उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) अली मुस्तफा और उनके परिवार के साथ कथित मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आगरा-अलीगढ़ हाईवे पर खंदौली क्षेत्र में कार और बाइक की टक्कर के बाद शुरू हुआ विवाद हिंसक हो गया। आरोप है कि बाइक सवार युवक ने अपने 30 से 40 साथियों को बुला लिया। इसके बाद न्यायिक अधिकारी, उनके पिता और सरकारी गनर के साथ मारपीट की गई। हमलावरों पर कार का पिछला शीशा तोड़ने, परिवार को जान से मारने की धमकी देने और वाहन में आग लगाने की कोशिश करने का भी आरोप है।
घटना 24 अक्टूबर 2026 की बताई जा रही है। मामले में शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक नामजद आरोपी और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
आगरा-अलीगढ़ हाईवे पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ न्यायालय की कोर्ट संख्या पांच में तैनात अपर जिला जज अली मुस्तफा अपने परिवार और गनर के साथ यात्रा कर रहे थे। उनके साथ उनके पिता गुलाम मुस्तफा और मां भी मौजूद थीं। बताया गया है कि वे लखनऊ से अलीगढ़ लौट रहे थे।
यमुना एक्सप्रेस-वे के खंदौली इंटरचेंज से उतरने के बाद उनकी कार आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर पहुंची। इसी दौरान खंदौली क्षेत्र के मई चौराहे पर जवाहर इंटर कॉलेज के सामने एक बाइक सवार ने कथित तौर पर उनकी कार में टक्कर मार दी। टक्कर से कार क्षतिग्रस्त हो गई।
इसके बाद न्यायिक अधिकारी ने वाहन रुकवाकर बाइक सवार को सावधानी से गाड़ी चलाने के लिए समझाया। शिकायत के मुताबिक, इसी बात को लेकर युवक नाराज हो गया और उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर युवक ने अपने परिचितों को फोन करके मौके पर बुला लिया।
कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। इसके बाद मामला सड़क पर हुए सामान्य विवाद से आगे बढ़कर कथित मारपीट में बदल गया।
30 से 40 लोगों को बुलाकर मारपीट का आरोप
अपर जिला जज की शिकायत के अनुसार, मौके पर पहुंचे लोगों ने उनके साथ-साथ उनके पिता और सरकारी गनर से भी मारपीट की। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
आरोप है कि हमलावरों ने न्यायिक अधिकारी और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान उनके पिता गुलाम मुस्तफा को चोटें आईं। शिकायत में उनकी नाक और दोनों हाथों की कलाइयों में चोट लगने की बात कही गई है।
घटना के समय न्यायिक अधिकारी के साथ सुरक्षाकर्मी मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद कथित हमले की स्थिति पैदा होने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका और मारपीट के आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
कार का शीशा तोड़ा, आग लगाने की कोशिश का आरोप
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू कार में तोड़फोड़ और आग लगाने की कथित कोशिश है। शिकायत के मुताबिक, हमलावरों ने वाहन को निशाना बनाया और कार का पिछला शीशा तोड़ दिया।
आरोप है कि मुख्य आरोपी भूपेंद्र ने हेलमेट या किसी अन्य वस्तु से कार पर प्रहार किया। इसके साथ ही वाहन में आग लगाने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
स्थिति बिगड़ती देखकर अपर जिला जज ने किसी तरह अपनी कार वहां से निकालने का प्रयास किया। बताया गया है कि वे अपने परिवार और गनर के साथ मौके से निकलने में सफल रहे।
न्यायिक अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए
डायल 112 पर कॉल किया था, लेकिन मौके पर तत्काल सहायता नहीं मिली। इसके बाद
उन्होंने संबंधित थाना प्रभारी को फोन करके पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
पुलिस सहायता मिलने में कथित देरी के मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और घटनाक्रम की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल इस संबंध में शिकायतकर्ता के आरोपों को जांच के अधीन ही माना जाना चाहिए।
भूपेंद्र समेत 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा
मामले में पुलिस ने अपर जिला जज की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है।
इसमें हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी भूपेंद्र को नामजद किया गया है।
इसके अलावा लगभग 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने खुद को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का जवान बताया था।
हालांकि, उसकी सेवा संबंधी स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
पुलिस के अनुसार, घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए
सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह के मुताबिक,
शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
आरोपियों को चिह्नित करने और गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है।
जांच के दौरान घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान, आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग,
वाहन को हुए नुकसान और चोटों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर सवाल
आगरा की इस घटना ने सड़क पर होने वाले विवादों के हिंसक रूप लेने और
आपातकालीन पुलिस सहायता की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामूली टक्कर के बाद कथित तौर पर बड़ी संख्या में लोगों का जुटना और
एक न्यायिक अधिकारी के परिवार के साथ मारपीट का आरोप चिंता का विषय है।
यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ
कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही डायल 112 पर सूचना देने के बाद सहायता
पहुंचने में देरी के आरोप की भी तथ्यात्मक जांच जरूरी है।
फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. यूपी में अपर जिला जज पर हमला कहां हुआ?
यह घटना उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के खंदौली क्षेत्र में आगरा-अलीगढ़ हाईवे पर
मई चौराहे के पास हुई बताई गई है।
2. अपर जिला जज का नाम क्या है?
इस मामले में अलीगढ़ न्यायालय में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अली मुस्तफा का नाम सामने आया है।
3. हमले में किन लोगों के साथ मारपीट का आरोप है?
शिकायत के अनुसार, अपर जिला जज अली मुस्तफा, उनके पिता गुलाम मुस्तफा और
उनके साथ मौजूद सरकारी गनर के साथ मारपीट की गई।
4. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने भूपेंद्र और 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। सीसीटीवी फुटेज के
आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: आगरा के खंदौली क्षेत्र में अपर जिला जज और उनके परिवार के
साथ कथित मारपीट का मामला गंभीर है। कार में तोड़फोड़,
आग लगाने की कोशिश और पुलिस सहायता में देरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब सभी की नजर पुलिस की जांच और आरोपियों के खिलाफ होने वाली आगे की कार्रवाई पर है।
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