राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर: मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
गोरखपुर जनपद में उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ ने प्रदेश सरकार से निजी एवं वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों, रसोइयों, अनुचरों तथा उनके परिवारों को भी कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देने की मांग उठाई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन गोला तहसील में उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति में तहसीलदार सत्येंद्र कुमार मौर्य को सौंपा गया।
पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा देने की मांग
संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों, रसोइयों, अनुचरों और उनके परिवारों के लिए प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जो एक सराहनीय पहल है। संघ ने मांग की कि इसी प्रकार की सुविधा निजी और वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी उपलब्ध कराई जाए।
निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी मिले समान सुविधा
ज्ञापन में कहा गया कि निजी एवं वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण में योगदान देते हैं, इसलिए उन्हें भी स्वास्थ्य सुरक्षा का समान अधिकार मिलना चाहिए। संघ का कहना है कि गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में निजी विद्यालयों के कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे कैशलेस चिकित्सा योजना से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकार से सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील
उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि निजी एवं वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल किया जाए। संघ का कहना है कि इससे हजारों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
ब्लॉक अध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन संघ के ब्लॉक अध्यक्ष हरेंद्र यादव ने तहसीलदार सत्येंद्र कुमार मौर्य को सौंपा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो प्रदेश के हजारों निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान राजकुमार जायसवाल, महेश राव, पुनीत मिश्र, एसपी गुप्ता, हेमंत कुमार यादव सहित उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ के अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
सभी ने सरकार से इस मांग पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
निष्कर्ष
वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में
निजी विद्यालयों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में वहां कार्यरत
शिक्षकों और कर्मचारियों को भी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
अब इस मांग पर प्रदेश सरकार क्या निर्णय लेती है,
इस पर निजी विद्यालयों से जुड़े हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
FAQ
Q1. यह मांग किस संगठन ने उठाई है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ ने यह मांग उठाई है।
Q2. संगठन की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: निजी एवं वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों, रसोइयों,
अनुचरों और उनके परिवारों को भी कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देने की मांग की गई है।
Q3. ज्ञापन किसे सौंपा गया?
उत्तर: मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति में गोला के तहसीलदार सत्येंद्र कुमार मौर्य को सौंपा गया।
Q4. वर्तमान में यह सुविधा किन लोगों को मिल रही है?
उत्तर: संघ के ज्ञापन के अनुसार, वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों,
रसोइयों और अनुचरों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।
Q5. इस मांग से किसे लाभ हो सकता है?
उत्तर: यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो प्रदेश के निजी एवं
वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
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