गोरखपुर से परशुराम यादव की रिपोर्ट
गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र में स्थित लोनाव गांव कुश्ती की एक जीवंत मिसाल है। यहां डेढ़ सौ साल पुराना मिट्टी का अखाड़ा सदियों की परंपरा को संजोए हुए है। जिला पंचायत सदस्य और राष्ट्रीय पहलवान अरविंद उर्फ बिट्टू राय इस विरासत को न सिर्फ जीवित रखे हुए हैं, बल्कि नई पीढ़ी को मजबूत बनाने में भी लगे हैं। लोनाव गांव कुश्ती अखाड़ा से निकले सैकड़ों पहलवान आज भारतीय सेना, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आइए जानते हैं इस गोरखपुर कुश्ती दंगल की पूरी कहानी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: राजा का इनाम बना कुश्ती का गढ़
लोनाव गांव की कहानी सदियों पुरानी है। किंवदंती के अनुसार, एक राजा ने अपने कुश्ती दंगल में विजयी होने वाले पहलवान को इस गांव को इनाम में दिया था। तब से यहां पारंपरिक कुश्ती परंपरा फल-फूल रही है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि माल्हनपार के निकट बने इस अखाड़े ने अनगिनत योद्धाओं को जन्म दिया। बिट्टू राय पहलवान के दादा सदरजीत राय ने इस परंपरा को मजबूती दी। आज राष्ट्रीय पहलवान बिट्टू राय इसे आगे बढ़ा रहे हैं।
हर सुबह सूर्योदय से पहले दर्जनों युवा और अनुभवी पहलवान अखाड़े पर पहुंचते हैं। यहां दाव-पेंच, मल्लयुद्ध की बारीकियां सिखाई जाती हैं। मिट्टी की सुगंध और पसीने की महक से भरा यह अखाड़ा उत्तर प्रदेश कुश्ती की सच्ची पहचान है। ग्रामीणों का कहना है कि यह न सिर्फ खेल का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी।
सैकड़ों पहलवानों की सफलता: सरकारी नौकरियों का सफर
लोनाव गांव कुश्ती अखाड़ा की सबसे बड़ी उपलब्धि है 500 से अधिक पहलवानों का सरकारी क्षेत्र में चयन। इनमें भारतीय सेना, नौसेना, उत्तर प्रदेश पुलिस, बिहार पुलिस, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली की पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ, रेलवे शामिल हैं। कई पहलवान जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं।
उदाहरण स्वरूप, पी आकाश यादव, सुन्ने पहलवान और राजेश्वर चौहान जैसे स्थानीय हीरो आज अखाड़े की शान हैं। इनकी सफलता से गांव के परिवार खुशहाल बने। बिट्टू राय के नेतृत्व में यह अखाड़ा युवाओं को अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और आत्मविश्वास सिखाता है। कोविड काल में भी अभ्यास जारी रहा, जिससे कई युवाओं को भर्ती में सफलता मिली।
बिट्टू राय की स्मृति में वार्षिक दंगल: उत्सव का मैदान
हर साल पहलवान बिट्टू राय अपने दादा सदरजीत राय की स्मृति में भव्य कुश्ती दंगल का आयोजन करते हैं।
इसमें क्षेत्र से लेकर प्रदेश स्तर के पहलवान आमंत्रित होते हैं।
जोरदार स्वागत, पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दंगल रंगीन हो जाता है।
आज ही अखाड़े पर जिला पंचायत सदस्य अरविंद उर्फ बिट्टू राय, पी आकाश यादव, सुन्ने पहलवान,
राजेश्वर चौहान समेत सैकड़ों लोग जोर आजमाइश करते नजर आए।
यह दंगल न सिर्फ खेल का त्योहार है, बल्कि गोरखपुर जिले के
ग्रामीण विकास का प्रतीक। स्थानीय प्रशासन और पंचायत भी
इसमें सहयोग करती है। बिट्टू राय का मानना है कि कुश्ती से युवा नशे और बेरोजगारी से दूर रहते हैं।
चुनौतियां और भविष्य: परंपरा को नई ऊंचाइयां
आज आधुनिक खेलों के जमाने में लोनाव गांव की कुश्ती परंपरा को बनाए रखना चुनौती है।
फिर भी बिट्टू राय पहलवान मॉडर्न ट्रेनिंग जोड़ रहे हैं। सरकार से अखाड़े के उन्नयन की मांग भी कर रहे हैं।
युवा पहलवान बताते हैं कि यहां का प्रशिक्षण जीवन बदल देता है।
लोनाव गांव कुश्ती अखाड़ा न सिर्फ खेल का केंद्र है, बल्कि सपनों का कारखाना।
पहलवान बिट्टू राय जैसे योद्धा इसे अमर बनाए रखेंगे। अधिक जानकारी के लिए कमेंट करें!
