CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के अंकों में असामान्य अंतर की शिकायतों के बाद अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। यह मामला लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा संबंध परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
CBSE ने वर्ष 2026 से कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की थी। इस प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है और परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर मूल्यांकन करते हैं। बोर्ड का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और मानवीय त्रुटियां कम होती हैं।
छात्रों और शिक्षकों ने उठाए सवाल
रिजल्ट घोषित होने के बाद कई छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि कुछ उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली स्कैन हुई थीं, कई जगह तकनीकी समस्याएं सामने आईं और मूल्यांकन में असंगतियां देखने को मिलीं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें बोर्ड परीक्षा में अपेक्षा से बहुत कम अंक मिले।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई जनहित याचिका
मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को पर्याप्त तैयारी और परीक्षण के बिना लागू किया गया। याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने और प्रभावित छात्रों को राहत देने की मांग की गई है।
CBSE ने सिस्टम का किया बचाव
विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने अपने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का बचाव किया। बोर्ड का कहना है कि यह प्रणाली मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। साथ ही छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देखने, सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार कीं कुछ समस्याएं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्वीकार किया कि नई प्रणाली के शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जाएगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
डिजिटल मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर बहस
इस विवाद के बाद देशभर में डिजिटल मूल्यांकन प्रणालियों की विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक से पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन इसके लिए
मजबूत तकनीकी ढांचा, उचित प्रशिक्षण और लगातार निगरानी भी जरूरी है।
लाखों छात्रों की नजर अदालत के फैसले पर
CBSE के लाखों छात्र और उनके परिवार अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं।
यदि अदालत किसी स्वतंत्र जांच या पुनर्मूल्यांकन का निर्देश देती है तो
इसका असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ सकता है।
भविष्य में बदल सकती है मूल्यांकन प्रक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद के बाद CBSE और अन्य शिक्षा बोर्ड डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में
कई बदलाव कर सकते हैं। बेहतर स्कैनिंग तकनीक, उन्नत सॉफ्टवेयर और
परीक्षकों के प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है।
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल मूल्यांकन की
चुनौतियों को उजागर कर दिया है। हाईकोर्ट द्वारा जवाब तलब किए जाने के बाद
यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद क्या
निष्कर्ष सामने आते हैं और छात्रों को किस प्रकार राहत मिलती है।
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