🔱 शिव-पार्वती के परम प्रेम की अद्भुत कथा, आचार्य विनोद बोले- संसार में शायद ही कोई पति अपनी पत्नी से इतना प्रेम करता हो

देवकली के पृथ्वीनाथ शिव मंदिर परिसर में चल रही शिव महापुराण कथा, श्रद्धालुओं ने लिया कथा का रसपान

गोरखपुर। गोला विकासखंड के देवकली (कुड़वाआम) स्थित पृथ्वीनाथ शिव मंदिर परिसर में चल रही शिव महापुराण कथा में शुक्रवार को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया गया। अयोध्या से पधारे कथा व्यास आचार्य विनोद जी महाराज ने व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को भगवान शिव के वैरागी स्वरूप के साथ-साथ उनके परम प्रेममय पति रूप से परिचित कराया। कथा के दौरान शिव-पार्वती के प्रेम प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

महादेव का वैरागी स्वरूप, फिर भी प्रेम के सागर हैं शिव

आचार्य विनोद जी महाराज ने कहा कि देवाधिदेव भगवान शिव को सामान्य तौर पर वैरागी स्वरूप में देखा जाता है। भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर माना गया है और उन्हें अक्सर समाधि की मुद्रा में दर्शाया जाता है। भगवान शिव श्मशान में भी वास करते हैं, इसलिए उनका स्वरूप संसार के अन्य देवी-देवताओं से बिल्कुल अलग दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव के तीसरे नेत्र का उल्लेख होते ही उनके रौद्र स्वरूप की याद आती है। मान्यता है कि जब भगवान शिव अपना तीसरा नेत्र खोलते हैं तो संहार का स्वरूप प्रकट होता है। इसी रौद्र रूप के कारण उन्हें रुद्र भी कहा जाता है।

कामदेव को भस्म करने की कथा का किया वर्णन

कथा व्यास ने भगवान शिव और कामदेव से जुड़ी कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान शिव को सांसारिक भावनाओं से जोड़ने और उनके भीतर प्रेम का भाव जगाने के लिए कामदेव को भेजा गया, तब भगवान शिव क्रोधित हो गए और उनके तीसरे नेत्र से निकली अग्नि में कामदेव भस्म हो गए।

आचार्य विनोद जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव के इसी क्रोधी और रौद्र स्वरूप के कारण उन्हें रुद्र कहा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि महादेव के व्यक्तित्व में जहां एक ओर वैराग्य और रौद्रता दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर उनके भीतर करुणा, सरलता और प्रेम की भावना भी उतनी ही गहरी है।

भोलेनाथ के रूप में भगवान शिव का सरल और सहज स्वरूप

आचार्य विनोद जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव को उनके सरल, सहज और भोले स्वभाव के कारण भोलेनाथ भी कहा जाता है। महादेव अपने भक्तों की श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि भगवान शिव की भक्ति को सहज और सरल माना जाता है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव के व्यक्तित्व का एक ऐसा पक्ष भी है, जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। वह है उनका परम प्रेम स्वरूप पति रूप।

शिव-पार्वती की प्रेम कथा का सुनाया अद्भुत प्रसंग

कथा के दौरान आचार्य विनोद जी महाराज ने भगवान शिव और

माता पार्वती के दांपत्य प्रेम का विशेष रूप से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि शिव और पार्वती का संबंध केवल देवी-देवता के रूप में पूजनीय नहीं है,

बल्कि यह प्रेम, विश्वास, समर्पण और दांपत्य जीवन की गहराई को भी दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपनी पत्नी माता पार्वती से अत्यंत प्रेम करते हैं और

उनकी बात को कभी टालते नहीं हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की प्रेम कथा में

पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान, विश्वास और समर्पण का सुंदर संदेश मिलता है।

“शिव-पार्वती का प्रेम संसार के लिए आदर्श”

आचार्य विनोद जी महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि शिव-पार्वती का

संबंध केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक जीवन के लिए भी प्रेरणा देता है।

दांपत्य जीवन में प्रेम के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव को जहां एक ओर तपस्वी और वैरागी माना जाता है,

वहीं माता पार्वती के प्रति उनका प्रेम उनके व्यक्तित्व के दूसरे अत्यंत सुंदर पक्ष को सामने लाता है। यही कारण है कि

शिव-पार्वती का प्रेम भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है।

आरती के साथ हुआ कथा का शुभारंभ

शिव महापुराण कथा के कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी सचिन दुबे ने व्यास पीठ की आरती कर किया।

इसके बाद कथा व्यास आचार्य विनोद जी महाराज ने शिव महापुराण के

प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, प्रेम और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया।

कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्तों ने श्रद्धापूर्वक शिव महापुराण कथा का श्रवण किया।

पूरे परिसर में भगवान शिव के जयकारों और भक्ति भाव का वातावरण बना रहा।

कथा में मौजूद रहे ये श्रद्धालु

इस अवसर पर प्रमुख रूप से भवानी प्रसाद दुबे, धरणीधर दुबे, रमेश दुबे, श्याम देव यादव, प्रभाकर दुबे,

गौरीशंकर मौर्य, वीरेंद्र दुबे, कोमल दुबे और बरखू सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

देवकली के पृथ्वीनाथ शिव मंदिर परिसर में चल रही शिव महापुराण कथा को

लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। कथा के माध्यम से भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों,

उनकी लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है।

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