राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर जिले की गोला तहसील क्षेत्र के ग्राम दीपगढ़ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास श्रीमती अनुराधा तिवारी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, कालिया नाग नाथन, गोवर्धन पूजा और रासलीला का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और भजनों की धुन पर झूम उठे।
माखन चोरी की लीला ने मोहा मन
कथा व्यास ने बताया कि बालकृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर माखन चुराने जाते थे। वे मटकी फोड़कर माखन खाते और बंदरों को भी खिलाते थे। जब यशोदा मैया उन्हें पकड़ने आतीं तो वे भोला चेहरा बनाकर कहते, “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।” कथा के दौरान श्रद्धालु इस प्रसंग को सुनकर आनंदित हो उठे।
उन्होंने आगे बताया कि एक दिन यशोदा मैया ने बालकृष्ण को ऊखल से बांध दिया, लेकिन भगवान ने ऊखल को खींचते हुए यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान चोरी नहीं करते, बल्कि भक्तों का चित्त चुरा लेते हैं।
कालिया नाग नाथन की कथा से मिला संदेश
कालिया नाग नाथन प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि कालिया नाग के विष से यमुना नदी का जल जहरीला हो गया था। इससे गायें और ग्वाल-बाल परेशान हो रहे थे। तब बालकृष्ण कदंब के वृक्ष से यमुना में कूद गए और कालिया नाग के फन पर नृत्य कर उसका अभिमान चूर कर दिया।
उन्होंने कहा कि कालिया नाग हमारे भीतर बसे अहंकार और बुराइयों का प्रतीक है, जिसे केवल भगवान की कृपा से ही समाप्त किया जा सकता है।
गोवर्धन पूजा की कथा ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
गोवर्धन पूजा प्रसंग में कथा व्यास ने बताया कि इंद्र को अपनी पूजा का अभिमान हो गया था। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि वे गोवर्धन पर्वत की पूजा करें, क्योंकि वही उन्हें अन्न, जल और जीवन प्रदान करता है।
जब इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा की, तब सात वर्षीय कन्हैया ने
अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों और पशुधन की रक्षा की।
इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने प्रकृति संरक्षण और अहंकार त्यागने का संदेश दिया।
रासलीला का आध्यात्मिक महत्व बताया
रासलीला का वर्णन करते हुए अनुराधा तिवारी ने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात
भगवान श्रीकृष्ण की बंसी की धुन सुनकर गोपियां सब कुछ छोड़कर उनके पास पहुंच गईं।
भगवान ने प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग रूप में रास रचाया।
उन्होंने कहा कि रासलीला का वास्तविक
अर्थ आत्मा का परमात्मा से मिलन है। यह प्रेम, समर्पण और
भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है, इसमें किसी प्रकार की वासना नहीं बल्कि शुद्ध प्रेम का भाव निहित है।
झांकियों और भजनों ने बांधा समां
कथा स्थल पर गोवर्धन पर्वत की आकर्षक झांकी सजाई गई थी। ‘छोटी छोटी गैया,
छोटे छोटे ग्वाल’ और ‘गोवर्धन धारी कृष्ण मुरारी’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर तक नृत्य करते रहे।
पूरा पंडाल राधे-कृष्ण और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
मुख्य यजमान सुभाष चंद्र विश्वकर्मा एवं उनकी पत्नी विंध्यवासिनी देवी ने
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया।
वहीं बच्चों ने कृष्ण-सुदामा की मनमोहक झांकी प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
दही-हांडी कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र
कथा के समापन पर दही-हांडी फोड़ने का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को
सही दिशा देने का संदेश देती है। माखन चोरी प्रेम का, कालिया नाथन
बुराइयों पर विजय का और गोवर्धन पूजा प्रकृति के सम्मान का संदेश देती है।
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