लखनऊ यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति दहन दिवस पर छात्रों ने बड़ा जमावड़ा किया और सामाजिक समानता की आवाज बुलंद की। यह कार्यक्रम 25 दिसंबर 2025 को आयोजित हुआ, जहां छात्रों ने मनुस्मृति की प्रतीकात्मक प्रतियां जलाकर जाति व्यवस्था और असमानता का विरोध किया। छात्रों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रेरणा से संविधान की समता, न्याय और बंधुत्व की भावना को याद किया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र शामिल हुए और नारे लगाए – “जाति व्यवस्था मुर्दाबाद”, “संविधान जिंदाबाद”। छात्र नेताओं ने कहा कि मनुस्मृति असमानता और भेदभाव का प्रतीक है, जबकि संविधान समानता का दस्तावेज।
यह दिवस 1927 के महाड़ सत्याग्रह की याद में मनाया जाता है, जब डॉ. आंबेडकर ने मनुस्मृति जलाई थी। लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों ने सेमिनार, चर्चा और प्रदर्शन आयोजित किया। छात्रों ने कहा कि आज भी जाति भेदभाव समाज में है और संविधान की रक्षा जरूरी है। कार्यक्रम में दलित, बहुजन और प्रगतिशील छात्रों की भागीदारी थी। छात्रों ने मांग की कि शिक्षा में समानता हो और जाति आधारित भेदभाव खत्म हो। यह आयोजन युवाओं में सामाजिक न्याय की जागरूकता फैला रहा है। यूनिवर्सिटी कैंपस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ और पुलिस मौजूद रही। छात्रों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया। यह दिवस सामाजिक समता का पर्व है और असमानता के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक।
छात्रों ने कहा कि डॉ. आंबेडकर की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है। यह कार्यक्रम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग समर्थन दे रहे हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी में ऐसा आयोजन पहली बार बड़े स्तर पर हुआ। छात्रों ने अपील की कि समाज जाति से ऊपर उठे। यह दिवस संविधान में आस्था रखने वालों का पर्व है। इस ब्लॉग में हम कार्यक्रम की डिटेल्स, छात्रों की आवाज, महत्व और संदेश बताएंगे। सामाजिक समता की लड़ाई जारी रहे।
कार्यक्रम का विवरण: छात्रों का जमावड़ा
लखनऊ यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति दहन दिवस पर कार्यक्रम हुआ। मुख्य हाइलाइट्स:
- सैकड़ों छात्र शामिल।
- प्रतीकात्मक मनुस्मृति दहन।
- नारे और प्रदर्शन।
- डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि।
- संविधान प्रस्तावना पाठ।
- सेमिनार और चर्चा।
- शांतिपूर्ण आयोजन।
यह जमावड़ा सामाजिक समता का संदेश दे रहा है।
छात्रों की आवाज: जाति व्यवस्था के खिलाफ
छात्रों ने बुलंद आवाज उठाई:
- जाति भेदभाव मुर्दाबाद।
- संविधान जिंदाबाद।
- असमानता खत्म हो।
- शिक्षा में समानता।
- दलित-बहुजन अधिकार।
- युवा जागरूकता।
- आंबेडकर विचारधारा।
*छात्रों ने कहा कि असमानता आज भी है।
मनुस्मृति दहन का इतिहास: आंबेडकर प्रेरणा
यह दिवस 1927 से:
- महाड़ सत्याग्रह।
- डॉ. आंबेडकर नेतृत्व।
- मनुस्मृति दहन।
- अस्पृश्यता विरोध।
- समानता की लड़ाई।
- सामाजिक क्रांति।
- संविधान आधार।
यह इतिहास प्रेरणा देता है।
महत्व: सामाजिक समता का पर्व
मनुस्मृति दहन दिवस क्यों महत्वपूर्ण:
- संविधान में आस्था।
- असमानता विरोध।
- युवा जागरण।
- दलित-बहुजन एकता।
- समान समाज मांग।
- आंबेडकर विरासत।
- लोकतंत्र मजबूत।
यह पर्व समता का है।
प्रतिक्रियाएं: समर्थन और चर्चा
कार्यक्रम पर प्रतिक्रियाएं:
- छात्र उत्साहित।
- सोशल मीडिया वायरल।
- समर्थन कमेंट्स।
- विपक्ष चुप।
- यूनिवर्सिटी चर्चा।
- युवा प्रेरित।
- समाजिक बहस।
