राकेश शर्मा की रिपोर्ट
उरुवा, गोरखपुर | मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
गोरखपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उरुवा में दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण को लेकर ब्लॉक स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.पी. तिवारी ने स्वास्थ्यकर्मियों को घर-घर जागरूकता बढ़ाने, छूटे बच्चों का टीकाकरण कराने और किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
मुख्य समाचार
गोरखपुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) उरुवा के मीटिंग हॉल में मंगलवार को दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण की तैयारियों एवं प्रगति की समीक्षा के लिए ब्लॉक स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.पी. तिवारी ने की। इसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को संचारी रोगों की रोकथाम, टीकाकरण से वंचित बच्चों तक पहुंचने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में डॉ. जे.पी. तिवारी ने कहा कि दस्तक अभियान का प्रमुख उद्देश्य लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक करना और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाना है। उन्होंने बताया कि केवल बीमारी होने के बाद इलाज कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि साफ-सफाई, सावधानियों, समय पर पहचान और उचित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बीमारियों की रोकथाम करना भी जरूरी है। नियमित टीकाकरण भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
घर-घर पहुंचकर लोगों को जागरूक करेंगी स्वास्थ्य टीमें
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने एएनएम को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के साथ समन्वय बनाकर घर-घर भ्रमण करें। इस दौरान परिवारों को संचारी रोगों के लक्षण, बचाव के उपाय और समय पर उपचार कराने के महत्व की जानकारी दी जाए।
उन्होंने विशेष रूप से उन बच्चों की पहचान करने पर जोर दिया, जो किसी कारणवश नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए हैं।
ऐसे बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
अभियान के दौरान परिवारों से संपर्क कर टीकाकरण की स्थिति की जानकारी लेने और जरूरतमंद बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
मच्छर और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों पर जागरूकता
बैठक में मच्छर जनित और जल जनित बीमारियों की रोकथाम को भी प्रमुखता से उठाया गया।
स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया गया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मच्छरों से बचाव,
घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने, स्वच्छ पेयजल के इस्तेमाल और साफ-सफाई के महत्व के बारे में जागरूक करें।
इसके साथ ही फाइलेरिया और कुष्ठ रोग के प्रति भी लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों से कहा गया कि वे लोगों को बीमारियों के संभावित लक्षणों की जानकारी दें।
किसी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के लिए प्रेरित करें।
समय पर जांच और उपचार मिलने से बीमारी की पहचान करने तथा उसके प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
किशोरियों के HPV टीकाकरण पर विशेष जोर
बैठक में एचपीवी (HPV) वैक्सीन को लेकर भी चर्चा हुई।
डॉ. तिवारी ने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि वे पात्र किशोरियों और उनके अभिभावकों को इस टीके के महत्व की जानकारी दें। उन्होंने 14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी और 15 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों के टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
एचपीवी टीकाकरण इस बीमारी के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसलिए पात्र किशोरियों तक सही जानकारी पहुंचाना और टीकाकरण के संबंध में अभिभावकों की शंकाओं का समाधान करना जरूरी है।
स्वास्थ्यकर्मियों से कहा गया कि वे लोगों को टीकाकरण से संबंधित प्रमाणित जानकारी दें तथा पात्रता, उपलब्धता और टीकाकरण की प्रक्रिया के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
अभियान की सफलता के लिए आपसी समन्वय जरूरी
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
आशा कार्यकर्त्रियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और एएनएम की संयुक्त भागीदारी से घर-घर तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बीमारी के लक्षणों की अनदेखी न करने, समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता है।
उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी को मजबूत करना है।
समुदाय के स्तर पर बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को गति देना रहा।
बैठक में ये अधिकारी और कर्मचारी रहे उपस्थित
बैठक में एआरओ अखिलेश पाठक, बीपीएम अवनीश श्रीवास्तव, बीसीपीएम नवनीत सिंह और स्वास्थ्य विभाग
जुड़ी सविता यादव, अंकिता, शारदा, प्रेमलता राय, बादामी देवी, रानी, शिखा, अनुराधा, रीना, निशा, शिफा, काजल, राधारानी, रविता, कुसुम पासवान,सतीमा, अंजली, शिखा गौड़, सुधा भारती और सुमित्रा सहित सभी एएनएम उपस्थित रहीं।
इसके अलावा बीएचडब्ल्यू सत्यपाल सिंह भी बैठक में मौजूद रहे।
महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारी
- बैठक का स्थान: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उरुवा, गोरखपुर।
- बैठक की अध्यक्षता: प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.पी. तिवारी।
- मुख्य विषय: दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण।
- प्रमुख निर्देश: टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान और टीकाकरण सुनिश्चित करना।
- जागरूकता के विषय: मच्छर जनित रोग, जल जनित रोग, फाइलेरिया और कुष्ठ रोग।
- विशेष जोर: पात्र किशोरियों में एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूकता।
- समन्वय: एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के संयुक्त प्रयास।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. उरुवा पीएचसी में समीक्षा बैठक क्यों आयोजित की गई?
दस्तक अभियान और नियमित टीकाकरण की समीक्षा करने तथा स्वास्थ्यकर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश देने के लिए बैठक आयोजित की गई।
2. दस्तक अभियान का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संभावित लक्षणों की समय पर पहचान में मदद करना और बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।
3. बैठक में एएनएम को क्या निर्देश दिए गए?
एएनएम को आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के साथ घर-घर भ्रमण करने,छूटे बच्चों का टीकाकरण कराने और विभिन्न बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
4. एचपीवी वैक्सीन क्यों महत्वपूर्ण है?
एचपीवी वैक्सीन कुछ प्रकार के ह्यूमन पैपिलोमावायरस संक्रमण से बचाव करती है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं।
टीकाकरण की पात्रता और समय के लिए स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेनी चाहिए।
5. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर क्या करना चाहिए?
लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच व उपचार कराएं।
निष्कर्ष
पीएचसी उरुवा में आयोजित समीक्षा बैठक में दस्तक अभियान,
नियमित टीकाकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से छूटे बच्चों तक टीकाकरण
सेवाएं पहुंचाने और संचारी रोगों की रोकथाम को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।