ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई के अंतिम जनाज़े में रविवार को तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ी। देशभर से आए लाखों समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई धार्मिक और राजनीतिक नारे लगाए गए। कुछ स्थानों पर अमेरिका और इसराइल विरोधी नारे सुनाई दिए, जबकि कुछ लोगों ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी उग्र नारे लगाए। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में इन नारों का उल्लेख किया गया है।
जनाज़े में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के वरिष्ठ अधिकारी और अली ख़ामेनेई के तीन बेटे मसूद, मुस्तफ़ा और मैसम मौजूद रहे। लेकिन सबसे अधिक चर्चा उनके बेटे और वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर हुई।
मोजतबा ख़ामेनेई क्यों नहीं पहुंचे?
मोजतबा ख़ामेनेई के जनाज़े में शामिल न होने के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। कुछ रिपोर्टों में सुरक्षा कारणों को उनकी गैरमौजूदगी की वजह बताया गया है। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि हालिया संघर्ष के दौरान उन्हें चोट लगने की चर्चाएं हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने उनकी गैरमौजूदगी पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जनाज़े में क्यों लगे ‘किल ट्रंप’ के नारे?
जनाज़े के दौरान कुछ वक्ताओं और समर्थकों ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ तीखी टिप्पणियां कीं। कई जगह “किल ट्रंप” और “डेथ टू अमेरिका” जैसे नारे भी सुनाई दिए। विश्लेषकों का मानना है कि यह हालिया अमेरिका-ईरान और इसराइल-ईरान तनाव का असर है, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
हालांकि यह भी स्पष्ट है कि ऐसे नारे जनाज़े में मौजूद कुछ लोगों द्वारा लगाए गए थे। इन्हें पूरे ईरानी समाज या सरकार का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता।
ईरान के लिए आगे की चुनौती
अली ख़ामेनेई के निधन के बाद ईरान के नए नेतृत्व के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। देश को
आर्थिक प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे समय में मोजतबा ख़ामेनेई की सार्वजनिक गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि मोजतबा सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं
या उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी होता है तो
उनकी गैरमौजूदगी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग सकता है।
निष्कर्ष
अली ख़ामेनेई के जनाज़े में उमड़ी भारी भीड़, ट्रंप विरोधी नारों और मोजतबा
ख़ामेनेई की गैरमौजूदगी ने इस पूरे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। फिलहाल
उनकी गैरमौजूदगी के पीछे सुरक्षा कारणों को प्रमुख वजह माना जा रहा है, लेकिन
इस संबंध में ईरान की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
FAQ
1. मोजतबा ख़ामेनेई जनाज़े में क्यों नहीं पहुंचे?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा कारण प्रमुख वजह बताए जा रहे हैं। आधिकारिक विस्तृत पुष्टि नहीं हुई है।
2. क्या जनाज़े में ट्रंप विरोधी नारे लगे थे?
हाँ, कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ लोगों ने ट्रंप और अमेरिका विरोधी नारे लगाए।
3. क्या मोजतबा घायल हैं?
कुछ रिपोर्टों में ऐसा दावा किया गया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
4. जनाज़े में कौन-कौन मौजूद था?
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और अली ख़ामेनेई के तीन बेटे समारोह में मौजूद रहे।
5. क्या ईरान ने मोजतबा की गैरमौजूदगी पर आधिकारिक बयान दिया है?
अब तक उनकी गैरमौजूदगी पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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