नवागत मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन कमिश्नरी कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली की हकीकत परखी। शुक्रवार को कमिश्नरी पहुंचकर उन्होंने विभिन्न अनुभागों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्यालयी व्यवस्थाओं को और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से कोर्ट शाखा, रिकॉर्ड रूम और सांख्यिकी विभाग की व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने लंबित मामलों, अभिलेखों के रखरखाव, आंकड़ों की गुणवत्ता और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी ली। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आम जनता से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
पदभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही सक्रिय हुए मंडलायुक्त
इंद्र विक्रम सिंह ने बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त के पद का कार्यभार संभाला था। इसके अगले ही दिन उन्होंने कमिश्नरी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के जरिए उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि कार्यालय के विभिन्न अनुभागों में रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य किस प्रकार संचालित हो रहे हैं। साथ ही यह भी देखा गया कि अभिलेखों के रखरखाव, मामलों के निस्तारण और विभागीय रिपोर्टिंग में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है या नहीं।
मंडलायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक कार्यालयों की कार्यप्रणाली का सीधा प्रभाव आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। इसलिए व्यवस्था में किसी भी तरह की कमी को समय रहते दूर करना जरूरी है।
कोर्ट शाखा में लंबित वादों की ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त सबसे पहले कोर्ट शाखा पहुंचे। यहां उन्होंने लंबित वादों की स्थिति, फाइलों के निस्तारण की गति और अभिलेखों के रखरखाव की जानकारी ली।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी जाना कि पुराने मामलों को निपटाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का प्रयास किया जाए।
उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रकृति के मामलों में अनावश्यक देरी से संबंधित पक्षों को परेशानी होती है। ऐसे में मामलों के निस्तारण में समयबद्धता और प्रक्रिया की गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
फाइलों की इंडेक्सिंग और संधारण पर जोर
कोर्ट शाखा के निरीक्षण के दौरान फाइलों के संधारण और अनुक्रमण यानी इंडेक्सिंग को व्यवस्थित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।
मंडलायुक्त ने कहा कि फाइलों और दस्तावेजों का रिकॉर्ड इस तरह व्यवस्थित होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज आसानी से और कम समय में उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने के साथ-साथ रिकॉर्ड को अपडेट रखने के निर्देश दिए।
रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था भी परखी
इसके बाद मंडलायुक्त ने कमिश्नरी के रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने पुराने और महत्वपूर्ण अभिलेखों के रखरखाव, सुरक्षा, साफ-सफाई और संरक्षण की स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने अधिकारियों से जानकारी ली कि पुराने रिकॉर्ड किस तरह सुरक्षित रखे जा रहे हैं और उनकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं।
मंडलायुक्त ने कहा कि रिकॉर्ड रूम किसी भी प्रशासनिक कार्यालय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मौजूद अभिलेख भविष्य में विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में उपयोगी होते हैं। इसलिए इनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन में तेजी लाने के निर्देश
मंडलायुक्त ने महत्वपूर्ण और पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहने से जरूरत पड़ने पर जानकारी आसानी से हासिल की जा सकेगी। इससे रिकॉर्ड की सुरक्षा बढ़ने के साथ कार्यालयी कार्यों में पारदर्शिता और गति भी आएगी।
अभिलेखों को वर्षवार और विषयवार व्यवस्थित रखने तथा उनकी नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए।
सांख्यिकी विभाग में आंकड़ों की गुणवत्ता पर जोर
निरीक्षण के अगले चरण में मंडलायुक्त सांख्यिकी विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े आंकड़ों के संकलन, रखरखाव और विश्लेषण की प्रक्रिया की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि अलग-अलग योजनाओं से संबंधित आंकड़े किस माध्यम से एकत्र किए जाते हैं और उन्हें शासन स्तर पर किस प्रारूप में भेजा जाता है।
मंडलायुक्त ने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए सही और अद्यतन आंकड़े बेहद जरूरी हैं। यदि आंकड़ों में गलती हो तो योजना की समीक्षा और उसके क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
