राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। धान की रोपाई के बाद फसल को पर्याप्त पानी की जरूरत के बीच बनकटी माइनर में पानी नहीं पहुंचने से क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। बनकटी माइनर से जुड़े गांवों में धान की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंचने का किसानों ने आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहर में पानी नहीं पहुंचा तो सैकड़ों एकड़ धान की फसल प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों के मुताबिक सरयू पंप कैनाल बरानगर की मुख्य शाखा से बनगांव-अकोल्हा के बीच से निकलने वाली बनकटी माइनर अलीपुर, नसीरपुर, रामालखना, भवानीपुर, समदपुर होते हुए बनकटी तक जाती है। इस माइनर से आसपास के कई गांवों के किसानों को धान की फसल की सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस समय टेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है।

नहर में झाड़-झंखाड़ और घास-फूस से बाधित हो रहा पानी का बहाव
किसानों का आरोप है कि बनकटी माइनर की लंबे समय से समुचित सफाई नहीं कराई गई है। नहर के दोनों किनारों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, जबकि नहर के अंदर भी जगह-जगह घास-फूस जमा है। ग्रामीणों के अनुसार इससे नहर की जलधारण और पानी के बहाव की क्षमता प्रभावित हो रही है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल इस समय पानी के लिए पूरी तरह नहर पर निर्भर है। ऐसे में यदि माइनर की सफाई और पानी के सुचारु प्रवाह की व्यवस्था नहीं की गई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
जेई ने किसानों द्वारा नहर काटे जाने की बताई वजह
मामले को लेकर जब विभागीय जेई से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ किसान बीच में नहर काट देते हैं, जिसके चलते पानी का दबाव कम हो जाता है और आगे तक पानी नहीं पहुंच पाता। जेई के अनुसार फिलहाल मामले को दिखवाया जा रहा है।
नहर की सफाई को लेकर जेई ने बताया कि माइनर की सफाई सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में कराई जाती है। हालांकि किसानों का कहना है कि मौजूदा समय में धान की फसल को पानी की तत्काल जरूरत है और विभाग को समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
किसानों ने नहर की खुदाई और लेवलिंग पर उठाए सवाल
स्थानीय ग्रामीण पारस यादव, गंगा प्रसाद, नागेंद्र यादव और नरसिंह समेत अन्य किसानों का कहना है कि नहर की खुदाई जेसीबी से कराई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक खुदाई के बाद नहर कई जगह समतल नहीं रह गई है और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। किसानों का आरोप है कि इन गड्ढों के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित होता है और आगे तक पानी पहुंचने में परेशानी आती है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि माइनर में जगह-जगह रैट होल होने के कारण पानी का रिसाव हो रहा है। इसके अलावा किसानों का सबसे बड़ा आरोप माइनर के लेवल को लेकर है। उनका कहना है कि हेड की अपेक्षा टेल की तरफ माइनर ऊंची होने के कारण पानी अंतिम छोर तक नहीं चढ़ पाता।
कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं
किसानों के अनुसार बनकटी माइनर में पानी की समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि हर बार समस्या सामने आने के बाद कुछ समय के लिए आश्वासन मिलता है, लेकिन नहर की सफाई, गहरी खुदाई, लेवलिंग और पानी के समान वितरण की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की स्थिति ठीक नहीं की गई तो धान की फसल को नुकसान होने के साथ-साथ उनकी पूरी कृषि लागत भी प्रभावित हो सकती है।
जिला प्रशासन से किसानों की बड़ी मांग
बनकटी माइनर से जुड़े किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों की मांग है कि माइनर की तत्काल सफाई कराई जाए, झाड़-झंखाड़ और घास-फूस हटाई जाए तथा जरूरत के अनुसार नहर की गहरी खुदाई और लेवलिंग कराई जाए।
इसके साथ ही किसानों ने नहर में पानी के रिसाव वाले स्थानों की मरम्मत और टेल तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद होने का खतरा है।
किसानों का सवाल—आखिर टेल तक कब पहुंचेगा पानी?
बनकटी माइनर की समस्या ने सिंचाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि नहर का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना है, लेकिन यदि टेल के किसानों को ही पानी नहीं मिलेगा तो वे धान की फसल कैसे बचा पाएंगे। अब किसानों की निगाहें सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और विभागीय पक्ष को उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित विभाग की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर स्थिति में बदलाव संभव है।