गोरखपुर शहर का हृदय स्थल माने जाने वाले रामगढ़ ताल आजकल प्रदूषण की भयानक चपेट में है। एक बार फिर से यहां बदबू और घुटन का माहौल बना हुआ है, जिससे आसपास के हजारों निवासी संकट का सामना कर रहे हैं। यह झील, जो कभी पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रसिद्ध थी और पर्यटकों को आकर्षित करती थी, अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
रामगढ़ ताल प्रदूषण का भयावह रूप: निवासियों की परेशानी
रामगढ़ ताल के आसपास रहने वाले लोग रोजाना घुटन और सांस लेने में तकलीफ का शिकार हो रहे हैं। सुबह-शाम यहां से उठने वाली बदबू इतनी तेज है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घरों में कैद हो गए हैं। गोरखपुर का यह प्राकृतिक सौंदर्य स्थल अब कचरे और गंदगी का अंबार बन चुका है। मछली पालन करने वाले फिशरमैन अपनी आजीविका खोने के कगार पर हैं, क्योंकि झील का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि मछलियां मर रही हैं।
फिशरमैन आर्मी के अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने बताया कि झील में ऑक्सीजन की कमी हो गई है, जिससे आसपास स्वच्छ हवा मिलना मुश्किल हो गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, रामगढ़ ताल प्रदूषण के मुख्य कारण शहर के नाले-नालियों से बहने वाला अनुपचारित गंदा पानी है, जो सीधे झील में गिरता है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह पूरी तरह सूख सकती है।
फिशरमैन आर्मी का आग्रह: सरकार झील को प्रदूषण मुक्त बनाए
*फिशरमैन आर्मी के अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार, एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल), पर्यावरण विभाग और गोरखपुर नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “रामगढ़ झील को बचाना जरूरी है, ताकि आसपास के लोग स्वच्छ हवा और ऑक्सीजन प्राप्त कर सकें।” निषाद ने निवेदन पत्र में साफ किया कि शहर का गंदा पानी रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाए और झील की सफाई का अभियान चलाया जाए। फिशरमैन समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण नहीं रोका गया, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा।
रामगढ़ ताल बचाओ अभियान के तहत स्थानीय लोग जागरूकता फैला रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर ठोस कदम की कमी है। गोरखपुर के सांसद और विधायक भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं, जो चिंता का विषय है।
एनजीटी और नगर निगम की अनदेखी: तत्काल कार्रवाई जरूरी
एनजीटी विभाग को रामगढ़ ताल प्रदूषण की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पर्यावरण विभाग और नगर निगम की लापरवाही से झील का जल स्तर लगातार गिर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंदे पानी को रोकने के लिए डायवर्जन चैनल बनाना चाहिए और
नियमित सफाई करनी चाहिए। गोरखपुर नगर निगम ने वादा किया था कि
झील को पुनर्जीवित किया जाएगा, लेकिन बजट आवंटन के बावजूद काम रुका हुआ है।
स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर #रामगढ़तालबचाओ कैंपेन चलाया है, जिसमें हजारों लोग शामिल हो चुके हैं।
यदि एनजीटी ने संज्ञान लिया, तो फाइन और सख्ती से समस्या हल हो सकती है।
गोरखपुर का यह पिकनिक स्पॉट फिर से हरा-भरा बन सकता है, बशर्ते प्रशासन जागे।
सामूहिक प्रयास से बच सकती है रामगढ़ ताल
रामगढ़ ताल प्रदूषण को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। फिशरमैन चंद्रभान निषाद का आग्रह सही दिशा में है,
लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार कदम उठाए। स्वच्छ पर्यावरण हर नागरिक का अधिकार है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो गोरखपुर की यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए खो सकती है।
