यूपी के पीएमश्री स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई होगी आसान, लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी से बढ़ेगा सीखने का अनुभव

उत्तर प्रदेश के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक गतिविधि आधारित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य के पीएमश्री योजना के तहत संचालित प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी उपलब्ध कराने की तैयारी है। इस पूरी व्यवस्था के लिए 11.37 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को अतिरिक्त सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों को अधिक रोचक, सरल और व्यवहारिक बनाना है। नई व्यवस्था में बच्चों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके माध्यम से वे देखकर, करके और अभ्यास के जरिए विषयों को आसानी से समझ सकें।

पीएमश्री स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

नई व्यवस्था का लाभ पीएमश्री योजना के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को मिलेगा। इन कक्षाओं में बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत करने और सीखने की गति बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में शुरुआती कक्षाओं को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी स्तर पर बच्चों में पढ़ने, लिखने, गणितीय समझ और आसपास की दुनिया को समझने की आधारभूत क्षमता विकसित होती है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों के साथ गतिविधि आधारित सामग्री का इस्तेमाल बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बना सकता है।

सरकार की ओर से स्कूलों को ऐसी शिक्षण-अधिगम सामग्री के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो बच्चों को केवल रटने के बजाय विषय की अवधारणा समझने में मदद करे। इसके लिए शिक्षकों को भी विषय और पाठ के अनुरूप टीएलएम यानी Teaching Learning Material तैयार करने तथा उसका प्रयोग करने पर जोर दिया गया है।

लर्निंग किट में क्या-क्या सामग्री होगी?

विद्यार्थियों को दी जाने वाली लर्निंग किट को बच्चों की उम्र और सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। इसमें पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी शामिल होगी।

रिपोर्ट के अनुसार किट में वर्कशीट, अभ्यास और गतिविधि आधारित सामग्री, रंगीन वर्कबुक, ड्राइंग शीट, ओरिगेमी पेपर, ऊन, रिबन और लर्निंग डाइस जैसी वस्तुएं शामिल होंगी। इन सामग्रियों के माध्यम से बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों में शामिल कर सीखने को अधिक रोचक बनाया जा सकेगा।

वहीं कक्षा शिक्षण को मजबूत करने के लिए स्कूलों में कार्ड बोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, पेपर एडहेसिव, अबेकस, ग्लोब, भारत और विश्व के मानचित्र, कठपुतलियां तथा परिवहन एवं पशु-पक्षियों से जुड़े चार्ट जैसी सामग्री भी उपलब्ध कराने की योजना है।

इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि शिक्षक किसी विषय को केवल बोर्ड पर समझाने के बजाय मॉडल, चार्ट या गतिविधि के माध्यम से बच्चों के सामने प्रस्तुत कर सकें।

निपुण लक्ष्य और साप्ताहिक आकलन पर भी रहेगा जोर

पीएमश्री स्कूलों में बच्चों की सीखने की प्रगति को बेहतर ढंग से समझने के लिए निपुण लक्ष्य पोस्टर, तालिका पोस्टर, शिक्षण-अधिगम से जुड़ी IEC सामग्री और साप्ताहिक आकलन ट्रैकर की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।

साप्ताहिक आकलन का उद्देश्य बच्चों की प्रगति को नियमित रूप से समझना और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त अभ्यास कराना हो सकता है। इससे शिक्षकों को यह पहचानने में सहायता मिलेगी कि किसी विद्यार्थी को किस विषय या अवधारणा में अधिक सहयोग की आवश्यकता है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस व्यापक दृष्टिकोण से भी जुड़ती है, जिसमें बच्चों के लिए अनुभवात्मक, गतिविधि आधारित और आनंदपूर्ण सीखने के वातावरण पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार के अनुसार पीएमश्री स्कूलों का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और आनंदपूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाना है।

अभिभावकों की मौजूदगी में भी बांटी जा सकती है किट

लर्निंग किट के वितरण को लेकर भी व्यवस्था तय की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक किट वितरण के लिए विशेष पंजिका तैयार की जाएगी और

सामग्री प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी या अभिभावक के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। इसके अलावा

अभिभावकों की मौजूदगी में पीटीएम के दौरान भी किट वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्टूडेंट डायरी मिलने से बच्चों की पढ़ाई और स्कूल से संबंधित गतिविधियों को

व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में भी मदद मिल सकती है। अभिभावक डायरी के माध्यम से बच्चे की

स्कूल संबंधी गतिविधियों और पढ़ाई से जुड़े जरूरी अपडेट पर नजर रख सकेंगे।

इस पूरी व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना

निदेशक मोनिका रानी की ओर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

शुरुआती कक्षाओं में बच्चे गतिविधियों और दृश्य सामग्री के जरिए कई अवधारणाओं को अपेक्षाकृत

आसानी से समझते हैं। ऐसे में लर्निंग किट उन्हें कक्षा की पढ़ाई से जोड़ने का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकती है।

उदाहरण के तौर पर गणित में अबेकस या लर्निंग डाइस जैसी

सामग्री बच्चों को संख्याओं और गणना को समझने में मदद कर सकती है। वहीं ड्राइंग और ओरिगेमी

जैसी गतिविधियां रचनात्मकता बढ़ाने के साथ बच्चों की बारीक मोटर स्किल को विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।

इसी तरह नक्शे, चार्ट और कठपुतलियों जैसी सामग्री सामाजिक विज्ञान, भाषा और

पर्यावरण से जुड़े विषयों को समझाने में उपयोगी हो सकती है।

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश के पीएमश्री विद्यालयों में लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी

उपलब्ध कराने की पहल का लक्ष्य बच्चों के लिए पढ़ाई को अधिक रोचक, गतिविधि आधारित और उपयोगी बनाना है।

यदि इन सामग्रियों का नियमित और प्रभावी इस्तेमाल कक्षा में किया जाता है, तो इसका असर

बच्चों की सीखने की प्रक्रिया और बुनियादी शैक्षिक दक्षताओं पर देखने को मिल सकता है।

FAQ: पीएमश्री स्कूल लर्निंग किट से जुड़े सवाल

सवाल 1: यूपी के पीएमश्री स्कूलों में लर्निंग किट किसे मिलेगी?
जवाब: पीएमश्री योजना के तहत आने वाले प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा

1 से 5 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट लर्निंग किट की व्यवस्था की जा रही है।

सवाल 2: लर्निंग किट में क्या-क्या मिलेगा?
जवाब: किट में वर्कशीट, गतिविधि आधारित सामग्री, रंगीन वर्कबुक, ड्राइंग शीट,

ओरिगेमी पेपर, ऊन, रिबन और लर्निंग डाइस जैसी सामग्री शामिल होगी।

सवाल 3: लर्निंग किट और डायरी के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ है?
जवाब: इस पहल के लिए 11.37 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

सवाल 4: क्या अभिभावकों की मौजूदगी में किट बांटी जा सकती है?
जवाब: हां। निर्देशों के अनुसार पीटीएम के दौरान अभिभावकों की मौजूदगी में भी

लर्निंग किट वितरित करने की व्यवस्था की जा सकती है।

वितरण के बाद विद्यार्थी या अभिभावक के हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।

निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश में पीएमश्री स्कूलों की शुरुआती कक्षाओं के बच्चों के लिए यह पहल पढ़ाई को

किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे गतिविधियों और

अभ्यास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लर्निंग किट,

टीएलएम, साप्ताहिक आकलन और स्टूडेंट डायरी के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को

अधिक व्यवस्थित और सहभागी बनाने की कोशिश की जा रही है।

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