्य में काफी मुश्किलें आईं। कई मजदूरों की चीखें तूफान के शोर में दब गईं।
बेतवा नदी पर बन रहा था पुल
जानकारी के मुताबिक यह पुल हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर मोराकांदर और कंदौर गांव को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था। पुल का निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा था और घटना के समय भी मजदूर रात में साइट पर मौजूद थे। अचानक आए तूफान के बाद पुल का हिस्सा गिर गया और बड़ा हादसा हो गया।
छह मजदूरों की गई जान
प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की कि हादसे में चार मजदूरों और दो सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है। कुछ मजदूर गंभीर रूप से घायल भी हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई थी क्योंकि कई लोग मलबे में फंसे होने की संभावना थी।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद पूरी रात राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए मशीनों और स्थानीय संसाधनों की मदद ली गई। कई घंटों की मशक्कत के बाद शवों और घायलों को बाहर निकाला गया।
हादसे के बाद उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
पुल गिरने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण मजबूत होता तो केवल आंधी-तूफान से इतना बड़ा हादसा नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में मौसम संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होती है।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले का संज्ञान लिया। अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही पूरे मामले की जांच के
आदेश भी दिए गए हैं ताकि हादसे की असली वजह सामने आ सके।
मजदूरों के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
कई परिवारों का कहना है कि उनके घर का कमाने वाला सदस्य इस दुर्घटना में चला गया।
गांवों में शोक का माहौल है और परिजन लगातार न्याय तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
क्या लापरवाही बनी हादसे की वजह?
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसा केवल खराब
मौसम के कारण हुआ या निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही भी थी।
तकनीकी विशेषज्ञों की टीम निर्माण सामग्री और संरचना की जांच कर सकती है।
यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
हमीरपुर का यह पुल हादसा एक बड़ा सवाल छोड़ गया है कि क्या निर्माणाधीन परियोजनाओं में
सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो रहा है। तेज आंधी-तूफान के बीच हुआ
यह हादसा छह परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि
यह केवल प्राकृतिक आपदा थी या इसके पीछे मानवीय लापरवाही भी जिम्मेदार थी।
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