आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को देखकर हर कोई मुगल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज की मोहब्बत की मिसाल बताता है, लेकिन इस सफेद संगमरमर के महल को खड़ा करने में जिन हाथियों ने अपनी जान लगाई, उनकी कहानी आज भी किताबों के पन्नों में दबी है। अमर उजाला की 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में पुरातत्व विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि ताजमहल के निर्माण में 1000 से ज्यादा हाथी 22 साल तक दिन-रात जुटे रहे। 20 टन वजनी संगमरमर के ब्लॉक को ऊपर चढ़ाने से लेकर यमुना किनारे रैंप तक – हर जगह हाथी ही ताकत थे। यह ब्लॉग ताजमहल के उन अनसुने नायकों – हाथियों की पूरी कहानी लेकर आया है।
1632 से 1653 तक चला था हाथियों का मेहनताना
ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ और 1653 में पूरा हुआ। इतिहासकारों के अनुसार:
- मकराना (राजस्थान) से 20 टन के संगमरमर के ब्लॉक लाने में 1000+ हाथी
- फतेहपुर सीकरी, दिल्ली, ईरान, अफगानिस्तान से कीमती पत्थर लाने में हाथी ही वाहन थे
- एक हाथी एक बार में 1-2 टन वजन खींच सकता था
- यमुना नदी के रास्ते जहाज से आए पत्थरों को किनारे से साइट तक हाथी ही ले गए
यमुना किनारे 10 किमी लंबा रैंप बनाया गया था, जिस पर हाथी चढ़कर भारी पत्थर ऊपर ले जाते थे।
हाथियों की स्पेशल ट्रेनिंग और देखभाल
शाहजहाँ ने स्पेशल महावत नियुक्त किए थे। हर हाथी का:
- नाम रखा गया था (जैसे – विराट, अर्जुन, भीम)
- रोज 200 किलो चारा, गुड़ और घी मिलता था
- बीमार होने पर हकीम तैनात थे
- रात में आराम के लिए अलग बाड़े
पुरातत्वविद् डॉ. केके मुहम्मद बताते हैं, “बिना हाथियों के ताजमहल बनाना नामुमकिन था। चरखी और रस्सी सिस्टम था, लेकिन असली ताकत हाथियों की ही थी।”
यमुना किनारे का खास रैंप सिस्टम
यमुना नदी से ताजमहल तक 10 किलोमीटर का ढलान वाला रैंप बनाया गया था। इसमें:
- लकड़ी के मजबूत तख्ते लगे थे
- हाथी पत्थरों को रस्सी से बाँधकर ऊपर खींचते थे
- 20-25 हाथी एक साथ एक ब्लॉक चढ़ाते थे
- रैंप आज भी पुरातत्व सर्वेक्षण में मिलता है।
हाथियों की संख्या और खर्चा
- कुल 1000-1200 हाथी इस्तेमाल हुए
- एक हाथी का सालाना खर्च 5000 रुपये (उस समय की कीमत में)
- शाहजहाँ ने असम, श्रीलंका तक से हाथी मंगवाए थे
- निर्माण पूरा होने के बाद कई हाथियों को आजाद कर दिया गया
आज कहाँ हैं वो नायक?
निर्माण खत्म होने के बाद ज्यादातर हाथियों को जंगलों में छोड़ दिया गया। कुछ को शाही अस्तबल में रखा गया। आज ताजमहल के आसपास हाथी नहीं दिखते, लेकिन आगरा के हाथी गांव में आज भी उनके वंशज हैं। पर्यटक हाथी सवारी करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पूर्वजों ने ताजमहल बनाया था।