UP: खुद को क्षत्रिय महासभा का महासचिव बताता था राज सिंह, सत्ताधारी नेताओं के बीच बनाता था पहचान

पश्चिम बंगाल में चर्चित हत्याकांड के मामले में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार आरोपी राज सिंह को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। भाजपा नेता Suvendu Adhikari के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी राज सिंह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था। बताया जा रहा है कि वह अक्सर सत्ताधारी नेताओं और राजनीतिक कार्यक्रमों के आसपास सक्रिय दिखाई देता था और भविष्य में चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था।

इस हाई प्रोफाइल केस में कोलकाता पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बक्सर निवासी मयंक मिश्रा और विक्की मौर्या के साथ तीसरा आरोपी बलिया के आनंद नगर का रहने वाला राज सिंह शामिल है।

कौन है राज सिंह?

राज सिंह बलिया सदर कोतवाली क्षेत्र के आनंद नगर मोहल्ले का निवासी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार वह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था और राजनीतिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहता था।

सूत्रों के मुताबिक राज सिंह की महत्वाकांक्षा राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की थी। वह कई राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के साथ दिखाई देता था और क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर वह खुद को सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करता था।

अयोध्या से हुई गिरफ्तारी

यूपी एसटीएफ और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम ने राज सिंह को अयोध्या जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र से 9 मई को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे पश्चिम बंगाल लेकर चली गई।

राज सिंह की मां जामवंती देवी ने बेटे की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए घटना वाले दिन के घर और बाजार के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है।

परिवार का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मोहल्ले में देर रात पहुंची पुलिस टीम

गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद आनंद नगर मोहल्ले में चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया। बताया जा रहा है कि आरोपी के मकान पर ताला लगा मिला।

पड़ोसियों के अनुसार देर रात कई गाड़ियों के आने की आवाज सुनाई दी थी।

इसके बाद सादे कपड़ों में कुछ लोग मोहल्ले में पहुंचे और पूछताछ करने के बाद वापस लौट गए।

हालांकि स्थानीय लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

झारखंड के कारोबारी की गाड़ी का इस्तेमाल

पुलिस सूत्रों के अनुसार चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद अपराधियों ने भागने के लिए जिस वाहन का

इस्तेमाल किया, वह झारखंड के एक व्यवसायी की बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक बक्सर निवासी मयंक मिश्रा चोरी-छिपे उस वाहन को पश्चिम बंगाल लेकर पहुंचा था।

भागने के दौरान रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाजा पर उसने अपने ही फास्ट टैग का

इस्तेमाल कर भुगतान किया, जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले।

इसी तकनीकी जानकारी और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच एजेंसियां आरोपियों तक पहुंचने में सफल रहीं।

राजनीतिक और आपराधिक कनेक्शन की जांच

जांच एजेंसियां अब इस मामले में राजनीतिक और आपराधिक नेटवर्क दोनों की जांच कर रही हैं।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या

सिर्फ आपराधिक साजिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में अंतरराज्यीय गैंग या राजनीतिक संरक्षण के सबूत मिलते हैं तो

आने वाले दिनों में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

बलिया के राज सिंह की गिरफ्तारी ने Suvendu Adhikari के PA मर्डर केस को और

ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। खुद को राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाला

राज सिंह अब गंभीर आपराधिक आरोपों के घेरे में है।

मामले में यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल के अपराध नेटवर्क की जांच जारी है और

आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।