उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों और हरियाणा से डीजल-पेट्रोल तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि हरियाणा के बहालगढ़ और यूपी के शामली, बागपत तथा मेरठ से बड़े पैमाने पर सस्ता तेल सप्लाई किया जा रहा है।
यह नेटवर्क केवल वेस्ट यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला हुआ बताया जा रहा है। तस्कर 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक डीजल और पेट्रोल बेचने का दावा कर रहे हैं।
12 दिन की पड़ताल में सामने आई सच्चाई
संवाददाता द्वारा करीब 12 दिनों तक की गई पड़ताल में तेल तस्करी के इस नेटवर्क की कई परतें खुलकर सामने आईं। जांच में पता चला कि सस्ता तेल टैंकरों और बड़े ड्रमों के जरिए अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जा रहा है।
मेरठ, शामली और बागपत से तेल दिल्ली, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, गाजियाबाद और देहरादून तक भेजा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक तेल अलग-अलग इलाकों में खपाया जा रहा है।
कितने में बिक रहा डीजल-पेट्रोल?
जांच में यह भी सामने आया कि एक ड्रम में करीब 260 लीटर पेट्रोल 75 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है। वहीं डीजल की कीमत 72 रुपये प्रति लीटर बताई गई।
इस हिसाब से एक ड्रम पेट्रोल लगभग 19,500 रुपये और डीजल करीब 18,720 रुपये में सप्लाई किया जा रहा है।
बाजार कीमत से काफी कम रेट होने के कारण यह नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है।
कैसे काम करता है यह नेटवर्क?
सूत्रों के अनुसार तेल को टैंकरों और ड्रमों में भरकर अलग-अलग राज्यों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद छोटे स्तर पर सप्लाई करने वाले लोग इसे स्थानीय बाजारों और वाहनों तक पहुंचाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अवैध तस्करी से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है। साथ ही मिलावटी और अवैध तेल वाहनों के इंजन को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। दिल्ली और देहरादून तक इसकी सप्लाई पहुंच रही है।
कई स्थानों पर छोटे गोदाम और अस्थायी भंडारण केंद्र बनाए गए हैं, जहां से तेल आगे सप्लाई किया जाता है।
प्रशासन और एजेंसियों पर सवाल
इतने बड़े स्तर पर चल रही तस्करी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना स्थानीय नेटवर्क और निगरानी में कमी के इतना बड़ा कारोबार संभव नहीं है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई कर सकती हैं।
अवैध तेल से क्या हैं खतरे?
अवैध तरीके से बेचा जा रहा तेल कई बार मिलावटी भी हो सकता है।
इससे वाहन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा अवैध भंडारण और परिवहन के कारण आग लगने और बड़े हादसों की संभावना भी बनी रहती है।
विशेषज्ञों ने लोगों से सस्ते तेल के लालच में अवैध ईंधन न खरीदने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा से दिल्ली व उत्तराखंड तक फैले
डीजल-पेट्रोल तस्करी नेटवर्क का खुलासा बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है।
72 रुपये लीटर डीजल और 75 रुपये लीटर पेट्रोल बेचने के दावों ने
तेल कारोबार में चल रहे अवैध खेल को उजागर कर दिया है।
अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों पर है कि
इस बड़े नेटवर्क पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।