गोरखपुर में बाइक टैक्सी
पेट्रोल-डीजल संकट के बीच बढ़ा वैकल्पिक रोजगार
Gorakhpur में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल संकट के बीच बाइक टैक्सी और मालवाहक गाड़ियां कई लोगों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बनकर उभरी हैं। शहर में तीन प्रमुख निजी कंपनियों के एप के जरिए बड़ी संख्या में युवा और जरूरतमंद लोग बाइक टैक्सी चालक तथा मालवाहक वाहन चालक के रूप में पंजीकरण करा रहे हैं।
युवाओं को मिल रहा स्वरोजगार
बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच अब युवा पारंपरिक नौकरियों के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर कमाई कर रहे हैं। मोबाइल एप डाउनलोड कर लोग आसानी से बाइक टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़ रहे हैं।
कई युवाओं का कहना है कि—
- कम निवेश में काम शुरू हो जाता है
- समय की स्वतंत्रता मिलती है
- रोजाना आय का विकल्प तैयार हो रहा है
शहर में तेजी से बढ़ी मांग
गोरखपुर में ट्रैफिक और छोटे दूरी के सफर के लिए बाइक टैक्सी की मांग तेजी से बढ़ी है। वहीं घरेलू सामान, छोटे व्यवसायों और ऑनलाइन डिलीवरी के कारण मालवाहक गाड़ियों की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
महिलाएं और जरूरतमंद भी जुड़ रहे
सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग और जरूरतमंद परिवार भी इन सेवाओं से
जुड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। कई लोग पार्ट टाइम के रूप में भी बाइक टैक्सी चला रहे हैं।
निजी कंपनियों के एप बने सहारा
शहर में संचालित निजी कंपनियों के एप के जरिए
पंजीकरण प्रक्रिया आसान होने से बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में आ रहे हैं।
आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन दस्तावेज के आधार पर रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
विशेषज्ञ बोले- स्वरोजगार का बेहतर मॉडल
रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रांसपोर्ट सेवाएं छोटे शहरों में स्वरोजगार का मजबूत मॉडल बन सकती हैं।
इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर कमाई का अवसर मिल रहा है और
बेरोजगारी का दबाव भी कुछ हद तक कम हो रहा है।
