श्रीमद्भागवत कथा गोरखपुर: दुघरा गांव में धार्मिक उत्साह की लहर। गोरखपुर जिले के उरुवा क्षेत्र स्थित दुघरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने भक्तों के दिलों में भक्ति का अलौकिक संचार कर दिया है। श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन (6 मार्च 2026) कथावाचक पंडित सूरज कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब अधर्म की छाया मंडराती है और धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। यह कथा ग्रामीणों के लिए आध्यात्मिक पर्व बन चुकी है, जहां सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना पंडाल में एकत्र हो रहे हैं। गोरखपुर भागवत कथा 2026 के इस आयोजन ने स्थानीय स्तर पर धार्मिक जागरण पैदा कर दिया है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: घंटा-घड़ियाल और पुष्प वर्षा से सराबोर पंडाल
श्रीकृष्ण जी के जन्मोत्सव के अवसर पर कथा पंडाल घंटा-घड़ियाल की गूंज और पुष्प वर्षा से सरोबार हो उठा। “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे हृदयस्पर्शी भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं द्वारा गाए जा रहे सोहर गीत ने श्रद्धालुओं को आनंद के सागर में डुबो दिया। कथा के माध्यम से पंडित जी ने बताया कि मथुरा के कारागार में वसुदेव-देवकी के पुत्र रूप में भगवान का अवतरण कैसे हुआ, जो कंस के अत्याचारों का अंत करने आया। यह प्रसंग सुनकर भक्तों की आंखें नम हो गईं, और नंद बाबा के घर गोविंद के जन्म का चित्रण पूरे गांव में उत्सव का रूप ले लिया। दुघरा गांव श्रीमद्भागवत कथा अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है,
मुख्य यजमान और प्रमुख उपस्थित श्रद्धालु
इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान सतीश सिंह और उनकी पत्नी कुसुमावती सिंह ने कथा का रसपान किया। उनके साथ अनूप सिंह, अनुराग सिंह, कुशाग्र सिंह, राजू सिंह, शैलेश चौरसिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। यजमानों ने कथावाचक को सम्मानित किया और प्रसाद वितरण में योगदान दिया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा का आयोजन गांव के धार्मिक उत्थान के लिए किया गया है, जो सात दिनों तक चलेगा। स्थानीय निवासी इसे उरुवा क्षेत्र की सबसे बड़ी भागवत कथा बता रहे हैं।