गलत आंकड़ों से बचने की हिदायत
मंडलायुक्त ने सांख्यिकी विभाग को निर्देश दिया कि रिपोर्ट तैयार करते समय आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने कहा कि शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में तथ्यात्मक और त्रुटिरहित जानकारी होनी चाहिए। आंकड़ों को भेजने से पहले उनका उचित स्तर पर सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने समयबद्ध तरीके से आंकड़े उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, ताकि
शासन स्तर पर योजनाओं की समीक्षा और आवश्यक निर्णय लेने में किसी तरह की देरी न हो।
कर्मचारियों की उपस्थिति और अनुशासन भी जांचा
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी जायजा लिया।
उन्होंने कर्मचारियों को समय से कार्यालय आने, अपने निर्धारित दायित्वों का
ईमानदारी से निर्वहन करने और कार्यालयीन कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का
अनुशासन तथा जिम्मेदारी के प्रति गंभीर होना जरूरी है।
आम जनता को नहीं होनी चाहिए परेशानी
मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि
कमिश्नरी कार्यालय में आने वाले आम लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि सभी अनुभागों में कार्यप्रणाली को सरल, प्रभावी और जनहितकारी बनाया जाए।
आम लोगों की समस्याओं और प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक देरी से बचना होगा।
साथ ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जहां भी व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत महसूस हुई,
वहां मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कार्यालयी व्यवस्था में छोटी-छोटी कमियों को नजरअंदाज करने के
बजाय उन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक
कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा और आम लोगों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
आगे भी जारी रहेंगे औचक निरीक्षण
निरीक्षण के अंत में मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि कमिश्नरी की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी,
जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए निरीक्षण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
मंडलायुक्त ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रशासनिक कार्यों में
गुणवत्ता सुधार प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष
गोरखपुर में नवागत मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने पदभार ग्रहण करने के
अगले ही दिन कमिश्नरी कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
कोर्ट शाखा में उन्होंने लंबित वादों और फाइलों के निस्तारण की स्थिति जानी,
जबकि रिकॉर्ड रूम में अभिलेखों के रखरखाव, सुरक्षा और डिजिटाइजेशन पर जोर दिया।
सांख्यिकी विभाग में उन्होंने आंकड़ों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और
समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा
कर्मचारियों की उपस्थिति, अनुशासन और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई।
मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि आम जनता को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं
उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए कार्यालयी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता,
जवाबदेही और तेजी सुनिश्चित करनी होगी। आने वाले दिनों में
कमिश्नरी के विभिन्न अनुभागों में निरीक्षण और समीक्षा की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।
FAQ
Q1. गोरखपुर के नवागत मंडलायुक्त ने कब औचक निरीक्षण किया?
पदभार ग्रहण करने के अगले दिन मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने कमिश्नरी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।
Q2. मंडलायुक्त ने किन विभागों का निरीक्षण किया?
उन्होंने कोर्ट शाखा, रिकॉर्ड रूम और सांख्यिकी विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
Q3. कोर्ट शाखा में किन बिंदुओं की समीक्षा हुई?
लंबित वादों, फाइलों के निस्तारण की गति, अभिलेखों के रखरखाव और इंडेक्सिंग की स्थिति की जानकारी ली गई।
Q4. रिकॉर्ड रूम को लेकर क्या निर्देश दिए गए?
महत्वपूर्ण अभिलेखों को व्यवस्थित रखने, वर्षवार एवं विषयवार संधारण करने,
सुरक्षा पर ध्यान देने और डिजिटाइजेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
Q5. सांख्यिकी विभाग को क्या निर्देश मिला?
अधिकारियों को सटीक, विश्वसनीय, अद्यतन और तथ्यात्मक आंकड़े समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
Q6. आम जनता के लिए मंडलायुक्त ने क्या कहा?
उन्होंने निर्देश दिया कि कमिश्नरी कार्यालय में आने वाले आम लोगों को
अनावश्यक परेशानी न हो और कार्यप्रणाली को सरल एवं प्रभावी बनाया जाए।
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