लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार के मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। मुलाकात के बाद संजय निषाद के बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।
संजय निषाद ने इस मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार भेंट बताया। उनके मुताबिक माता प्रसाद पांडेय उनके पुराने साथी और मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांडेय की तबीयत के बारे में जानकारी लेने के लिए वह उनसे मिलने पहुंचे थे।
निषाद समाज के मुद्दों को लेकर दिया बयान
मुलाकात के बाद संजय निषाद ने कहा कि उनकी राजनीति का प्रमुख केंद्र निषाद समाज के हित और उससे जुड़े लंबित मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी निषाद समाज की समस्याओं के समाधान के लिए साथ खड़ा होगा, वह उसके साथ रहने की बात पर विचार करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि निषाद समाज की कई मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं और इन विषयों को भाजपा नेतृत्व के सामने रखा जा चुका है। उनके बयान में समाज से जुड़े मुद्दों के समाधान और सरकार से संबंधित मामलों में सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर क्या बोले संजय निषाद?
सपा के साथ संभावित गठबंधन से जुड़े सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि यदि भाजपा उनके लिए अपने दरवाजे बंद करती है तो इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भाजपा ऐसा क्यों करेगी और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन से भाजपा को कई स्थानों पर राजनीतिक लाभ मिलने की बात कही।
इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, संजय निषाद की ओर से इस मुलाकात को सीधे तौर पर किसी नए गठबंधन की घोषणा के रूप में पेश नहीं किया गया है।
माता प्रसाद पांडेय से क्यों हुई मुलाकात?
संजय निषाद के अनुसार, माता प्रसाद पांडेय उनके पुराने परिचित हैं और उनकी तबीयत का हाल जानने के लिए मुलाकात की गई थी। उन्होंने इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस मुलाकात के राजनीतिक पहलुओं पर चर्चा हो रही है। अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषणों में इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन संजय निषाद ने स्वयं मुलाकात की वजह के तौर पर व्यक्तिगत संबंध और स्वास्थ्य का हाल जानना बताया है।
निषाद समाज की मांगों का मुद्दा
संजय निषाद लगातार निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं। उनके ताजा बयान में भी
समाज की लंबित मांगों के समाधान को राजनीतिक सहयोग से जोड़कर देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि निषाद समाज के मुद्दों का समाधान करने और सरकार से जुड़े मामलों को
सुलझाने में जो सहयोग करेगा, उसके साथ रहने की बात पर विचार किया जाएगा।
गोंडा घटना के बाद बढ़ी थी सक्रियता
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब गोंडा में निषाद पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत के
मामले को लेकर संजय निषाद ने प्रशासन के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई थी।
इस मामले को लेकर उन्होंने धरना भी दिया था और कार्रवाई की मांग उठाई थी।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष से उनकी मुलाकात ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधा राजनीतिक संबंध होने की पुष्टि संजय निषाद ने नहीं की है।
सीटों को लेकर भी सामने आया रुख
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निषाद पार्टी की चुनावी हिस्सेदारी को लेकर भी
संजय निषाद का रुख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने भाजपा नेतृत्व के साथ बातचीत में
पिछली बार की तुलना में अधिक सीटों की मांग रखने की बात कही है।
उन्होंने विशेष रूप से ऐसी सीटों पर पार्टी को मौका देने की बात कही
जिन्हें पिछली बार जीता नहीं जा सका था।
उनका कहना है कि ऐसी सीटों पर पार्टी जीत हासिल करने का प्रयास कर सकती है।
आगे क्या होगा, इस पर निगाह
संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन,
सीटों के बंटवारे और निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी।
फिलहाल संजय निषाद ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है, जबकि भाजपा और
सपा के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर उनके बयानों ने चर्चा को जरूर बढ़ाया है।
किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा इस मुलाकात से नहीं हुई है।
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