भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, रूस को पीछे छोड़कर दुनिया में चौथे नंबर पर पहुंचा

नई दिल्ली। भारत की आर्थिक ताकत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक सप्ताह के दौरान ऐसी जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 785.71 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इस उछाल के साथ भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़ दिया है और अब वह दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

एक सप्ताह में करीब 45 अरब डॉलर का इजाफा

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 44.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले 28 अगस्त को विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 740.8 अरब डॉलर था।

एक ही सप्ताह में हुई यह वृद्धि अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। इससे भारत का कुल रिजर्व पहली बार करीब 786 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार में इस तेज उछाल ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मजबूत किया है।

रूस को पछाड़कर भारत बना चौथा सबसे बड़ा रिजर्व धारक

विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत ने अब रूस को पीछे छोड़ दिया है। रूस का अंतरराष्ट्रीय रिजर्व करीब 753.5 अरब डॉलर बताया गया है, जबकि भारत का भंडार 785.71 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

इस बदलाव के बाद वैश्विक रैंकिंग में भारत चौथे स्थान पर आ गया है। भारत से आगे चीन, जापान और स्विट्जरलैंड हैं। इस तरह भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास 750 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों ने बढ़ाया कुल रिजर्व

भारत के रिजर्व में हुई इस जबरदस्त बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की

अहम भूमिका रही। संबंधित आंकड़ों के अनुसार सप्ताह के दौरान

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में लगभग 47.4 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।

वहीं, इसी अवधि में भारत के स्वर्ण भंडार के मूल्य में करीब 2.6

अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई

बड़ी बढ़ोतरी के कारण कुल रिजर्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

लगातार दसवें सप्ताह बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार

भारत के लिए यह उपलब्धि केवल एक सप्ताह की तेजी तक सीमित नहीं है।

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कई सप्ताह से वृद्धि देखने को मिल रही है। ताजा

आंकड़ों के साथ रिजर्व में लगातार दसवें सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई।

लगातार बढ़ता रिजर्व भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला संकेत माना जाता है।

इससे देश को वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के समय अतिरिक्त मजबूती मिलती है।

आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ा भारत का रिजर्व?

विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस असाधारण बढ़ोतरी के पीछे विदेशी

मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाने के लिए किए गए विशेष उपायों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RBI की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने से जुड़े कदमों के बाद बैंकों के माध्यम से

विदेशों से डॉलर की उपलब्धता बढ़ी। इसमें गैर-निवासी भारतीयों से

जुड़ी विदेशी मुद्रा जमा और विदेशी मुद्रा उधारी जैसे माध्यमों की भी भूमिका रही।

यही वजह है कि इस बार रिजर्व में बढ़ोतरी सामान्य बाजार गतिविधियों की तुलना में काफी अधिक दिखाई दी है।

भारत के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार क्यों जरूरी है?

किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होने से देश को

अंतरराष्ट्रीय भुगतान, आयात और विदेशी दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलती है।

भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

खासकर कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय खरीद के लिए डॉलर की जरूरत होती है।

ऐसे में बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक दबावों से निपटने की क्षमता बढ़ाता है।

रुपये पर दबाव के समय भी काम आता है रिजर्व

विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल मुद्रा बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है।

यदि किसी समय रुपये पर अचानक दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक बाजार में विदेशी मुद्रा की

उपलब्धता के जरिए अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित करने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि यह जरूरी नहीं है कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से रुपया सीधे मजबूत ही हो जाए।

रुपये की दिशा पर कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक डॉलर की स्थिति,

पूंजी प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम जैसे कई कारक असर डालते हैं।

रिकॉर्ड रिजर्व के साथ एक अहम सावधानी भी

विदेशी मुद्रा भंडार में हुई बड़ी बढ़ोतरी को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है,

लेकिन इसके स्रोत को समझना भी जरूरी है। विदेशी मुद्रा जमा और उधारी के जरिए आने वाली

रकम का एक हिस्सा भविष्य में संबंधित दायित्वों के साथ जुड़ा रहता है।

इसलिए किसी देश की वित्तीय ताकत का आकलन केवल कुल विदेशी मुद्रा

भंडार देखकर नहीं किया जाता। रिजर्व की संरचना, विदेशी देनदारियां, पूंजी प्रवाह और

भुगतान संतुलन जैसे पहलुओं को भी साथ में देखना जरूरी होता है।

भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर तक पहुंचना देश की

बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से अहम उपलब्धि है। रूस को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंचने से

भारत की वैश्विक आर्थिक तस्वीर में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी पूंजी का प्रवाह किस दिशा में रहता है,

रुपये की स्थिति कैसी रहती है और विदेशी

मुद्रा भंडार में यह तेजी कितनी टिकाऊ साबित होती है। फिलहाल इतना जरूर है कि

रिकॉर्ड साप्ताहिक बढ़ोतरी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एक नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा दिया है।

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