सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, तमिलनाडु के हर जिले में नवोदय स्कूल के लिए जमीन चिन्हित करें

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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना से जुड़े मामले में राज्य सरकार को अपने पहले के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान की जाए। इसके लिए तमिलनाडु सरकार को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है।

यह मामला तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना और विद्यालयों में लागू भाषा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की आपत्तियों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें पहले दिए गए निर्देश को वापस लेने की मांग की गई थी। अदालत ने इसके बजाय जमीन की पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान की जाए। अदालत ने दिसंबर 2025 में दिए गए अपने निर्देश का पालन करने के लिए राज्य को तीन महीने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को प्रस्तावित है

मुख्य बिंदु

हर जिले में जमीन की पहचान का निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार से जमीन की तत्काल खरीद या अधिग्रहण करने के लिए नहीं कहा गया है। निर्देश का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जिले में प्रस्तावित नवोदय विद्यालय के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करना है।

भाषा नीति भी मामले का अहम हिस्सा

तमिलनाडु सरकार की आपत्तियों में नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था प्रमुख मुद्दा है। राज्य में दो-भाषा नीति को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि नवोदय विद्यालयों में तीन-भाषा व्यवस्था से जुड़ा प्रावधान विवाद का विषय बना हुआ है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य को बातचीत के जरिए भाषा से जुड़े मतभेद दूर करने पर जोर दिया।

केंद्र और राज्य के बीच बातचीत पर जोर

अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी संवाद जारी रखने को कहा है।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से यह पक्ष रखा गया

जमीन उपलब्ध कराना राज्य की प्रमुख जिम्मेदारी है,

जबकि विद्यालयों के निर्माण और अन्य खर्चों से संबंधित जिम्मेदारियां केंद्र की ओर से पूरी की जा सकती हैं।

छात्रों के लिए शिक्षा का अवसर

जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार के आवासीय विद्यालय हैं,

जिनका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है।

तमिलनाडु में इन विद्यालयों की स्थापना होने पर राज्य के जिलों के लिए बेहतर

विद्यार्थियों के लिए एक अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालयी विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

आगे क्या होगा?

अब तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई तीन महीने की अवधि में प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

साथ ही केंद्र और राज्य के बीच भाषा नीति तथा विद्यालयों से जुड़े अन्य मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी।

मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को क्या निर्देश दिया?

हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन क्यों?

भाषा नीति को लेकर क्या है विवाद?

केंद्र और राज्य के बीच क्या होगी बातचीत?

छात्रों के लिए क्या बदल सकता है?

अब तमिलनाडु सरकार को क्या करना होगा?