व्यासी पुल की देरी से यात्रियों की परेशानी। डुमरांव (बक्सर) से व्यासी (बायसी, बलिया) तक का सीधा रास्ता मात्र 24 किलोमीटर का होना चाहिए, लेकिन पुल के अभाव में यात्रियों को 80 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, जिससे डुमरांव, बक्सर और बलिया के हजारों लोग प्रभावित हैं। व्यासी पुल का निर्माण रुका हुआ है, जिसकी वजह से व्यापारी, किसान और आम यात्री रोजाना समय और ईंधन की बर्बादी झेल रहे हैं।
वर्तमान डायवर्जन रूट की सच्चाई
पुल न होने से यात्री डुमरांव से होते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाते हैं, जो कुल दूरी को 80 किलोमीटर तक बढ़ा देता है। मुख्य डायवर्जन बक्सर-भागलपुर या गंगा पार रूट से होकर गुजरता है, जिसमें जाम, खराब सड़कें और घंटों की देरी आम बात है। यह स्थिति विशेष रूप से ट्रक चालकों और मालवाहकों के लिए घातक साबित हो रही है, क्योंकि ईंधन खर्च तीन गुना बढ़ जाता है।
निर्माण में देरी के प्रमुख कारण
व्यासी पुल प्रोजेक्ट पर काम 2010 से चर्चा में है, लेकिन जमीन अधिग्रहण, फंडिंग की कमी और पर्यावरण मंजूरी जैसे कारणों से रुका पड़ा है। बिहार सरकार और एनएचएआई की ओर से कई बार सर्वे हुए, लेकिन ठोस प्रगति नहीं हुई। स्थानीय सांसद और विधायक समय-समय पर मांग उठाते रहे, पर केंद्रीय बजट में प्राथमिकता न मिलने से देरी हो रही है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
डुमरांव बाजार और आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था इस देरी से चरमरा गई है। बलिया के व्यापारियों को माल ढोने में अतिरिक्त खर्च, जिससे दाम बढ़ते हैं। किसानों को फसल बाजार तक पहुंचने में समस्या, जबकि पर्यटन और रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एम्बुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं को भी खतरा बना रहता है।
कब पूरा होगा व्यासी पुल का सपना?
अधिकारियों के बयानों के अनुसार, 2026 तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है, यदि बजट आवंटन हो जाए। चरणबद्ध तरीके से पहले नींव और फिर सुपरस्ट्रक्चर का काम होगा, जो कुल 2 वर्ष ले सकता है। जनता की मांग तेज होने पर शायद तेजी आए, लेकिन वर्तमान में कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं हुई।
समाधान के लिए क्या करें यात्री?
तत्काल राहत के लिए डुमरांव एसडीएम कार्यालय या एनएचएआई हेल्पलाइन से डायवर्जन रूट की जानकारी लें। सोशल मीडिया पर #VyasiPulJaldiBanao कैंपेन चलाकर दबाव बनाएं। दीर्घकालिक समाधान में स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क करें।
अन्य पुल परियोजनाओं से सबक
बिहार में राजघाट पुल जैसी मरम्मत से 10-20 किमी चक्कर की समस्या देखी गई, लेकिन समय पर काम पूरा हुआ। इसी तरह व्यासी पुल को प्राथमिकता देकर जल्द हल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर ऐसे प्रोजेक्ट्स से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
भविष्य की उम्मीदें
व्यासी पुल बनने पर 24 किमी रास्ता बहाल होगा, यात्रा समय 1 घंटे घटेगा और आर्थिक विकास को बल मिलेगा। सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत यह पुल गेम-चेंजर साबित होगा। स्थानीय निवासियों को धैर्य रखना होगा, लेकिन एकजुट होकर मांग उठाएं।
निष्कर्ष स्वरूप मांग पत्र
डुमरांव से व्यासी तक 24 किमी पुल का निर्माण तत्काल शुरू करें। 80 किमी यात्रा की यातना समाप्त करें। बिहार-यूपी सरकार से अपील: समयबद्ध प्रोजेक्ट बनाएं। यह न केवल यातायात सुधारेगा, बल्कि क्षेत्र का चेहरा बदल देगा।