गोरखपुर में सीएम योगी
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में विकास की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां कभी कूड़े का विशाल पहाड़ हुआ करता था, आज वही स्थान एक सुंदर और व्यवस्थित ईको पार्क के रूप में विकसित हो चुका है। यह परिवर्तन Yogi Adityanath के विजन और नगर निगम की सुनियोजित कार्यप्रणाली का परिणाम है।
कूड़े के पहाड़ से पर्यटन स्थल तक का सफर
राप्ती नदी के किनारे राजघाट पुल के पास स्थित एकला बंधा क्षेत्र लंबे समय से लिगेसी वेस्ट का केंद्र बना हुआ था। दशकों से जमा कूड़ा पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गया था। इस कचरे से निकलने वाली मीथेन गैस के कारण कई बार स्वतः आग लग जाती थी, जिससे वायु प्रदूषण और दुर्गंध फैलती थी।
आसपास रहने वाले लोगों को सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। लेकिन प्रशासन ने इस समस्या को अवसर में बदलते हुए एक बड़े बदलाव की शुरुआत की।
कैसे हुआ बदलाव
नगर निगम ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में एक ठोस कार्ययोजना तैयार की। इसके तहत पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया और भूमि को समतल कर हरियाली विकसित की गई। वर्षों से जमा कूड़े को हटाकर इस क्षेत्र को एक स्वच्छ और उपयोगी स्थान में बदला गया।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, यह परियोजना न केवल शहर की पुरानी समस्या का समाधान है बल्कि भविष्य के लिए एक सकारात्मक पहल भी है।
ईको पार्क की विशेषताएं
नए ईको पार्क में शहरवासियों के लिए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां प्राकृतिक हरियाली,
मॉर्निंग वॉक के लिए ट्रैक, बच्चों के खेलने के क्षेत्र और बैठने के लिए सुंदर स्थान बनाए गए हैं।
यह पार्क पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वच्छ और शांत वातावरण प्रदान करेगा।
फोरलेन सड़क से बेहतर कनेक्टिविटी
इस परियोजना के तहत ईको पार्क के सामने की सड़क को भी फोरलेन में
विकसित किया गया है, जो बाघागाड़ा तक जाती है।
इससे यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों को आने-जाने में सुविधा मिलेगी।
23 अप्रैल को लोकार्पण
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath 23 अप्रैल को इस ईको पार्क और फोरलेन सड़क का
लोकार्पण करेंगे। इस परियोजना पर लगभग 41.50 करोड़ रुपये की लागत आई है।
पर्यावरण और विकास का संतुलन
यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव है।
जहां पहले प्रदूषण और खतरा था, आज वहां हरियाली और पर्यटन का केंद्र बन गया है।
गोरखपुर का एकला बंधा यह दिखाता है कि सही नेतृत्व और मजबूत योजना से किसी भी
समस्या को अवसर में बदला जा सकता है। यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणा है।
