UP: “सिविल सेवा की तैयारी करना चाहती हूं” — बेटी की मांग पर पिता का विरोध, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Moradabad की एक युवती ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने की इच्छा जताई, लेकिन परिवार के विरोध के बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।
युवती ने Allahabad High Court में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।

पिता ने दर्ज कराई गुमशुदगी

मामला छजलैट थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
युवती के पिता ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई और आरोप लगाया कि उसकी सहेली उसे बहलाकर गलत रास्ते पर ले जा रही है।
पिता का कहना है कि बेटी का घर से बाहर रहना उचित नहीं है।

युवती का पक्ष: पढ़ाई करना है, अपना करियर बनाना है

युवती ने कोर्ट में कहा कि वह बालिग है और अपनी सहेली के साथ रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती है।
उसने बताया कि उसकी सहेली उसे आर्थिक सहायता भी दे रही है।
युवती का आरोप है कि उसके पिता और रिश्तेदार उसे पढ़ाई छोड़ने और घर लौटने के लिए दबाव बना रहे हैं।

कोर्ट ने लिया संज्ञान

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की

खंडपीठ ने Moradabad के एसएसपी को जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा है कि पिता और बेटी के बीच विवाद की सच्चाई पता

लगाकर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की जाए।

अधिवक्ता की दलील

युवती के अधिवक्ता ने दलील दी कि एक बालिग महिला को अपनी पढ़ाई और

करियर चुनने का पूरा अधिकार है।
उसे रोकना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अधिकार बनाम पारिवारिक सोच

यह मामला एक बड़े सामाजिक मुद्दे को भी सामने लाता है, जहां एक ओर युवाओं की

स्वतंत्रता और करियर की आकांक्षाएं हैं, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक परंपराएं और सोच भी टकरा रही हैं।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट पर है।
रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे का फैसला करेगी और तय होगा कि

युवती को किस तरह की सुरक्षा और स्वतंत्रता मिलती है।

Moradabad का यह मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं बल्कि युवाओं के अधिकार और

समाज की सोच के बीच टकराव की कहानी है।
यह केस आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए

एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।