दुबई में रोजी-रोटी कमाने गए गगहा क्षेत्र के युवक की संदिग्ध मौत, शव अब तक दुबई में फंसा; परिवार ने सांसद से लगाई गुहार

दुबई में संदिग्ध मौत से गगहा के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़गोरखपुर के अकुंसी गांव का 32 वर्षीय युवक ढाई वर्ष पहले रोजगार के लिए गया था दुबई, मौत के कारण अब भी स्पष्ट नहीं; परिजन कर रहे पार्थिव शरीर भारत लाने की मांग

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से दुबई गए एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सबसे दुखद बात यह है कि मौत के कई दिन बीत जाने के बावजूद उसका पार्थिव शरीर अब तक भारत नहीं लाया जा सका है। इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में शोक का माहौल है।

मृतक के परिजन भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, दुबई स्थित भारतीय दूतावास और जनप्रतिनिधियों से लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। परिवार की सबसे बड़ी इच्छा है कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द गांव पहुंचे, ताकि वे अंतिम दर्शन कर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें।

परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए गया था विदेश

मृतक की पहचान सुधीर यादव (32 वर्ष) के रूप में हुई है, जो गगहा थाना क्षेत्र के ग्राम अकुंसी (पंडित का नगवा) निवासी रामकिशुन यादव के पुत्र थे।

परिजनों के अनुसार सुधीर करीब ढाई वर्ष पहले बेहतर रोजगार की तलाश में दुबई गए थे। वहां उन्हें बिनघाती नामक कंपनी में नौकरी मिली थी। विदेश में नौकरी मिलने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि सुधीर की कमाई से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार का भविष्य बेहतर बनेगा।

लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसी दुखद खबर सुनने को मिलेगी, जो पूरे परिवार की जिंदगी बदल देगी।

5 मार्च के बाद अचानक टूट गया संपर्क

परिवार के अनुसार सुधीर यादव की आखिरी बार 5 मार्च 2026 को फोन पर बातचीत हुई थी। उस बातचीत के बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका।

शुरुआत में परिवार ने सोचा कि किसी तकनीकी कारण से संपर्क नहीं हो पा रहा होगा, लेकिन जब कई दिनों तक कोई जानकारी नहीं मिली तो चिंता बढ़ने लगी।

परिजनों ने कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया और परिचित लोगों के माध्यम से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

भारतीय दूतावास से मिली मौत की सूचना

लंबे इंतजार और चिंता के बाद 23 जून 2026 को दुबई स्थित भारतीय दूतावास से परिवार को फोन आया। दूतावास ने जानकारी दी कि सुधीर यादव की मृत्यु हो चुकी है।

यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्हें अब भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा कि परिवार का कमाने वाला सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहा।

मौत के कारणों पर अब भी बना हुआ है रहस्य

मृतक के परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि सुधीर यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

परिवार का आरोप है कि संबंधित कंपनी की ओर से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इसी कारण परिजन इस घटना को संदिग्ध मानते हुए पूरी सच्चाई सामने लाने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

परिवार का कहना है कि यदि मृत्यु स्वाभाविक कारणों से हुई है तो इसकी पूरी जानकारी दी जाए, और यदि

किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य कारण सामने आते हैं तो उचित कार्रवाई की जाए।

20 दिनों से अधिक समय से दुबई में है पार्थिव शरीर

इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सुधीर यादव का

पार्थिव शरीर अब तक भारत नहीं पहुंच पाया है।

परिवार के अनुसार कई दिनों से शव दुबई में ही रखा हुआ है। आर्थिक रूप से

साधारण परिवार होने के कारण वे विदेश में आवश्यक कानूनी और

प्रशासनिक प्रक्रियाएं स्वयं पूरी कराने में सक्षम नहीं हैं।

परिवार लगातार इस इंतजार में है कि सरकारी सहायता से पार्थिव शरीर जल्द गांव पहुंचे और

अंतिम संस्कार किया जा सके।

ग्राम प्रधान ने सांसद से लगाई मदद की गुहार

ग्राम प्रधान परमिन्ता देवी ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए बांसगांव के सांसद को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

पत्र में अनुरोध किया गया है कि विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों से

समन्वय स्थापित कर सुधीर यादव के पार्थिव शरीर को शीघ्र भारत लाने की व्यवस्था कराई जाए।

ग्राम प्रधान ने यह भी आग्रह किया है कि परिवार को हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि

इस कठिन समय में उन्हें राहत मिल सके।

ग्रामीणों ने भी उठाई मानवीय सहायता की मांग

सुधीर यादव की मृत्यु की खबर से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि वह मेहनती, सरल स्वभाव और मिलनसार युवक थे।

ग्रामीणों ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि

मानवीय आधार पर तत्काल हस्तक्षेप कर शव को भारत लाने की प्रक्रिया तेज की जाए।

साथ ही यदि मौत की परिस्थितियां संदिग्ध हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।

अंतिम विदाई का इंतजार कर रहा परिवार

सुधीर यादव के माता-पिता और अन्य परिजन आज भी इस उम्मीद में बैठे हैं कि

उनका बेटा अंतिम बार अपने घर लौटेगा।

परिवार का कहना है कि जब तक पार्थिव शरीर गांव नहीं पहुंचता, तब तक उन्हें मानसिक शांति नहीं मिल सकती।

वे चाहते हैं कि पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुधीर का अंतिम संस्कार किया जाए।

परिजनों ने सरकार से अपील की है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों के लिए

ऐसी परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाई जाए, ताकि

किसी अन्य परिवार को इस प्रकार की पीड़ा का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष

गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के अकुंसी (पंडित का नगवा) गांव के युवक सुधीर यादव की

दुबई में हुई संदिग्ध मौत और पार्थिव शरीर का लंबे समय से विदेश में फंसा होना न

केवल एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि विदेशों में कार्यरत

भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है।

अब परिवार, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि सरकार तथा भारतीय दूतावास से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि

जल्द आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर सुधीर यादव का पार्थिव शरीर भारत लाया जाएगा और

उनके परिवार को न्याय तथा आवश्यक सहायता मिल सकेगी।

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