गोरखपुर में दिव्यांग पेंशन घोटाला: एक ही परिवार के 11 लोगों ने 7 साल तक लिया फर्जी लाभ, अब होगी रिकवरी

गोरखपुर के गगहा क्षेत्र में दिव्यांग पेंशन योजना में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। बेलावीरभान गांव में एक ही परिवार के 11 लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर करीब सात वर्षों तक सरकारी पेंशन का लाभ उठाया।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने सभी अपात्र लाभार्थियों से कुल 5 लाख 17 हजार 800 रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया है।

शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़े का राज

जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कमलेश कुमार वर्मा के अनुसार वर्ष 2022 में गगहा ब्लॉक के बेलावीरभान गांव निवासी राजीव चंद ने आईजीआरएस पोर्टल और लिखित प्रार्थनापत्र के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि एक ही परिवार के कई सदस्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे थे।

एक ही परिवार के 11 लोग निकले फर्जी लाभार्थी

जांच में रणधीर चंद, चित्रसेन चंद, अनूप प्रताप चंद, मुगाछि चंद, इंद्रसेन चंद, चंद्रसेन चंद, सीपी चंद, मीरा देवी, संदीप चंद, भीम चंद और वीरेंद्र चंद के नाम सामने आए।

विभागीय जांच में पाया गया कि इन सभी ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे सात वर्षों तक सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

जांच पूरी होने के बाद सभी की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी गई।

बैंक खातों की जांच में सामने आई रकम

प्रशासन ने लाभार्थियों के बैंक खातों की ट्रांजेक्शन डिटेल खंगाली, जिसके बाद कुल अवैध भुगतान की राशि 5 लाख 17 हजार 800 रुपये आंकी गई।

विभाग की ओर से संबंधित लोगों को कई बार नोटिस भेजकर रकम वापस

जमा करने को कहा गया, लेकिन किसी ने भी सरकारी धन लौटाने में रुचि नहीं दिखाई।

प्रशासन अब करेगा सख्त कार्रवाई

अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं की गई तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने में किन

लोगों की भूमिका रही और क्या इसमें किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत थी।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर सवाल

इस मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि

यदि समय रहते जांच न होती तो यह फर्जीवाड़ा और लंबे समय तक चलता रहता।

दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाएं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए चलाई जाती हैं,

लेकिन फर्जी लाभार्थियों के कारण वास्तविक जरूरतमंदों का हक प्रभावित होता है।

ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना मामला

गगहा क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को

सभी सरकारी योजनाओं की नियमित जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

गोरखपुर के गगहा क्षेत्र में सामने आया दिव्यांग पेंशन घोटाला सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े की

बड़ी मिसाल बन गया है। एक ही परिवार के 11 लोगों द्वारा सात वर्षों तक फर्जी तरीके से

पेंशन लेने का मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

अब प्रशासन रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। माना जा रहा है कि

इस कार्रवाई के बाद अन्य योजनाओं में भी जांच तेज हो सकती है